यूपीएससी की दो सबसे चर्चित सेवाओं, भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय इंजीनियरिंग सेवा, के नाम को लेकर अक्सर उम्मीदवार असमंजस में पड़ जाते हैं। दोनों पदों की गिनती देश की सबसे सम्मानित सरकारी नौकरियों में होती है, लेकिन इनका काम करने का तरीका, अधिकार क्षेत्र और जिम्मेदारियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। एक तरफ आईएएस अफसर किसी जिले या विभाग का पूरा प्रशासनिक जिम्मा संभालते हैं, तो दूसरी तरफ आईईएस अधिकारी देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने का काम करते हैं। सैलरी, पावर और सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर भी इन दोनों सेवाओं में फर्क साफ नजर आता है, इसलिए यूपीएससी की तैयारी करने वाले हर उम्मीदवार के लिए यह समझना जरूरी है कि उनके लिए कौन सी सेवा सही रहेगी।
सैलरी और सुविधाओं में कितना फर्क
7वें वेतन आयोग के मुताबिक आईएएस और आईईएस, दोनों ही अफसरों की शुरुआती बेसिक पे लेवल 10 के तहत 56,100 रुपये से शुरू होती है। यानी करियर की शुरुआत में दोनों पदों के बीच बेसिक सैलरी को लेकर कोई अंतर नहीं है। हालांकि बेसिक पे बराबर होने के बावजूद इन-हैंड सैलरी में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, क्योंकि यह पोस्टिंग के इलाके, महंगाई भत्ते (डीए), मकान किराया भत्ते (एचआरए) और स्पेशल अलाउंस पर निर्भर करता है। शुरुआती दौर में दोनों अफसरों को हर महीने करीब 80,000 से 1,00,000 रुपये के बीच सैलरी मिलती है।
प्रमोशन के मामले में भी दोनों सेवाओं का अपना अलग रास्ता है। लंबे अनुभव और वरिष्ठता के बाद आईएएस अफसर देश के सबसे बड़े प्रशासनिक पद, यानी कैबिनेट सचिव तक पहुंच सकते हैं, जहां सैलरी 2,50,000 रुपये फिक्स्ड हो जाती है। सुविधाओं की बात करें तो आईएएस अफसरों को सरकारी बंगला, गाड़ी, सुरक्षा गार्ड और प्रशासनिक रुतबा ज्यादा मिलता है, जबकि आईईएस अफसरों को अपने तकनीकी क्षेत्र में शानदार सुविधाओं के साथ-साथ खासा सम्मान भी हासिल होता है।
आईएएस और आईईएस अफसर असल में करते क्या हैं
आईएएस अफसर को प्रशासनिक प्रमुख कहा जा सकता है। यह अधिकारी जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), सचिव या किसी विभाग के प्रमुख के तौर पर काम करते हैं। इनकी जिम्मेदारी जिले या विभाग में कानून व्यवस्था बनाए रखना, सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करवाना और पूरे प्रशासनिक तंत्र को चलाना होती है। यानी किसी जिले के हर छोटे-बड़े फैसले में आईएएस अफसर की भूमिका सीधी होती है।
दूसरी तरफ आईईएस यानी भारतीय इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारी तकनीकी विशेषज्ञ की भूमिका निभाते हैं। ये अधिकारी रेलवे, सीपीडब्ल्यूडी, रक्षा जल सेना, सड़क और राजमार्ग जैसे मंत्रालयों में चीफ इंजीनियर या डायरेक्टर के पद पर तैनात होते हैं। इनका मुख्य काम देश के बड़े-बड़े निर्माण और तकनीकी प्रोजेक्ट्स की डिजाइनिंग और उन्हें अमल में लाना होता है। यानी जहां आईएएस प्रशासन और नीतियों की दुनिया में काम करते हैं, वहीं आईईएस इंजीनियरिंग और तकनीक की दुनिया में अपना योगदान देते हैं।
दोनों की सिलेक्शन प्रक्रिया कैसे अलग है
आईएएस बनने के लिए यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करना अनिवार्य है। यह परीक्षा तीन चरणों, प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू में होती है, और इसमें किसी भी स्ट्रीम, यानी आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स से पढ़े उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं।
वहीं आईईएस बनने के लिए यूपीएससी अलग से इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा, यानी यूपीएससी ईएसई आयोजित करता है। यह परीक्षा भी तीन चरणों, स्टेज 1, स्टेज 2 और इंटरव्यू में पूरी होती है, लेकिन इसमें पूछे जाने वाले सवाल पूरी तरह इंजीनियरिंग विषयों पर आधारित होते हैं। यही वजह है कि आर्ट्स बैकग्राउंड वाले उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते।
योग्यता, पात्रता और उम्र सीमा में फर्क
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो आईएएस बनने के लिए उम्मीदवार का किसी भी स्ट्रीम, यानी आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स में सिर्फ ग्रेजुएट होना काफी है। लेकिन आईईएस बनने के लिए इंजीनियरिंग यानी बीई या बीटेक की डिग्री होना जरूरी है, और वह भी सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन जैसी तय शाखाओं में।
उम्र सीमा के मामले में दोनों परीक्षाओं में एक जैसा नियम लागू होता है। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और अधिकतम उम्र 32 वर्ष तय की गई है। इसमें ओबीसी उम्मीदवारों को 3 साल की छूट मिलती है, जबकि एससी/एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 5 साल की अतिरिक्त छूट दी जाती है।
आपके लिए कौन सी सेवा सही रहेगी
अगर आप समाज से सीधे जुड़कर काम करना चाहते हैं, नीति-निर्माण का हिस्सा बनना चाहते हैं और प्रशासनिक ताकत आपको आकर्षित करती है, तो आईएएस आपके लिए बेहतर विकल्प है। इसमें जिले की कमान संभालने से लेकर बड़ी-बड़ी सरकारी योजनाओं को लागू करवाने तक की जिम्मेदारी मिलती है।
वहीं अगर आपको कोर इंजीनियरिंग पसंद है, आप शांत माहौल में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहते हैं और रोजमर्रा के राजनीतिक दबाव से दूर रहना चाहते हैं, तो आईईएस आपके लिए एकदम सही चॉइस साबित हो सकता है। आखिरकार, दोनों ही सेवाएं अपनी जगह देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों में गिनी जाती हैं, बस इनका काम करने का तरीका और जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं।



















