कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व प्रभारी दीपक बाबरिया का शनिवार, 10 अक्टूबर को निधन हो गया। उनके निधन से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है। बाबरिया ने अपने राजनीतिक जीवन में कांग्रेस संगठन के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और विभिन्न राज्यों में पार्टी की संगठनात्मक संरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन
दीपक बाबरिया कांग्रेस के उन अनुभवी नेताओं में गिने जाते थे, जिन्हें पार्टी आलाकमान समय-समय पर अलग-अलग राज्यों में संगठन के कामकाज और समन्वय को दुरुस्त करने का जिम्मा सौंपता था। मध्य प्रदेश में भी वह कांग्रेस के प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य स्तर के नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और सांगठनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर काम किया।
जून 2023 में मिली थी हरियाणा और दिल्ली की कमान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जून 2023 में दीपक बाबरिया को हरियाणा और दिल्ली का पार्टी प्रभारी नियुक्त किया था। इस दोहरी जिम्मेदारी के तहत उन्हें दोनों प्रमुख राज्यों में संगठन की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करने और स्थानीय नेतृत्व के साथ केंद्रीय नेतृत्व का संवाद साधने का दायित्व दिया गया था। कांग्रेस व्यवस्था में राज्य प्रभारी का पद बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि वे प्रदेश इकाई और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच मुख्य सेतु के रूप में कार्य करते हैं।
विधानसभा चुनाव के बाद इस्तीफे की पेशकश
हरियाणा में प्रभारी पद पर रहते हुए दीपक बाबरिया विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारियों और संगठनात्मक फैसलों में पूरी तरह सक्रिय रहे। हालांकि, अक्टूबर 2024 में जब हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आए और कांग्रेस को जीत नहीं मिल सकी, तब उन्होंने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य और चुनावी परिणामों की नैतिक जिम्मेदारी को इस कदम की मुख्य वजह बताया था। बाबरिया ने पार्टी नेतृत्व से आग्रह किया था कि उनकी जगह किसी अन्य नेता को यह प्रभार सौंपा जा सकता है और इस संबंध में अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया था।
कांग्रेस संगठन में लंबा और समर्पित अनुभव
दीपक बाबरिया की पहचान कांग्रेस संगठन में गहराई से जुड़े एक समर्पित नेता के रूप में थी। अलग-अलग राज्यों में महत्वपूर्ण दायित्व संभालने के कारण उन्हें जमीनी राजनीति और संगठनात्मक ढांचे का व्यापक अनुभव था। हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे अहम राज्यों में उनके काम की वजह से वह राज्य स्तरीय राजनीति और पार्टी के आंतरिक गलियारों में एक प्रमुख चेहरा बने रहे।























