वेनेजुएला की राजनीति में बड़ा बदलाव, मारिया कोरिना मचाडो की स्वदेश वापसीडोनाल्ड ट्रंप ने ईस्ट पोटोमैक गोल्फ कोर्स को बताया खतरनाक, 15 नवंबर को बंद करने की योजनामूलांक 8 राशिफल 29 अक्टूबर: शनि की चेतावनी, सुबह का रूटीन बिगड़ा तो होगा नुकसानकिराए के मकान की नकारात्मकता से पाएं मुक्ति, अपनाएं ये चार आसान वास्तु नियमगुरुग्राम में ब्लैकआउट जैसे हालात, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से चरमराई व्यवस्थादशकों पुरानी कमियों को सक्रिय साइबर खतरों में कैसे बदल रही है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसमूलांक 6 राशिफल 29 अक्टूबर: रिश्तों और कामकाज में शुक्र का विशेष प्रभाव, इन बातों का रखें ध्यानटेनिस जगत के दिग्गज स्टैन वावरिंका ने 23 साल के सुनहरे करियर को कहा अलविदा, बेसल में हुआ भावुक समापनअर्नब चक्रवात के साये में करवा चौथ, दिल्ली-एनसीआर में बारिश का अलर्ट और क्या समय पर दिखेगा चांदजोधपुर रिफ 2026 में जसनाथी सिद्धों का अग्नि नृत्य बना आकर्षण का केंद्र
विजयवाड़ा में सजा राष्ट्रीय सरस मेला, ग्रामीण महिलाओं के हुनर को मिल रहा बड़ा बाजारव्यापार
19 अक्तू॰ 2026, 10:29 pm (10 दिन पहले)· 2

विजयवाड़ा में सजा राष्ट्रीय सरस मेला, ग्रामीण महिलाओं के हुनर को मिल रहा बड़ा बाजार

विजयवाड़ा के पुन्नामी घाट पर चल रहा राष्ट्रीय सरस मेला दिल्ली-एनसीआर से बाहर आयोजित होने वाला पहला ऐसा बड़ा मंच है। इसमें 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महिला उद्यमी अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं।

देश के ग्रामीण इलाकों में छिपी प्रतिभा और पारंपरिक कला को मुख्यधारा के बाजारों से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की डीएवाई-एनआरएलएम योजना लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में राष्ट्रीय सरस मेले का आयोजन किया जा रहा है, जो महिला उद्यमियों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि अब देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सरकारी योजनाओं के समर्थन से तैयार होने वाले इन उत्पादों को अब एक राष्ट्रीय स्तर का मंच मिल रहा है, जिससे उनकी आय में भी सुधार हो रहा है।

दिल्ली-एनसीआर से बाहर पहला बड़ा आयोजन

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नामी घाट पर चल रहा यह राष्ट्रीय सरस मेला अपने आप में बेहद खास है। यह पहला मौका है जब इस तरह का राष्ट्रीय स्तर का मेला दिल्ली-एनसीआर के बाहर आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन की शुरुआत 13 अक्टूबर 2026 को हुई थी और यह 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। इस भव्य मेले में देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 1,500 महिला स्वयं सहायता समूह की उद्यमी और लखपति दीदियां हिस्सा ले रही हैं। इन महिलाओं ने 650 से अधिक स्टॉल लगाए हैं, जहां आगंतुकों के लिए क्षेत्रीय वस्त्र, हस्तशिल्प, प्राकृतिक वस्तुएं और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा, मेले में आने वाले लोगों के लिए एक विशेष इंडिया फूड कोर्ट, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सीखने के लिए समर्पित स्थान भी बनाए गए हैं, जो इस पूरे अनुभव को और भी अधिक आकर्षक बनाते हैं।

ये भी पढ़ें

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प और अनूठी उद्यमशीलता की भावना पर आधारित है। महिला स्वयं सहायता समूह इस प्रतिभा को स्थानीय बाजारों से निकालकर बड़े फलक पर लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पादों में हथकरघा वस्त्रों से लेकर हाथ से बनी वस्तुएं और स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री शामिल होती है। हालांकि, केवल एक बेहतरीन उत्पाद तैयार कर लेना ही काफी नहीं होता है। ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमियों को आगे बढ़ने के लिए सीधे ग्राहकों तक पहुंच, बाजार की मौजूदा जानकारी और नए कारोबारी अवसरों की सख्त आवश्यकता होती है। सरस मेले महिलाओं के नेतृत्व वाले इन उद्यमों को खरीदारों और विभिन्न संस्थागत संस्थानों के आमने-सामने लाकर इसी फासले को पाटने का काम करते हैं। पिछले करीब तीन दशकों के दौरान इन मेलों का स्वरूप काफी बदला है और अब ये केवल सामान्य प्रदर्शनियां न रहकर बड़े पैमाने पर व्यापार करने का माध्यम बन चुके हैं।

