छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में पारंपरिक खेती के ढर्रे को बदलते हुए किसानों ने अब आधुनिक और व्यावसायिक कृषि तकनीकों की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में एक प्रगतिशील किसान इशपर मौर्य ने कृषि विशेषज्ञों की तकनीकी सलाह के साथ खीरे के बीज तैयार करने का नया प्रयोग किया है। आधे एकड़ खेत में संरक्षित शेड नेट संरचना तैयार करके की जा रही इस खेती से न सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज तैयार हो रहे हैं, बल्कि कीटों और मौसमी बीमारियों का खतरा भी न्यूनतम स्तर पर आ गया है। इस आधुनिक विधि के सहारे किसान पारंपरिक फसलों और सामान्य सब्जियों के मुकाबले अपनी आय को दोगुना करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
खेत की तैयारी और पौध रोपाई का वैज्ञानिक तरीका
इस आधुनिक खेती की शुरुआत करने के लिए खेत की गहरी जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बनाया गया, जिसके बाद रोटावेटर चलाकर जमीन को समतल किया गया। इसके बाद क्यारियां यानी बेड तैयार की गईं, जिसमें एक बेड से दूसरे बेड के बीच चार फीट का फासला रखा गया। पौधों के बेहतर विकास और हवा के आवागमन को ध्यान में रखते हुए पौधे से पौधे की दूरी एक फीट तय की गई। क्यारियों में नमी बनाए रखने और खरपतवार को रोकने के लिए मल्चिंग बिछाई गई तथा बेलों को सहारा देने के लिए मजबूत खूंटे गाड़े गए।
उर्वरक प्रबंधन और फसल का जीवन चक्र
फसल को संतुलित पोषण देने के लिए मिट्टी में बुनियादी खाद के रूप में गोबर की सड़ी खाद मिलाई गई। इसके अलावा पौधों की जरूरत के मुताबिक डीएपी, पोटाश और यूरिया का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया गया है। यह फसल रोपाई के लगभग दो महीने बाद फल देना शुरू कर देती है और लगभग तीन महीने के भीतर बीज निकालने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। पहली बार इस तकनीक को अपनाने के कारण खेत में कुछ पौधों की पत्तियां मुड़ने की समस्या जरूर सामने आई है, जिसका सटीक कारण समझने के लिए किसान लगातार प्रयासरत हैं।
लागत का हिसाब और बंपर मुनाफे का गणित
आधे एकड़ रकबे में शेड नेट, खूंटे गाड़ने, मल्चिंग शीट लगाने, खाद और जुताई समेत कुल खर्च लगभग पचास हजार रुपये आया है। इस छोटे से रकबे से करीब डेढ़ क्विंटल खीरे के उन्नत बीज प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया है। वर्तमान बाजार में खीरे के बीज का भाव तीन लाख चालीस हजार रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। इस भाव के अनुसार यदि डेढ़ क्विंटल बीज की पैदावार मिलती है, तो पचास हजार रुपये की साधारण लागत पर किसान को लगभग साढ़े चार लाख रुपये की सीधी कमाई होने की पूरी संभावना है।
सब्जियों के उतार-चढ़ाव से मुक्ति और तय आमदनी
सब्जी उत्पादक किसानों को अक्सर मंडियों में कीमतों के भारी उतार-चढ़ाव का नुकसान झेलना पड़ता है। कई बार भरपूर पैदावार होने के बावजूद दाम इतने गिर जाते हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। इसके विपरीत बीज उत्पादन की खेती में पहले से तय दरों पर खरीदार मिल जाते हैं, जिससे किसानों को बिक्री के लिए भटकना नहीं पड़ता। नियंत्रित शेड नेट वातावरण से फसल रोगों से सुरक्षित रहती है और किसान को निश्चित आय की गारंटी मिलती है।





















