छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां खेत में खोदे गए एक गड्ढे में डूबने से तीन स्कूली बच्चों की मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।
गांधीनगर गांव में हुआ हादसा
मामला बोरतलाव थाना क्षेत्र के गांधी नगर रोड का है। मरने वाले तीनों बच्चे आदिवासी समाज से थे और कक्षा पहली तथा तीसरी में पढ़ते थे। रेलवे के काम के लिए खेत में एक गड्ढा खोदा गया था, जिसमें बारिश का पानी भर गया था। यही गड्ढा तीन मासूमों की जान का काल बन गया।
शिक्षकों की हड़ताल बनी वजह?
बताया जा रहा है कि रोजाना स्कूल के शिक्षक इन बच्चों को लाने और छोड़ने का काम करते थे। लेकिन उस दिन शिक्षकों की हड़ताल के चलते कोई शिक्षक बच्चों को लेने नहीं पहुंचा। इसी बीच बच्चे बिना निगरानी के गांव में घूमने निकल गए, जो इस हादसे की वजह बना।
एक ग्रामीण ने बताया कि करीब 10 से 12 बच्चे घूमने निकले थे। इनमें से तीन बच्चे पानी से भरे गड्ढे में नहाने के लिए कूद गए। बताया जा रहा है कि गड्ढे की गहराई करीब 6 फीट थी और बच्चे इसका सही अंदाजा नहीं लगा पाए। गहरे पानी में उतरते ही तीनों डूबने लगे और उनकी जान चली गई।
देर शाम बाहर निकाले गए शव
हादसे की सूचना मिलते ही गांव और प्रशासन में हड़कंप मच गया। काफी मशक्कत के बाद देर शाम तीनों बच्चों के शव गड्ढे से बाहर निकाले गए। शवों को फिलहाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) डोंगरगढ़ की मर्चुरी में रखा गया है। इस हादसे के बाद से पूरे गांधीनगर गांव में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवार सदमे में हैं।
एडिशनल SP ने दी घटना की पुष्टि
एडिशनल SP कीर्तन राठौर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह हादसा बोरतालाब पुलिस स्टेशन इलाके के गांधी नगर रोड पर हुआ। उन्होंने बताया कि रेलवे के काम के लिए खोदे गए और पानी से भरे गड्ढे में डूबने से तीन स्कूली बच्चों की मौत हुई। उन्होंने यह भी बताया कि काफी मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकालकर डोंगरगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।
ग्रामीणों ने लगाया लापरवाही का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले और गहरे गड्ढे को असुरक्षित छोड़ देना सीधे-सीधे प्रशासन की लापरवाही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेलवे के काम के दौरान खोदे गए ऐसे खतरनाक गड्ढों को न तो घेरा गया और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया, जिसकी वजह से तीन मासूमों की जान चली गई।