विकेंद्रीकरण की दिशा में एक नया कदम

राष्ट्रीय सरस मेले का विकेंद्रीकरण किया जाना देश के व्यापक विकास दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर के मंचों को पूरे भारत के उत्पादकों और उपभोक्ताओं के सबसे करीब लाना है। इस नीति के तहत स्थानीय कौशल को नए और बड़े बाजारों के साथ जोड़ा जा रहा है, जिससे महिला उद्यमियों के कारोबार को निरंतर गति मिल रही है। यह आयोजन इस बात का मार्ग भी प्रशस्त करता है कि कैसे अन्य बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को भी क्षेत्रीय स्तर पर सफलता के साथ आयोजित किया जा सकता है। यह सोच अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैठकों और सम्मेलनों को क्षेत्रीय स्तर पर ले जाने की नीति के बिल्कुल अनुरूप है, जिससे आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित होती है।

डीएवाई-एनआरएलएम की महत्वपूर्ण भूमिका

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन देश से ग्रामीण गरीबी को जड़ से खत्म करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख सरकारी कार्यक्रम है। यह मिशन स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों के माध्यम से धरातल पर काम करता है, साथ ही महिलाओं को वित्तीय समावेशन और टिकाऊ आजीविका के लिए लगातार समर्थन देता है। इसके जरिए महिलाओं को आधुनिक कौशल, वित्त पोषण, नई तकनीक और आजीविका के अन्य अवसर आसानी से मिल जाते हैं। उत्पादों की सही ब्रांडिंग, उनकी दृश्यता बढ़ाने और डिजिटल तथा संस्थागत बाजारों के साथ जुड़ाव स्थापित करने के मामले में यह कार्यक्रम एक मजबूत ढांचा तैयार करता है। बाजार के साथ यह सीधा जुड़ाव इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि किसी भी उद्यम की सफलता केवल उत्पादन तक सीमित नहीं होती है, बल्कि उसे बेचने के लिए सही मंच की भी जरूरत होती है।

वर्ष 1999 से अब तक का सफर

सरस मेले की शुरुआत आज से कई साल पहले 1999 में हुई थी, जब राजधानी दिल्ली में महज 65 लाभार्थियों के साथ पहला राष्ट्रीय सरस मेला आयोजित किया गया था। तब से लेकर अब तक यह मंच राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तरों तक बहुत बड़े दायरे में फैल चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक देश भर में कुल 117 राष्ट्रीय सरस मेले आयोजित किए जा चुके हैं और इन सभी आयोजनों की वार्षिक बिक्री का आंकड़ा ₹200 करोड़ से अधिक का रहा है। इसके अलावा, विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी साल में कम से कम दो बार अपने स्तर पर राज्य-स्तरीय सरस मेलों का आयोजन करते हैं। इस प्रकार पूरे देश में हर साल लगभग 50 ऐसे कार्यक्रम होते हैं जो स्थानीय उत्पादकों को बाजार खोजने, ब्रांडिंग करने और खरीदारों के साथ मजबूत रिश्ते बनाने में सहायता प्रदान करते हैं।

सवाल-जवाब

राष्ट्रीय सरस मेला 2026 कहां आयोजित किया जा रहा है?
यह मेला आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित पुन्नामी घाट पर आयोजित किया जा रहा है।
यह मेला कब से कब तक चल रहा है?
यह आयोजन 13 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है।
इस मेले में कितने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महिलाएं हिस्सा ले रही हैं?
इस मेले में 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 1,500 महिला उद्यमी भाग ले रही हैं।
यह मेला किस योजना के तहत आयोजित किया जाता है?
यह मेला केंद्र सरकार की दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत आयोजित किया जाता है।
दिल्ली-एनसीआर के बाहर आयोजित होने वाला यह कौन सा राष्ट्रीय सरस मेला है?
यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर आयोजित होने वाला पहला राष्ट्रीय सरस मेला है।
पहला राष्ट्रीय सरस मेला कब और कहां आयोजित हुआ था?
पहला राष्ट्रीय सरस मेला 1999 में दिल्ली में आयोजित किया गया था जिसमें लगभग 65 लाभार्थी शामिल हुए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Rohan Gupta@rohan-gupta·9 दिन पहले

विजयवाड़ा में महिलाओं के लिए ऐसा मंच लगना सचमुच बहुत अच्छी बात है। दिल्ली से बाहर भी ऐसे बड़े आयोजन होने चाहिए ताकि दूरदराज की दीदियों को अपने हुनर दिखाने का सही मौका मिल सके।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·9 दिन पहले

रोहन जी, आपकी बात सही है। पर क्या इतने बड़े मेले में आने वाली इन महिलाओं की संख्या अगले साल और बढ़ेगी?

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

दिल्ली के बाहर ऐसा बड़ा आयोजन होना वाकई अच्छा कदम है, महिला उद्यमियों को सीधा बड़ा बाज़ार मिल रहा है।

Michael Anderson@michael-anderson·9 दिन पहले

रविकेश, बात तो सही है, पर विजयवाड़ा में भीड़ वाकई उतनी जुटेगी जितनी दिल्ली में मिलती?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp