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CUET PG 2026: कुछ विषयों की परीक्षा दो बार होने पर भी नहीं होगा नॉर्मलाइजेशन, NTA ने आंकड़ों से समझाई पूरी कहानीकरियर
13 जून 2026, 12:58 pm (46 दिन पहले)· 0

CUET PG 2026: कुछ विषयों की परीक्षा दो बार होने पर भी नहीं होगा नॉर्मलाइजेशन, NTA ने आंकड़ों से समझाई पूरी कहानी

CUET PG 2026 की कुछ परीक्षाएं अलग-अलग तारीखों में होने से छात्रों में नॉर्मलाइजेशन को लेकर डर फैल गया था, जिस पर NTA ने साफ किया है कि हर अभ्यर्थी को एब्सोल्यूट मार्क्स ही मिलेंगे।

CUET PG 2026 को लेकर बीते दिनों परीक्षार्थियों के बीच एक ही बात की चर्चा रही — आखिर कुछ चुनिंदा विषयों का पेपर एक से ज्यादा तारीखों पर क्यों लिया गया? इसी सवाल से जुड़ा एक और डर छात्रों के मन में घर कर गया था। उन्हें लग रहा था कि जब एक ही विषय की परीक्षा अलग-अलग दिनों में हुई है, तो कहीं नतीजा 'नॉर्मलाइजेशन' के फॉर्मूले से तो तैयार नहीं किया जाएगा। इसी उलझन और अफवाह पर विराम लगाने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) सामने आई और पूरी स्थिति विस्तार से साफ की।

आखिर क्यों कराना पड़ा दोबारा पेपर

NTA ने बताया कि मार्च 2026 में जब परीक्षाएं चल रही थीं, उसी दौरान मेघालय के तुरा में कानून-व्यवस्था बिगड़ गई थी। इसके अलावा कुछ विदेशी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा से जुड़े कारण आड़े आए। नतीजा यह हुआ कि कई अभ्यर्थी तय वक्त पर अपनी परीक्षा में बैठ ही नहीं पाए। ऐसे छात्रों की कुल संख्या 565 थी और ये 28 अलग-अलग विषयों से जुड़े थे। खास बात यह कि इनमें से किसी की अपनी कोई गलती नहीं थी — परिस्थितियों के चलते ये परीक्षा से वंचित रह गए। छात्रहित को सबसे ऊपर रखते हुए एजेंसी ने इन्हीं 565 परीक्षार्थियों के लिए 29 और 30 मार्च 2026 को फिर से परीक्षा कराई।

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नॉर्मलाइजेशन क्यों नहीं — NTA की दो-टूक नीति

एजेंसी ने अपनी नीति को बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में रखा। उसके मुताबिक CUET PG में हर अभ्यर्थी को सिर्फ और सिर्फ 'एब्सोल्यूट मार्क्स' यानी असली अंक ही दिए जाते हैं। चाहे वह मुख्य परीक्षा हो या फिर बाद में दोबारा कराया गया एग्जाम — किसी भी चरण पर अंकों को नॉर्मलाइज नहीं किया जाता। यही वजह है कि दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों को न तो कोई अतिरिक्त रियायत मिली और न ही कोई अलग फायदा। सबका आकलन एक ही पैमाने पर, पूरी निष्पक्षता के साथ हो रहा है।

आंकड़ों की जुबानी — क्यों संभव ही नहीं नॉर्मलाइजेशन

NTA ने सिर्फ बात नहीं कही, बल्कि गिनती के साथ समझाया कि इस मामले में नॉर्मलाइजेशन करना तकनीकी रूप से नामुमकिन क्यों है। दरअसल, मुख्य परीक्षा देने वालों के मुकाबले दोबारा परीक्षा में बैठने वालों की तादाद इतनी छोटी है कि सांख्यिकीय (स्टैटिस्टिकल) आधार पर इनकी तुलना करना ही बेमानी हो जाता है। कुछ उदाहरण इस फर्क को साफ कर देते हैं:

  • इंग्लिश: मुख्य परीक्षा में करीब 16,000 छात्र बैठे, जबकि दोबारा सिर्फ 120 ने पेपर दिया।
  • पॉलिटिकल साइंस: मुख्य परीक्षा में तकरीबन 26,000 अभ्यर्थी थे, जबकि री-शेड्यूल में महज 100।
  • हिस्ट्री: मुख्य परीक्षा में 13,600 से ज्यादा परीक्षार्थी थे, जबकि दोबारा बैठने वालों की संख्या 80 से भी कम रही।

एजेंसी का कहना है कि सिर्फ 80 या 100 बच्चों के एक छोटे समूह की हजारों परीक्षार्थियों के विशाल समूह से तुलना करके कोई नॉर्मलाइजेशन निकालना मुमकिन ही नहीं है।

क्या दोबारा हुआ पेपर आसान या मुश्किल था

छात्रों के बीच यह आशंका भी तैर रही थी कि बाद में हुई परीक्षा का स्तर मुख्य पेपर से अलग — कहीं ज्यादा आसान या ज्यादा कठिन तो नहीं था। NTA ने इस पर भी भरोसा दिलाया। एजेंसी के मुताबिक दोबारा परीक्षा के लिए इस्तेमाल हुए प्रश्नपत्र पहले से ही विषय के विशेषज्ञों ने तैयार और स्वीकृत किए थे। इन विशेषज्ञों ने बाकायदा प्रमाणित किया था कि इन पेपरों का कठिनाई स्तर मुख्य परीक्षा के पेपरों के बिल्कुल बराबर है। ऐसे में किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय होने की कोई गुंजाइश नहीं बचती।

नतीजा किस आधार पर बनेगा

कुल मिलाकर NTA का संदेश साफ है — CUET PG 2026 के हर एक उम्मीदवार का स्कोर पूरी तरह समान और वास्तविक अंकों के आधार पर ही तय हो रहा है। परीक्षा दोबारा कराने से स्कोरिंग के तरीके में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया है।

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