राष्ट्रीय राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो की चौकसी अब एक ऐसे पुलिस अधिकारी के हाथों में सौंपी गई है, जिन्होंने अकादमिक दुनिया में शीर्ष मुकाम हासिल करने के साथ-साथ सुदूर नक्सल प्रभावित जंगलों में भी कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभाला है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. संतोष कुमार सिंह को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अर्थात सीआईएसएफ में दिल्ली मेट्रो का नया उप महानिरीक्षक नियुक्त किया है। हर रोज 80 लाख से अधिक मुसाफिरों की आवाजाही संभालने वाली इस विशाल मेट्रो प्रणाली में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के मोर्चे पर यह तैनाती बेहद अहम मानी जा रही है।
छात्र जीवन में स्वर्ण पदक और अंतरराष्ट्रीय शोध
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की मिट्टी से निकले डॉ. संतोष कुमार सिंह की पहचान प्रशासनिक गलियारों में एक 'स्कॉलर-वॉरियर' के रूप में की जाती है। वर्दी पहनने से पहले उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल की थीं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करते हुए उन्होंने स्नातक स्तर पर सर्वोच्च स्थान पाया और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में स्वर्ण पदक जीता।
अपनी अकादमिक रुचि को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नेट-जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पहले एम.फिल और फिर डॉक्टरेट की उपाधि पूरी की। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों पर उनका गहरा शोध रहा है और उन्होंने 'इंस्टिट्यूशनलाइजेशन ऑफ पीसएजुकेशन' शीर्षक से एक पुस्तक भी लिखी है। वर्ष 2010 की सिविल सेवा परीक्षा में 369वीं रैंक प्राप्त कर वे भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए थे।
बस्तर के बीहड़ों से लेकर नौ जिलों में पुलिस कप्तानी
फील्ड पोस्टिंग के दौरान डॉ. संतोष कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ के अत्यंत चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील अंचलों में काम किया। उन्होंने राज्य के नौ अलग-अलग जिलों में पुलिस अधीक्षक तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारियां संभालीं। इन जिलों में राजधानी रायपुर के अतिरिक्त बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव और रायगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक व प्रशासनिक केंद्र शामिल रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने बस्तर और सुकमा जैसे घोर वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में भी लंबे समय तक सेवाएं दीं। सुकमा और बस्तर की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में नक्सलियों के विरुद्ध चलाए गए अभियानों के रणनीतिक संचालन ने उनकी नेतृत्व क्षमता को मजबूत आधार दिया। कठिन परिस्थितियों में शांति बहाली और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण उन्हें जमीनी पुलिसिंग का माहिर अधिकारी माना जाता है।
'निजात' अभियान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
दंडात्मक कार्रवाई के साथ मानवीय दृष्टिकोण को जोड़ने की कार्यशैली ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया। नशीले पदार्थों, गांजा और अवैध शराब के बढ़ते जाल को खत्म करने के लिए उन्होंने 'निजात' नामक एक व्यापक जन अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत नशे के कारोबारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ भटके हुए युवाओं की काउंसलिंग और उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया गया।
महासमुंद जिले में पदस्थापना के दौरान बच्चों के लिए भयमुक्त और बाल-हितैषी वातावरण तैयार करने वाली उनकी पुलिसिंग पहलों को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली। वर्ष 2021 में अमेरिका स्थित अंतरराष्ट्रीय पुलिस प्रमुखों के संगठन इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ्स ऑफ पुलिस ने उन्हें वैश्विक स्तर के '40 अंडर 40' सम्मान से नवाजा। यह प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कार प्राप्त करने वाले वे चुनिंदा भारतीय अधिकारियों में शामिल रहे हैं।
औद्योगिक परिसंपत्तियों की रक्षा से मेट्रो नेटवर्क तक
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के बाद डॉ. सिंह को हैदराबाद में सीआईएसएफ दक्षिण जोन-2 का प्रभार सौंपा गया था। वहां डीआईजी के पद पर रहते हुए उन्होंने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के प्रमुख बंदरगाहों, हवाई अड्डों और भारी रणनीतिक संयंत्रों की सुरक्षा संरचना का प्रबंधन देखा। हाल के समय में राजधानी दिल्ली में होने वाले विभिन्न नागरिक आंदोलनों और राजनीतिक जमावड़ों के दौरान मेट्रो स्टेशनों पर दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील माहौल में सीआईएसएफ के मेट्रो सुरक्षा प्रभाग का नेतृत्व एक कड़े प्रशासक को सौंपा गया है ताकि 80 लाख यात्रियों का सुरक्षित सफर सुनिश्चित रह सके।





















