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बरसीम की खेती से पशुपालकों का बढ़ेगा दूध उत्पादन, 5 से 6 कटाई के साथ मिट्टी की ताकत भी बढ़ाएगी यह फसलभारत
29 अग॰ 2026, 7:38 am (47 मिनट पहले)· 1

बरसीम की खेती से पशुपालकों का बढ़ेगा दूध उत्पादन, 5 से 6 कटाई के साथ मिट्टी की ताकत भी बढ़ाएगी यह फसल

मौसम में बदलाव के कारण पशुओं के लिए हरे चारे की किल्लत दूर करने में बरसीम एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। इसमें 20 प्रतिशत तक कच्चा प्रोटीन होता है और यह फसल एक बार बोने पर 5 से 6 बार कटाई का लाभ देती है।

मौसम बदलने के साथ ही पशुपालन करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पशुओं के लिए पौष्टिक और हरे चारे का प्रबंध करने की होती है। जब खेतों में पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध नहीं होता, तब किसानों को विवश होकर अपने मवेशियों को सूखा चारा देना पड़ता है। सूखा चारा लगातार खाने से दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और उनका दूध उत्पादन भी धीरे-धीरे घटने लगता है। इस समस्या से निपटने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बरसीम की खेती करने की सलाह दी है। बरसीम न केवल पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है, बल्कि यह किसानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद लाभकारी और किफायती हरा चारा सिद्ध होता है।

पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन के लिए सुपर फूड

बरसीम को पशुओं के लिए एक प्रकार का सुपर फूड माना जाता है। इस हरे चारे में लगभग 20 फ़ीसदी तक कच्चा प्रोटीन मौजूद होता है, जो मवेशियों के शरीरिक विकास और ऊर्जा के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा इसमें कई महत्वपूर्ण खनिज तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह चारा स्वभाव से बहुत ही मुलायम, रसीला और सुपाच्य होता है। स्वाद में अच्छा होने के कारण दुधारू पशु इसे बेहद चाव से खाते हैं। आसानी से पच जाने की वजह से पशुओं का पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। रोजाना बरसीम का सेवन करने से मवेशियों की दूध देने की क्षमता में वृद्धि होती है और उत्पादित दूध की गुणवत्ता तथा वसा मात्रा में भी सुधार देखने को मिलता है।

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उपयुक्त मिट्टी और खेत की तैयारी का तरीका

कृषि एक्सपर्ट डॉ. अखिलेश के अनुसार बरसीम की बेहतर उपज प्राप्त करने के लिए सही जमीन का चुनाव और खेत की उचित तैयारी बहुत जरूरी है। इस फसल के लिए हल्की दोमट मिट्टी और जल निकासी वाली भूमि सबसे अधिक उपयुक्त मानी जाती है। बुवाई से पूर्व खेत को अच्छी तरह से तैयार करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले खेत की कम से कम 2 से 3 बार गहरी जुताई करनी चाहिए। गहरी जुताई करने से मिट्टी के ढेले टूट जाते हैं और वह पूरी तरह भुरभुरी हो जाती है। जुताई के बाद खेत में पाटा चलाकर उसे समतल कर लेना चाहिए ताकि सिंचाई या बारिश का पानी किसी एक स्थान पर जमा न हो सके।

बीज की मात्रा और राइजोबियम कल्चर से उपचार

बरसीम की बुवाई के लिए बीज की सही मात्रा और उसके उपचार पर ध्यान देना आवश्यक है। एक एकड़ खेत में बुवाई करने के लिए लगभग 8 से 10 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। बुवाई प्रक्रिया शुरू करने से पहले बीजों को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना अनिवार्य माना जाता है। जब बीजों को उपचारित करके बोया जाता है, तो पौधों की जड़ों में विशेष ग्रंथियां यानी गांठें बनती हैं। ये गांठें मिट्टी और वातावरण से नाइट्रोजन को सोखकर पौधों को पोषण प्रदान करती हैं, जिससे फसल मजबूत बनती है। बुवाई के समय खेत की क्यारियों में हल्का पानी भरकर बीजों का छिड़काव किया जाता है। पानी के कारण बीज मिट्टी में अच्छी तरह बैठ जाते हैं और उनका अंकुरण बेहतर होता है।

एक बार बुवाई और 5 से 6 बार कटाई का चक्र

इस फसल की सबसे बड़ी खासियत इसका बहु-कटाई चक्र है। एक बार बुवाई करने के बाद किसान पूरे सीजन भर इससे कई बार हरा चारा प्राप्त कर सकते हैं। खेत में बुवाई के लगभग 50 दिनों के बाद फसल पहली कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। पहली कटाई के बाद पौधों का पुनर्विकास बहुत तेजी से होता है और हर 25वें दिन के अंतराल पर फसल अगली कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इस प्रकार पूरे सीजन के दौरान किसान 5 से 6 बार तक चारे की कटाई कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, जड़ों में बनने वाली गांठों के कारण खेत की मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होता है।

सवाल-जवाब

बरसीम की फसल में कितना प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है?
बरसीम के हरे चारे में लगभग 20 प्रतिशत तक कच्चा प्रोटीन और कई आवश्यक खनिज पाए जाते हैं।
एक एकड़ खेत में बरसीम बुवाई के लिए कितने बीज की आवश्यकता होती है?
एक एकड़ खेत में बुवाई करने के लिए लगभग 8 से 10 किलो बरसीम बीज की आवश्यकता होती है।
बरसीम बुवाई से पहले बीजों का उपचार किस कल्चर से करना चाहिए?
फसल की अच्छी वृद्धि और जड़ों में गांठें बनाने के लिए बीजों का उपचार राइजोबियम कल्चर से करना चाहिए।
बरसीम की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है?
बरसीम की खेती के लिए हल्की दोमट और अच्छी जल निकासी वाली जमीन सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
बरसीम की पहली कटाई बुवाई के कितने दिनों बाद की जाती है?
बुवाई के लगभग 50 दिनों के बाद बरसीम की फसल पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
पहली कटाई के बाद अगली कटाई कितने दिनों के अंतराल पर की जा सकती है?
पहली कटाई के बाद हर 25वें दिन के अंतराल पर अगली कटाई की जा सकती है।
एक सीजन में बरसीम की फसल से कितनी बार कटाई ली जा सकती है?
सही देखभाल के साथ पूरे सीजन में किसान 5 से 6 बार तक हरे चारे की कटाई कर सकते हैं।
बरसीम की बुवाई से पहले खेत की कितनी बार जुताई करनी चाहिए?
खेत की मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए कम से कम 2 से 3 बार अच्छी तरह से जुताई करके पाटा चलाना चाहिए।
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