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बालोद में वनोपज से आत्मनिर्भरता: झलमला केंद्र पर महिलाएं तैयार कर रहीं इमली की कैंडी और अचारछत्तीसगढ़
12 अक्तू॰ 2026, 1:01 pm (23 मिनट पहले)· 0

बालोद में वनोपज से आत्मनिर्भरता: झलमला केंद्र पर महिलाएं तैयार कर रहीं इमली की कैंडी और अचार

बालोद के झलमला स्थित प्रसंस्करण केंद्र में ग्रामीण महिलाएं बिना किसी पूंजी निवेश के इमली से अचार और कैंडी तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का एक मजबूत जरिया सामने आया है। झलमला में स्थापित गैर काष्ठ वन उपज (NTFP) प्रसंस्करण इकाई में स्थानीय महिलाएं जंगलों से मिलने वाली उपज का मूल्य संवर्धन कर रही हैं। आसपास के वनांचल और ग्रामीण इलाकों से इमली तथा बेर जैसी वनोपज एकत्र कर इस केंद्र तक लाई जाती है। यहां महिलाएं किसी भी वित्तीय जोखिम या निजी पूंजी के बिना केवल अपने हुनर और श्रम के दम पर सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। वर्तमान में इस इकाई में मुख्य रूप से इमली का चटपटा अचार और स्वादिष्ट कैंडी बनाने का काम तेजी से चल रहा है।

सफाई से लेकर मसालों के मिश्रण तक की पूरी प्रक्रिया

इस प्रसंस्करण केंद्र पर कार्यप्रणाली पूरी तरह योजनाबद्ध और स्वच्छता पर आधारित है। काम से जुड़ी स्थानीय महिला लक्ष्मी उइके ने बताया कि जिले के जंगलों और गांवों से कच्ची इमली तथा बेर की खरीद करके केंद्र में पहुंचाया जाता है। इसके पश्चात सामग्री की गहन छंटाई होती है, जिसमें खराब या अनुपयोगी इमली को पूरी तरह अलग निकाल दिया जाता है। अचार को खास स्वाद देने के लिए इसमें सरसों का तेल, राई, जीरा, शुद्ध नमक और पारंपरिक खड़े मसालों का संतुलित मिश्रण मिलाया जाता है। घरेलू कामकाज संभालने वाली ये महिलाएं साफ-सफाई के कड़े मानकों का पालन करते हुए पूरे उत्पाद को तैयार करती हैं।

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उत्पादन के आधार पर सीधा पारिश्रमिक

इस केंद्र में काम करने वाली महिलाओं की आमदनी सीधे तौर पर उनके द्वारा तैयार किए गए माल की मात्रा पर निर्भर करती है। व्यवस्था के अनुसार, एक किलोग्राम इमली का अचार तैयार करने पर कामगार महिला को 50 रुपये का सीधा भुगतान किया जाता है। केंद्र में वर्तमान समय में चार महिलाएं नियमित तौर पर सक्रिय रहकर इस पूरे काम को संभाल रही हैं। लागत का बोझ न होने के कारण महिलाओं को केवल अपने काम की गुणवत्ता और उत्पादन पर ध्यान देना होता है, जिससे उन्हें अपनी मेहनत का पारदर्शी मेहनताना बिना किसी कटौती के मिल जाता है।

दैनिक उत्पादन के आंकड़े और कड़ी मेहनत

इमली से विविध व्यंजन तैयार करने की डगर काफी श्रमसाध्य है। केंद्र से जुड़ी कंचन साहू ने जानकारी दी कि इमली का अचार बनाने में काफी धैर्य और शारीरिक मेहनत की जरूरत पड़ती है। सबसे प्राथमिक चरण में इमली से छिलके और रेशे हटाकर उसकी धुलाई व छंटाई की जाती है। गुणवत्ता सुनिश्चित होने के बाद तय मानकों के अनुरूप पकाने और मसाला मिलाने का काम होता है। वर्तमान में इस केंद्र की चार महिलाएं मिलकर हर रोज औसतन 28 किलोग्राम इमली का अचार और करीब 17 किलोग्राम इमली की कैंडी सफलतापूर्वक तैयार कर रही हैं।

स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग और महिलाओं का आर्थिक संबल

गैर काष्ठ वन उपज केंद्र में संचालित यह कार्य ग्रामीण परिवारों की माली हालत सुधारने में मददगार साबित हो रहा है। अपनी जेब से एक भी रुपया लगाए बिना श्रम आधारित आमदनी मिलने से काम कर रही महिलाएं बेहद संतुष्ट हैं। जंगलों से मिलने वाली मामूली उपज में वैल्यू एडिशन होने से क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना रही है, बल्कि स्थानीय वन उत्पादों को नए और आधुनिक रूप में व्यापक बाजार तक पहुंचाने के रास्ते भी खोल रही है।

सवाल-जवाब

बालोद जिले में इमली प्रसंस्करण का यह काम कहां चल रहा है?
यह कार्य छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित झलमला की गैर काष्ठ वन उपज (NTFP) प्रसंस्करण इकाई में संचालित किया जा रहा है।
इस केंद्र पर किन वनोपजों से उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं?
यहां जंगलों और ग्रामीण अंचलों से खरीदी गई इमली और बेर की सफाई करके इमली का अचार तथा कैंडी बनाई जा रही है।
काम करने वाली महिलाओं को इस काम के लिए कितनी पूंजी लगानी पड़ती है?
महिलाओं को अपनी तरफ से कोई पूंजी नहीं लगानी पड़ती, वे केवल अपने श्रम और कौशल के आधार पर आय कमाती हैं।
इमली का अचार तैयार करने पर महिलाओं को कितना पारिश्रमिक मिलता है?
एक किलोग्राम इमली का अचार तैयार करने के बदले महिलाओं को 50 रुपये का भुगतान किया जाता है।
वर्तमान में केंद्र में कितनी महिलाएं कार्यरत हैं?
फिलहाल इस प्रसंस्करण इकाई में नियमित रूप से चार महिलाएं सक्रिय होकर काम संभाल रही हैं।
इकाई में प्रतिदिन कितना अचार और कैंडी का उत्पादन हो रहा है?
इस केंद्र में प्रतिदिन लगभग 28 किलोग्राम इमली का अचार और करीब 17 किलोग्राम इमली की कैंडी तैयार की जा रही है।
इमली के अचार में किन सामग्रियों और मसालों का उपयोग किया जाता है?
साफ की गई इमली के साथ सरसों का तेल, सरसों (राई), जीरा, नमक और विभिन्न प्रकार के खड़े मसाले मिलाए जाते हैं।
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