जुबीन गर्ग की मौत का मामला: ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन 29 अक्टूबर को पूरे असम में निकालेगी कैंडल मार्चमहर्षि वाल्मीकि जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश, सामाजिक समरसता और विरासत संरक्षण पर दिया जोरविदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का सपना होगा पूरा, इन आसान टिप्स से लाखों की स्कॉलरशिप पाना है मु मुमकिनसीहोर में रफ्तार का कहर, कार और बाइक की टक्कर के बाद वाहनों में लगी भीषण आग और दो लोग गंभीर घायलगैंगस्टर मंजीत महल के करीबी नफे सिंह उर्फ मंत्री की तिहाड़ जेल में मौत, 12 संगीन मामलों में था बंदजामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव कराने पर बनी सहमति, भूख हड़ताल खत्मपूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियां टकराईं, कई लोग घायलराजसमंद के घोड़ाघाटी में हादसे का शिकार हुई गाय को लगा मॉड्यूलर कृत्रिम पैर, दोबारा चलने में मिली कामयाबीकार्डानो पर बिकवाली का भारी दबाव: डेरिवेटिव्स और ऑन-चेन आंकड़ों से बड़ी गिरावट के संकेतमल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर गरमाई राजनीति, बीजेपी ने पूरे देश में खोला मोर्चा
अम्बिकापुर के मुकंदर सिंह ने छोड़ी पारंपरिक धान की खेती, अदरक और अरहर उगाकर लिख रहे सफलता की नई कहानीछत्तीसगढ़
26 अक्तू॰ 2026, 11:12 am (34 मिनट पहले)· 0

अम्बिकापुर के मुकंदर सिंह ने छोड़ी पारंपरिक धान की खेती, अदरक और अरहर उगाकर लिख रहे सफलता की नई कहानी

छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर विकासखंड स्थित ग्राम दरिमा के किसान मुकंदर सिंह ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन पर चलते हुए अपनी पारंपरिक खेती की शैली में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने लगभग डेढ़ एकड़ भूमि पर अदरक की फसल उगाई है और खेतों की मेड़ों पर अरहर लगाई है, जिससे उन्हें बंपर मुनाफे की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में खेती के मोर्चे पर एक नया और प्रेरणादायक बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां के किसान कृषि में नवाचार और फसल विविधीकरण को अपनाकर अपनी आमदनी को बढ़ाने और आजीविका को बेहतर बनाने के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अम्बिकापुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम दरिमा के रहने वाले किसान मुकंदर सिंह की यह कहानी इसी सकारात्मक बदलाव की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है। लंबे समय तक पारंपरिक रूप से केवल धान की खेती करने वाले मुकंदर सिंह ने इस खरीफ सीजन में कृषि विभाग की सलाह पर अपने पूरे खेती करने के तौर-तरीके को ही बदल डाला। उन्होंने इस बार धान उगाने के बजाय लगभग डेढ़ एकड़ भूमि पर अदरक की खेती की है और इसके साथ ही अपने खेतों की खाली मेड़ों पर अरहर की फसल बोई है। वर्तमान समय में उनकी यह फसल बेहद शानदार स्थिति में है, जिसे देखकर वे काफी उत्साहित महसूस कर रहे हैं और उन्हें इस प्रयोग से मोटी कमाई होने की पूरी संभावना नजर आ रही है।

कृषि विभाग के मार्गदर्शन से बदला खेती का पूरा अंदाज

किसान मुकंदर सिंह ने अपने इस सफर के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि खरीफ फसल की बुआई शुरू होने से ठीक पहले वे दरिमा समिति पहुंचे थे। वहां पर उपस्थित कृषि विभाग के तमाम अधिकारियों ने उन्हें लगातार एक ही फसल यानी धान की खेती करने के बजाय अन्य वैकल्पिक फसलों को उगाने के फायदों के बारे में विस्तार से समझाया। अधिकारियों ने उन्हें यह भी जानकारी दी कि वे किस प्रकार अरहर और तिलहन जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा अधिकारियों ने शासन द्वारा चलाई जा रही कृषक उन्नति योजना के तहत फसल विविधीकरण के लिए दी जाने वाली विशेष प्रोत्साहन राशि के बारे में भी पूरी बात बताई। मुकंदर सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों से प्राप्त इस बहुमूल्य मार्गदर्शन और पूरी जानकारी के बाद ही उन्होंने अपने खेत में इस वर्ष कुछ अलग और नया करने का पक्का निर्णय लिया। पिछले साल जिस जमीन पर उन्होंने धान की फसल उगाई थी, ठीक उसी भूमि पर इस बार उन्होंने अदरक की फसल लगा दी। इसके साथ ही खेतों की मेड़ों का बेहद शानदार ढंग से उपयोग करते हुए वहां अरहर की खेती की, ताकि उपलब्ध कृषि भूमि का ज्यादा से ज्यादा और बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

