भारत सरकार की ओर से विभिन्न वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के साथ स्थापित किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का बड़ा सकारात्मक प्रभाव पश्चिम बंगाल के प्रमुख पारंपरिक उद्योगों पर दिखने जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब तक 9 देशों के साथ रणनीतिक व्यापार संधि संपन्न हो चुकी है। इस पहल का सीधा लाभ पश्चिम बंगाल की विश्व प्रसिद्ध चाय, समृद्ध मत्स्य उद्योग तथा विशिष्ट हस्तशिल्प क्षेत्र में कार्यरत कार्यबल को मिलने वाला है। सरकारी आकलन दर्शाते हैं कि राज्य के करीब 50 लाख नागरिक प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से इन तीन क्षेत्रों से आजीविका प्राप्त कर रहे हैं, जिनकी विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान होने से आय में बढ़ोतरी और वैश्विक मंच पर उत्पाद पहचान सुनिश्चित होगी।
चाय और मत्स्य पालन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती
पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग और डुआर्स क्षेत्र अपनी विशिष्ट गुणवत्ता वाली चाय के लिए दुनिया भर में ख्याति प्राप्त है। दार्जिलिंग चाय को पूर्व में ही GI टैग हासिल है, जिसकी मांग यूरोपीय संघ, जापान और मध्य पूर्व के देशों में निरंतर बनी रहती है। मुक्त व्यापार समझौतों के लागू होने के पश्चात सीमा शुल्क एवं आयात करों में कमी आने से भारतीय चाय विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हो सकेगी। निर्यात की मात्रा बढ़ने पर चाय बागानों में उत्पादन गतिविधियों को गति मिलेगी, जिससे श्रमिकों और ठेकेदारों के लिए दीर्घकालिक रोजगार सुरक्षा का वातावरण निर्मित होगा। आंकड़ों के अनुसार, केवल चाय उद्योग से ही राज्य के 10 लाख से 12 लाख लोग जुड़े हुए हैं।
इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल देश के अग्रणी मछली उत्पादक राज्यों में गिना जाता है, जहां समुद्री जल एवं मीठे पानी दोनों प्रकार के मत्स्य पालन का विशाल तंत्र कार्यरत है। इस क्षेत्र में लगभग 18 लाख से 20 लाख लोगों की आजीविका निर्भर करती है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यूरोप जैसे विकसित व्यापारिक केंद्रों में भारतीय समुद्री खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से झींगा मछली के लिए सीमा शुल्क में छूट मिलने से निर्यात का दायरा विस्तृत होगा। इससे तटीय क्षेत्रों में काम करने वाले मछुआरों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े स्थानीय व्यापारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
हस्तशिल्प उद्योग का पुनरुद्धार और महिला सशक्तीकरण
राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करने वाले कांथा कढ़ाई, डोकरा धातु कला, टेराकोटा शिल्प, जूट उत्पाद और बांस की कलाकृतियों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से रही है। हालांकि, पूर्व में विभिन्न देशों द्वारा लगाए गए उच्च आयात शुल्क और सीमित बाजार पहुंच के कारण इनका निर्यात अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच सका था। नए व्यापार करारों से विदेशी बाजारों में इन पारंपरिक उत्पादों की लागत प्रतिस्पर्धी बनेगी। जब अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में वृद्धि होगी, तो कुटीर उद्योगों, बुनाई केंद्रों और विनिर्माण इकाइयों में कार्यबल की आवश्यकता बढ़ेगी।
विशेष रूप से, चाय बागानों, मत्स्य प्रसंस्करण और हस्तशिल्प निर्माण में महिला श्रमिकों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन तीनों क्षेत्रों के सुदृढ़ीकरण से ग्रामीण एवं अर्ध शहरी क्षेत्रों में महिला रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, चालू वर्ष में राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई थी कि 42 उद्योगपतियों ने पश्चिम बंगाल में निवेश करने में रुचि दिखाई है। यद्यपि ये निवेश प्रस्ताव शुरुआती चरण में हैं, किंतु FTA के साथ नए औद्योगिक निवेश का समन्वय राज्य के समग्र आर्थिक परिदृश्य को नई ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
9 देशों के साथ बने व्यापारिक तंत्र का भौगोलिक ढांचा
भारत द्वारा हस्ताक्षरित रणनीतिक व्यापार समझौतों के माध्यम से पश्चिम बंगाल के निर्यातकों के लिए कई प्रमुख वैश्विक बाजार खुल चुके हैं
- यूएई: संयुक्त अरब अमीरात के साथ हुए समझौते से चाय, जूट, हस्तशिल्प और समुद्री उत्पादों के लिए मध्य पूर्व का विशाल बाजार सुलभ हुआ है।
- ब्रिटेन: ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार संधि से दार्जिलिंग चाय, चमड़ा उद्योग, वस्त्र, हस्तशिल्प और समुद्री खाद्य पदार्थों की भारी मांग उत्पन्न होने की संभावना है।
- ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलियाई बाजार में चाय, समुद्री उत्पादों और हस्तशिल्प के लिए नए व्यापारिक रास्ते बने हैं।
- EFTA देश: स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ संपन्न करारों से न केवल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा बल्कि उच्च स्तरीय विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा।
- मॉरीशस (CECPA): मॉरीशस के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग और भागीदारी समझौते से अफ्रीकी महाद्वीप के बाजारों तक निर्बाध पहुंच आसान होगी।
- आसियान एवं पूर्वी एशिया: आसियान समझौते के जरिए दक्षिण पूर्व एशिया के 10 देशों में निर्यात के मौके खुले हैं। इसके अतिरिक्त जापान के साथ हुआ समझौता चाय, समुद्री उत्पादों और इंजीनियरिंग वस्तुओं को बड़ा मंच प्रदान करता है। साथ ही दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के साथ हुए समझौतों से भी व्यापारिक मार्ग सुगम हुए हैं।
घरेलू बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की चुनौती
व्यापार विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि केवल मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर देने मात्र से स्वचालित रूप से निर्यात में वृद्धि नहीं हो जाती। इन अंतरराष्ट्रीय अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए घरेलू स्तर पर व्यापक सुधार आवश्यक हैं। पश्चिम बंगाल की निर्यात इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, आधुनिक पैकेजिंग, कुशल लॉजिस्टिक्स प्रणाली, व्यापक कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क और सुव्यवस्थित सप्लाई चेन को सुदृढ़ करना होगा। यदि स्थानीय अवसंरचना में ये आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो वैश्विक बाजार खुलने के बावजूद स्थानीय कंपनियां अपनी पूरी क्षमता का दोहन करने से वंचित रह सकती हैं।



















