निराशा के भंवर से निकलने का तिब्बती मंत्र, अजीत डोभाल ने सुनाया माउंट एवरेस्ट के अनुभवी साथी का किस्सासोने की कीमतों में भारी उछाल के बाद स्थिरता, जानें चांदी और सभी कैरेट के ताजा भावकिचन में रखे इडली स्टैंड से बनाएं चार लाजवाब डिशेज, नाश्ता बनेगा बेहद आसान और टेस्टीबिना मेहनत लगातार थकान और चक्कर महसूस होना कई छिपी शारीरिक समस्याओं का संकेतविंध्य में पुत्रजीवक पौधे को लेकर उत्सुकता, जानिए पारंपरिक महत्व और कीमततुला राशि में 26 सितंबर से बुध का गोचर, जानें करियर और आर्थिक मोर्चे पर किन राशियों की चमकेगी किस्मतउत्तर प्रदेश की राजधानी में बनेगा देश का पहला थ्री टियर ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, शहीद पथ पर एलिवेटेड रोड के ऊपर दौड़ेगी मेट्रोभारत में तैयार होगी 350 की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन, दिल्ली से पटना का सफर महज तीन घंटेअरुणाचल प्रदेश में सजेगा ज़ीरो फेस्टिवल, देश-विदेश के 40 से अधिक फनकार बिखेरेंगे सुरों का जादूऋषिकेश में पांच दशक पहले कैसा था राम झूला का स्वरूप, बुजुर्गों ने बयां किया शांत माहौल और कच्ची सड़कों का दौर
बस्तर में शेड नेट तकनीक से खीरे के बीज उत्पादन का सफल प्रयोग, कम जमीन में लाखों कमाने की नई राहछत्तीसगढ़
20 सित॰ 2026, 12:20 pm (30 मिनट पहले)· 0

बस्तर में शेड नेट तकनीक से खीरे के बीज उत्पादन का सफल प्रयोग, कम जमीन में लाखों कमाने की नई राह

बस्तर के किसान इशपर मौर्य ने आधे एकड़ में शेड नेट और मल्चिंग तकनीक से खीरे के बीज की उन्नत खेती शुरू की है, जिससे पचास हजार रुपये की लागत में साढ़े चार लाख रुपये तक कमाई की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में पारंपरिक खेती के ढर्रे को बदलते हुए किसानों ने अब आधुनिक और व्यावसायिक कृषि तकनीकों की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में एक प्रगतिशील किसान इशपर मौर्य ने कृषि विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह के साथ खीरे के बीज तैयार करने का नया प्रयोग किया है। आधे एकड़ खेत में संरक्षित शेड नेट संरचना तैयार करके की जा रही इस खेती से न सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज तैयार हो रहे हैं, बल्कि कीटों और मौसमी बीमारियों का खतरा भी न्यूनतम स्तर पर आ गया है। इस आधुनिक विधि के सहारे किसान पारंपरिक फसलों और सामान्य सब्जियों के मुकाबले अपनी आय को दोगुना करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

खेत की तैयारी और पौध रोपाई का वैज्ञानिक तरीका

इस आधुनिक खेती की शुरुआत करने के लिए खेत की गहरी जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बनाया गया, जिसके बाद रोटावेटर चलाकर जमीन को समतल किया गया। इसके बाद क्यारियां यानी बेड तैयार की गईं, जिसमें एक बेड से दूसरे बेड के बीच चार फीट का फासला रखा गया। पौधों के बेहतर विकास और हवा के आवागमन को ध्यान में रखते हुए पौधे से पौधे की दूरी एक फीट तय की गई। क्यारियों में नमी बनाए रखने और खरपतवार को रोकने के लिए मल्चिंग बिछाई गई तथा बेलों को सहारा देने के लिए मजबूत खूंटे गाड़े गए।

ये भी पढ़ें

उर्वरक प्रबंधन और फसल का जीवन चक्र

फसल को संतुलित पोषण देने के लिए मिट्टी में बुनियादी खाद के रूप में गोबर की सड़ी खाद मिलाई गई। इसके अलावा पौधों की जरूरत के मुताबिक डीएपी, पोटाश और यूरिया का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया गया है। यह फसल रोपाई के लगभग दो महीने बाद फल देना शुरू कर देती है और लगभग तीन महीने के भीतर बीज निकालने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। पहली बार इस तकनीक को अपनाने के कारण खेत में कुछ पौधों की पत्तियां मुड़ने की समस्या जरूर सामने आई है, जिसका सटीक कारण समझने के लिए किसान लगातार प्रयासरत हैं।

