छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी भिलाई में स्कूल जा रही एक नाबालिग छात्रा के साथ सुनसान रास्ते पर छेड़छाड़ की गंभीर घटना सामने आई है। सुबह के समय जब छात्रा अपनी सहेली के घर होते हुए स्कूल की तरफ बढ़ रही थी, तभी दो लड़कों ने उसे सुनसान जगह पर घेर लिया और बदसलूकी करने लगे। पीड़िता के शोर मचाने और उसी दौरान वहां से गुजर रहे कुछ राहगीरों के सक्रिय होने से छात्रा को बचाया जा सका। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और वारदात के मात्र चार घंटे के भीतर दोनों नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लेकर बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया।
सुबह स्कूल जाते वक्त सुनसान रास्ते पर घेरा
यह वारदात सुबह करीब 8:30 से 9:00 बजे के बीच घटित हुई, जब नाबालिग छात्रा रोजमर्रा की तरह अपने घर से स्कूल के लिए रवाना हुई थी। रास्ते में वह अपनी सहपाठी सहेली को साथ लेने उसके घर की तरफ जा रही थी। इसी दौरान भिलाई स्टील प्लांट क्षेत्र में स्थित खंडहरनुमा वीरान इमारतों और घनी झाड़ियों वाले निर्जन इलाके से गुजरते समय दो नाबालिग लड़कों ने उसे अकेला पाकर रास्ता रोक लिया। सन्नाटे का लाभ उठाते हुए दोनों आरोपियों ने छात्रा के साथ जबरदस्ती और छेड़छाड़ शुरू कर दी।
चीख-पुकार और वीरान खंडहरों के बीच फंसी मासूम
अचानक हुए इस हमले से घबराई छात्रा ने अपनी आत्मरक्षा के लिए पूरी ताकत से बचाओ-बचाओ की गुहार लगानी शुरू की। घटनास्थल के आसपास पुरानी जर्जर इमारतें, खंडहर और वीरान परिसर होने की वजह से छात्रा की चीखें काफी देर तक दूर तक नहीं पहुंच सकीं। आसपास किसी की मौजूदगी न होने से काफी देर तक पीड़िता को कोई सहायता नहीं मिल पाई और आरोपी जबरदस्ती करते रहे, जिससे छात्रा लगातार दहशत में घिरती चली गई।
राहगीरों की सूझबूझ और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
जब बच्ची बुरी तरह डरकर बेबस होने लगी थी, तभी कुछ स्थानीय युवक संयोगवश उसी वीरान रास्ते से होकर गुजरे। उन्होंने देखा कि एक नाबालिग बच्ची बदहवास स्थिति में है और दो लड़के उसके साथ जबरदस्ती कर रहे हैं। युवकों को अपनी दिशा में तेजी से बढ़ता देख दोनों आरोपी लड़के सकपका गए और भागने का प्रयास करने लगे। राहगीरों ने बिना किसी देरी के तत्काल भिलाई नगर पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी दी।
चार घंटे की सघन घेराबंदी में धरे गए दोनों आरोपी
सूचना मिलते ही भिलाई नगर पुलिस का दल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा और सबसे पहले डरी-सहमी छात्रा को सुरक्षित संरक्षण में लिया। इसके बाद पुलिस ने इलाके की नाकेबंदी कर खंडहरों और आसपास के इलाकों में गहन तलाशी अभियान शुरू किया। पुलिस की तेजतर्रार कार्रवाई के चलते घटना के महज चार घंटे के अंदर दोनों अपचारी बालकों को दबोच लिया गया। पूछताछ की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को बाल न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से अदालत के निर्देश पर उन्हें बाल संप्रेक्षण गृह यानी रिमांड होम भेज दिया गया।






















