छत्तीसगढ़ में गन्ना उत्पादक किसानों के लिए राज्य प्रशासन की ओर से एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है, जिसके तहत फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में सीधे 70 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। इस नए संशोधन के बाद अब राज्य में गन्ने की आधिकारिक खरीद दर 425 रुपये प्रति क्विंटल तय हो गई है, जबकि इससे पहले तक किसानों को 355 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा था। मूल्य वृद्धि के इस सरकारी फैसले के तुरंत बाद लंबे समय से सड़क पर डटे प्रदर्शनकारी किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन फिलहाल स्थगित करने का ऐलान कर दिया है।
मुख्यमंत्री के साथ बैठक में बनी सहमति
यह निर्णय किसान संघ के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ हुई विस्तृत चर्चा के बाद सामने आया। इस बातचीत से पहले आंदोलनकारी किसानों द्वारा किए गए विरोध के कारण पिछले तीन दिनों से नेशनल हाईवे पर भीषण जाम की स्थिति बनी हुई थी और आवागमन पूरी तरह प्रभावित था। सरकार के साथ सहमति बनने और आंदोलन के स्थगित होने के बाद यातायात व्यवस्था सामान्य हो गई है, जिससे लंबे समय से परेशानी झेल रहे आम यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को बड़ी राहत मिली है।
पेराई सत्र 2025-26 के भुगतान पर भी लागू होगी नई दर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस नीतिगत बदलाव की जानकारी साझा करते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली ही राज्य की समृद्धि का मूल आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शक्कर कारखानों द्वारा गन्ने की खरीदी अब 425 रुपये प्रति क्विंटल के नए भाव पर की जाएगी। इसके अतिरिक्त, पेराई सत्र 2025-26 के दौरान की गई खरीद का बकाया भुगतान भी इसी बढ़ी हुई दर के हिसाब से किसानों के खातों में अंतरित किया जाएगा, ताकि खेती को आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी बनाया जा सके।
चार मांगें मानी गईं, 27 अक्टूबर को घेराव की चेतावनी
प्रशासन की ओर से उठाए गए इस कदम से आंदोलनरत किसानों की कुल 7 प्रमुख मांगों में से 4 मुख्य मांगों पर औपचारिक सहमति बन गई है, जिसके चलते राजमार्ग से अवरोध हटा लिया गया। हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि उनका अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। संघ ने स्पष्ट किया है कि शेष बची अन्य मांगों को पूरा कराने के लिए वे 27 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे और अपना व्यापक विरोध दर्ज कराएंगे।






