लागत का हिसाब और बंपर मुनाफे का गणित

आधे एकड़ रकबे में शेड नेट, खूंटे गाड़ने, मल्चिंग शीट लगाने, खाद और जुताई समेत कुल खर्च लगभग पचास हजार रुपये आया है। इस छोटे से रकबे से करीब डेढ़ क्विंटल खीरे के उन्नत बीज प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है। वर्तमान बाजार में खीरे के बीज का भाव तीन लाख चालीस हजार रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। इस भाव के अनुसार यदि डेढ़ क्विंटल बीज की पैदावार मिलती है, तो पचास हजार रुपये की साधारण लागत पर किसान को लगभग साढ़े चार लाख रुपये की सीधी कमाई होने की पूरी संभावना है।

सब्जियों के उतार-चढ़ाव से मुक्ति और तय आमदनी

सब्जी उत्पादक किसानों को अक्सर मंडियों में कीमतों के भारी उतार-चढ़ाव का नुकसान झेलना पड़ता है। कई बार भरपूर पैदावार होने के बावजूद दाम इतने गिर जाते हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। इसके विपरीत बीज उत्पादन की खेती में पहले से तय दरों पर खरीदार मिल जाते हैं, जिससे किसानों को बिक्री के लिए भटकना नहीं पड़ता। नियंत्रित शेड नेट वातावरण से फसल रोगों से सुरक्षित रहती है और किसान को निश्चित आय की गारंटी मिलती है।

सवाल-जवाब

खीरे के बीज की खेती किस तकनीक से की जा रही है?
यह खेती शेड नेट तकनीक, मल्चिंग शीट और चार फीट चौड़े बेड बनाकर की जा रही है, जिससे बीमारियों का खतरा कम रहता है।
आधे एकड़ में खेती करने पर कितनी लागत आई है?
खेत की जुताई, रोटावेटर, खूंटा गाड़ने, मल्चिंग और खाद मिलाकर लगभग पचास हजार रुपये की लागत आई है।
इस फसल को तैयार होने में कितना समय लगता है?
फसल रोपाई के दो महीने बाद फल देने लगती है और लगभग तीन महीने में पूरी तरह तैयार हो जाती है।
आधे एकड़ से कितनी पैदावार और आमदनी की उम्मीद है?
लगभग डेढ़ क्विंटल बीज उत्पादन की उम्मीद है, जिससे तीन लाख चालीस हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर साढ़े चार लाख रुपये तक की आय हो सकती है।
किसान सामान्य सब्जी की जगह बीज उत्पादन क्यों चुन रहे हैं?
सब्जियों के बाजार भाव लगातार घटते-बढ़ते रहते हैं, जबकि बीज की खेती में दाम पहले से तय होते हैं और बिक्री के लिए भटकना नहीं पड़ता।
खेती में कौन सी मुख्य खाद का इस्तेमाल किया गया है?
फसल में बुनियादी तौर पर गोबर की सड़ी खाद, डीएपी, पोटाश और यूरिया का उपयोग किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 मिनट पहले

बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आधुनिक कृषि तकनीक से किसानों का आर्थिक सशक्तिकरण कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब ग्रामीण युवाओं और किसानों को सीमित भूमि से निश्चित और बड़ा लाभ मिलता है, तो सामाजिक अपराधों और भटकाव की आशंका घटती है। बीज उत्पादन जैसी लाभदायक पद्धतियाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर स्थायी शांति और कानूनी स्थिरता को बढ़ावा देती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·5 मिनट पहले

करण जी की बात सही है। शासन और जन-नीति के दृष्टिकोण से इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत कम जमीन पर उच्च-मूल्य कृषि उत्पादकता है। यदि राज्य प्रशासन और उद्यानिकी विभाग ऐसे व्यक्तिगत प्रयासों को संस्थागत संरक्षण देकर क्षेत्रीय स्तर पर क्लस्टर-आधारित बीज उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित करें, तो इससे छोटे किसानों को बाजार के जोखिम से स्थायी सुरक्षा मिलेगी। नक्सल प्रभावित या सामाजिक रूप से संवेदनशील ग्रामीण इलाकों में इस तरह की नीतिगत पहल पलायन रोककर दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक स्थिरता कायम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp