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बारहवीं के बाद डॉक्टर बनें या इंजीनियर, AI की आंधी में किस डिग्री की राह ज्यादा सुरक्षितकरियर
26 जून 2026, 1:07 pm (45 दिन पहले)· 6

बारहवीं के बाद डॉक्टर बनें या इंजीनियर, AI की आंधी में किस डिग्री की राह ज्यादा सुरक्षित

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते दौर में बीटेक और एमबीबीएस दोनों डिग्रियों पर असर पड़ रहा है, लेकिन करियर सुरक्षा, कमाई और भविष्य की संभावनाओं के लिहाज से दोनों की तस्वीर बिल्कुल अलग है।

बारहवीं साइंस के बाद लाखों छात्रों के सामने एक ही सवाल खड़ा होता है, जेईई दो और बीटेक करो या नीट पास करो और एमबीबीएस की राह चुनो. यह फॉर्मूला दशकों से चलता आया है. लेकिन अब एक नई ताकत ने पूरी तस्वीर बदल दी है और वह है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI. चैटजीपीटी, डेविन और तमाम कोडिंग AI टूल्स ने टेक की दुनिया में ऐसी हलचल मचाई है कि छात्र अब दोबारा सोचने पर मजबूर हैं. सवाल एक ही है कि लाखों रुपये और कई साल लगाकर जो डिग्री लें, वह आने वाले कल में भी टिकी रहे, रोबोट उस करियर को निगल न जाए.

AI की आंधी में दोनों डिग्रियों का हाल

AI किसी भी सेक्टर को बख्श नहीं रहा, यह सच है. लेकिन हर क्षेत्र में कुछ भूमिकाएं ऐसी हैं जिन्हें मशीनें पूरी तरह नहीं ले सकतीं. बीटेक और एमबीबीएस दोनों पर AI का असर पड़ा है, लेकिन उसकी गहराई और नतीजे बिल्कुल अलग हैं. बारहवीं पास करके अब करियर की राह चुनने वाले छात्रों के लिए इस फर्क को समझना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.

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बीटेक: मौके भी हैं, खतरे भी कम नहीं

AI का सबसे पहला और सीधा झटका आईटी और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र को लगा है. बेसिक कोडिंग, बग फिक्सिंग और वेबसाइट डेवलपमेंट जैसे काम अब AI टूल्स कुछ ही सेकंड में निपटा देते हैं. छात्र 4 साल बीटेक में लगाते हैं और जब बाहर निकलते हैं तो पता चलता है कि उनके बहुत से काम AI पहले ही कर रहा है. अगर बीटेक में सिर्फ पुरानी और किताबी कोडिंग सीखकर निकलेंगे तो AI से टक्कर लेना बेहद मुश्किल होगा.

हालांकि, इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी है. AI को बनाने, उसे चलाते रहने और डेटा को संभालने के लिए कुशल इंजीनियरों की जरूरत आज भी उतनी ही है, बल्कि पहले से ज्यादा है. जो छात्र बीटेक में AI, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस या साइबर सिक्योरिटी जैसे नए क्षेत्रों में महारत हासिल करते हैं और अपनी प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल को धार देते हैं, उनके लिए करियर में बहुत कुछ है. बीटेक में अब सिर्फ डिग्री पर्याप्त नहीं है, असली और आधुनिक स्किल्स भी साथ होनी चाहिए.

एमबीबीएस: इंसानी स्पर्श की बदौलत मजबूत

करियर की सुरक्षा के नजरिए से देखें तो AI के दौर में एमबीबीएस की डिग्री बीटेक से कहीं ज्यादा टिकाऊ नजर आती है. AI किसी बीमारी की स्कैनिंग कर सकता है, दवाओं की सूची तैयार कर सकता है, लेकिन किसी बीमार इंसान का हाथ थामकर उसे हौसला देना उसके बस की बात नहीं है.

डॉक्टरी पेशे में सहानुभूति, क्रिटिकल थिंकिंग और मुश्किल घड़ी में इंसानी सूझबूझ से फैसला लेने की क्षमता सबसे ऊपर आती है. मरीज किसी रोबोटिक स्क्रीन से ज्यादा अपने डॉक्टर के हाथ के स्पर्श पर भरोसा करता है. भारत जैसे देश में डॉक्टरों की भारी कमी है, इसलिए इस क्षेत्र में मंदी या AI की वजह से नौकरी जाने का खतरा न के बराबर है. डॉक्टरी में भले ही AI डायग्नोसिस और रोबोटिक सर्जरी आ रहे हों, फिर भी इस पेशे की जड़ें इंसानी रिश्ते में इतनी गहरी हैं कि मशीन उन्हें उखाड़ नहीं सकती.

कमाई की तुलना: कौन पहले, कौन ज्यादा?

पैसों के मामले में बीटेक शुरुआत में साफ आगे रहता है. बीटेक पूरा होते ही 22 से 23 साल की उम्र में कॉर्पोरेट दुनिया में लाखों के पैकेज मिलने लगते हैं. एमबीबीएस में यह मुमकिन नहीं है. डॉक्टरी की पढ़ाई लंबी और मेहनत भरी है और अच्छी कमाई की स्थिति तक पहुंचते-पहुंचते उम्र 28 से 30 साल हो जाती है.

लेकिन लंबे समय की तस्वीर बिल्कुल अलग है. बीटेक में 40 से 45 साल की उम्र के बाद करियर सैचुरेशन या ले-ऑफ का खतरा बना रहता है. इसके उलट, एक डॉक्टर की कद्र उम्र और अनुभव बढ़ने के साथ लगातार बढ़ती जाती है. जो इंजीनियर जल्दी कमाना शुरू करता है, उसकी मध्य उम्र में राह मुश्किल हो सकती है. जबकि जो डॉक्टर देर से शुरू करता है, उसका करियर उम्र के साथ और चमकता जाता है.

अपनी रुचि देखें, AI का डर नहीं

जिन छात्रों को कोडिंग से सच्चा लगाव है, जो हर दिन बदलती तकनीक के साथ खुद को अपडेट रखने के लिए तैयार हैं और जल्दी कमाई शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए बीटेक आज भी बढ़िया विकल्प है. बशर्ते वे सिर्फ पुरानी कोडिंग तक न रुकें और AI, डेटा साइंस या साइबर सिक्योरिटी जैसे नए क्षेत्रों में भी दक्षता हासिल करें.

दूसरी तरफ, जो छात्र ऐसा करियर चाहते हैं जो आर्थिक मंदी और AI की आंधी में भी न डोले, जहां उम्र भर नौकरी की सुरक्षा हो और लंबी पढ़ाई का धैर्य रख सकते हों, उनके लिए एमबीबीएस बेहतर विकल्प है. करियर का फैसला हमेशा अपनी दिलचस्पी और स्वभाव के आधार पर करें, सिर्फ AI के डर से नहीं.

सवाल-जवाब

AI के दौर में बीटेक और एमबीबीएस में से कौन सी डिग्री ज्यादा सुरक्षित है?
करियर सुरक्षा के नजरिए से एमबीबीएस ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि डॉक्टरी में इंसानी सहानुभूति और सूझबूझ की जरूरत होती है जो AI पूरी तरह नहीं दे सकता.
बीटेक पर AI का क्या असर पड़ रहा है?
बेसिक कोडिंग, बग फिक्सिंग और वेबसाइट बनाने जैसे काम AI टूल्स करने लगे हैं, इसलिए सिर्फ पारंपरिक कोडिंग जानने वाले इंजीनियरों के लिए नौकरी का खतरा बढ़ गया है.
बीटेक और एमबीबीएस में कमाई कब शुरू होती है?
बीटेक के बाद 22-23 साल की उम्र में लाखों का पैकेज मिल सकता है, जबकि एमबीबीएस में अच्छी कमाई शुरू होने में 28-30 साल तक का समय लग जाता है.
क्या AI डॉक्टरों की नौकरी छीन सकता है?
नहीं, क्योंकि डॉक्टरी में मरीज से सहानुभूति, मौके पर इंसानी फैसला और हीलिंग टच की जरूरत होती है जिसे AI पूरी तरह नहीं कर सकता, और भारत में डॉक्टरों की कमी भी इस पेशे को सुरक्षित रखती है.
बीटेक में भविष्य के लिए सबसे बेहतर क्षेत्र कौन से हैं?
AI, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी में विशेषज्ञता हासिल करने वाले बीटेक छात्रों का भविष्य सबसे उज्ज्वल रहने की संभावना है.
बीटेक इंजीनियरों को 40-45 साल की उम्र के बाद क्या चुनौती आती है?
इस उम्र के बाद करियर सैचुरेशन या ले-ऑफ का खतरा बढ़ जाता है, जबकि डॉक्टर की वैल्यू उम्र और अनुभव के साथ लगातार बढ़ती रहती है.
क्या AI से पूरी तरह बचने वाला कोई करियर है?
एमबीबीएस उन करियर विकल्पों में से एक है जहां AI सबसे कम असर कर सकता है, क्योंकि इसमें इंसानी स्पर्श और भावनात्मक जुड़ाव की केंद्रीय भूमिका है.
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