पश्चिम चम्पारण के बगहा दो प्रखंड के कदमहिया गांव की रहने वाली सुमन देवी ने स्वरोजगार की एक ऐसी मिसाल कायम की है जिसके बारे में शायद ही किसी ने सोचा हो। आज से लगभग दो साल पहले उन्होंने अपने घर से ही प्राकृतिक साबुन बनाने का काम शुरू किया था जो अब बड़ी संख्या में लोगों की पसंद बन चुका है। समय के साथ उनके उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है जिसके चलते उत्पादन में भी काफी इजाफा करना पड़ा है। हालात यह हैं कि अब ग्राहकों की मांग के मुकाबले साबुन का उत्पादन कम पड़ने लगा है।
प्रशिक्षण लेकर शुरू किया कारोबार
इस अनूठे सफर के बारे में बात करते हुए सुमन देवी बताती हैं कि उन्होंने दो साल पहले इस काम की शुरुआत की थी। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले नमामि गंगे संस्थान से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्होंने अपने घर से ही साबुन का उत्पादन शुरू कर दिया। सुमन का कहना है कि उनके द्वारा तैयार किया जाने वाला यह साबुन पूरी तरह से ब्यूटी सोप है जिसे बिना किसी हानिकारक केमिकल के बनाया जाता है।
कई नेचुरल वैराइटीज का हो रहा निर्माण
शुरुआती दौर में उन्होंने बकरी के दूध, नीम, चारकोल और ग्लिसरीन का इस्तेमाल करके साबुन तैयार किए थे। इन साबुनों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग बहुत ही आकर्षक तरीके से की जाती है। पूरी तरह केमिकल मुक्त होने और महज चालीस रुपये की किफायती कीमत के कारण लोगों ने इसे तुरंत अपना लिया और इसके बहुत अच्छे रिव्यू दिए। ग्राहकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए सुमन ने अपने कारोबार का दायरा बढ़ाया और साबुन की वैराइटी में कई नए उत्पाद जोड़े। अब वह हल्दी, कॉफी और एलोवेरा जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से भी साबुन का निर्माण कर रही हैं।
लागत कम और मुनाफा शानदार
वर्तमान स्थिति यह है कि सुमन अकेले इस साबुन के व्यवसाय से हर महीने औसतन तीस हजार रुपये की कमाई कर रही हैं। उनका यह भी कहना है कि इस व्यवसाय में लागत का अनुपात कमाई की तुलना में बहुत कम है जिसकी वजह से मुनाफा काफी अच्छा हो जाता है। उन्होंने दूसरी महिलाओं को भी सलाह दी है कि यदि वे आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं और खुद का काम शुरू करना चाहती हैं तो साबुन बनाने का यह कारोबार एक बेहतरीन विकल्प है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में उतरने से पहले विधिवत प्रशिक्षण लेना और लैब टेस्ट कराना बहुत जरूरी है।


