ये भी पढ़ें

डेढ़ एकड़ में अदरक की फसल और मेड़ों पर अरहर से बंपर उत्पादन की आस

मुकंदर सिंह ने अपनी कुल कृषि भूमि में से लगभग डेढ़ एकड़ के बड़े रकबे में अदरक की खेती करने का बड़ा फैसला लिया है। इसके साथ ही उन्होंने खेतों की मेड़ों पर उन बीजों को बोया है जो उन्हें सीधे कृषि विभाग की तरफ से प्राप्त हुए थे। इस तरह से उन्होंने एक ही खेत में अपनी मुख्य फसल के साथ-साथ मेड़ों पर दूसरी फसल उगाने की एक बहुत ही अनूठी पहल की है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि इस समय उनके खेत में अदरक और अरहर दोनों की फसलें बेहद स्वस्थ और अच्छी स्थिति में लहलहा रही हैं। खेत में हरी-भरी फसलों की लगातार हो रही बढ़वार को देखकर उनके मन को भारी संतोष और खुशी मिल रही है। वे बताते हैं कि पहले वे इस पूरे रकबे में केवल धान की पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन इस बार एक बिल्कुल नई वैकल्पिक फसल को अपनाकर उन्होंने खेती के क्षेत्र में एक साहसिक और नया प्रयोग किया है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि अदरक के बंपर उत्पादन के साथ-साथ उनके खेतों की मेड़ों पर तैयार हो रही अरहर से भी उन्हें अतिरिक्त उपज और मुनाफा हाथ लगेगा।

प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की जगी उम्मीद

मुकंदर सिंह ने इस बात का भी विशेष रूप से जिक्र किया कि दरिमा समिति में जब वे कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले थे, तो उन्हें एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात पता चली थी। अधिकारियों ने उन्हें समझाया था कि यदि वे कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान की खेती छोड़कर सरकार द्वारा निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करते हैं, तो उन्हें शासन की तरफ से प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आकर्षक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसी सरकारी जानकारी से प्रेरित और प्रोत्साहित होकर उन्होंने अपनी भूमि पर फसल विविधीकरण अपनाने का यह कदम उठाया। उन्होंने बहुत साफ शब्दों में कहा कि शासन और प्रशासन की तरफ से मिलने वाली इस प्रकार की आर्थिक सहायता और मदद हमेशा से ही किसानों को पारंपरिक खेती के उस पुराने दायरे से बाहर निकलकर अन्य लाभप्रद फसलों की तरफ आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित करती है।

लहलहाती फसल को देखकर फूले नहीं समा रहे हैं मुकंदर सिंह

अपने खेती के इस पूरे अनुभव को बहुत खुशी के साथ साझा करते हुए मुकंदर सिंह ने बताया कि वे ग्राम दरिमा के एक सामान्य किसान हैं। उन्होंने बताया कि ठीक पिछले साल उन्होंने इसी खेत में धान की फसल लगाई थी, लेकिन इस बार कृषि विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की बिल्कुल सटीक सलाह पर चलते हुए उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर अदरक की खेती की है और अपनी सभी मेड़ों पर अरहर के पौधे लगाए हैं। उन्होंने बताया कि अरहर के ये तमाम बीज भी उन्हें कृषि विभाग की तरफ से ही उपलब्ध कराए गए थे। वर्तमान समय की स्थिति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी फसल इस वक्त बेहद शानदार है और वे अपनी इस उन्नत खेती से बहुत ज्यादा खुश हैं।

फसल विविधीकरण से किसानों के लिए खुल रहे हैं खेती के नए द्वार

कृषि विभाग की तरफ से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि प्रदेश के किसानों को केवल धान के भरोसे न रहकर दलहन, तिलहन और अन्य तमाम वैकल्पिक फसलों की खेती करने के लिए आगे बढ़ाया जाए। फसल विविधीकरण की इस पूरी प्रक्रिया से किसानों को यह बड़ा अवसर मिलता है कि वे अपनी भूमि की बनावट और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के हिसाब से अलग-अलग प्रकार की बेहतरीन फसलें उगा सकें। इसके अलावा इससे किसानों की किसी एक ही फसल के ऊपर बनी रहने वाली निर्भरता काफी हद तक कम होती है और उनके लिए आय के कई नए अतिरिक्त स्रोत विकसित होने की संभावनाएं बहुत तेजी से बढ़ जाती हैं। ग्राम दरिमा के रहने वाले प्रगतिशील किसान मुकंदर सिंह ने कृषि विभाग के इसी मार्गदर्शन पर चलकर अदरक और अरहर की खेती को अपने जीवन में अपनाया है और इसी दिशा में एक बहुत ही अनुकरणीय पहल की है, जो अन्य किसानों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बन रही है।

सवाल-जवाब

मुकंदर सिंह ने इस सीजन में कौन सी फसलें उगाई हैं?
उन्होंने धान के स्थान पर लगभग डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की है और खेतों की मेड़ों पर अरहर उगाई है।
मुकंदर सिंह किस गांव के रहने वाले हैं?
वे छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम दरिमा के किसान हैं।
खेती का यह तरीका बदलने की प्रेरणा उन्हें कहाँ से मिली?
उन्हें दरिमा समिति में मौजूद कृषि विभाग के अधिकारियों से मार्गदर्शन और सलाह मिली थी।
विकल्प के रूप में दूसरी फसल उगाने पर कितनी प्रोत्साहन राशि मिलती है?
कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान के स्थान पर निर्धारित वैकल्पिक फसलें उगाने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी दी गई है।
अदरक और अरहर के बीज कहाँ से प्राप्त हुए?
अरहर के बीज कृषि विभाग की ओर से प्राप्त हुए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp