अंतरिक्ष अनुसंधान के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए चीन ने चंद्रमा के सुदूर हिस्से से जुटाए गए मिट्टी और चट्टानों के दुर्लभ नमूने संयुक्त राष्ट्र को आधिकारिक रूप से भेंट किए हैं। चंद्रमा का यह भाग हमेशा पृथ्वी से ओझल रहता है और वहां की सतह को जमीन से सीधे देख पाना मुमकिन नहीं होता। चांग’ई-6 अंतरिक्ष अभियान के तहत धरती पर लाई गई इस अनमोल सामग्री को वैश्विक वैज्ञानिक धरोहर के तौर पर देखा जा रहा है। मानव इतिहास में पहली बार किसी देश ने चंद्रमा के इस अनदेखे दक्षिणी ध्रुव वाले इलाके से भौतिक नमूने हासिल करने में कामयाबी पाई है।
वियना में हुआ नमूनों का औपचारिक अनावरण
ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान इन चंद्र नमूनों का अनावरण किया गया। इस कार्यक्रम में चीनी अंतरिक्ष एजेंसी और संयुक्त राष्ट्र के कई वरिष्ठ राजनयिक तथा उच्चाधिकारी उपस्थित रहे। अब इन नमूनों को वियना के संयुक्त राष्ट्र परिसर में आम लोगों और शोधकर्ताओं के देखने के लिए स्थायी तौर पर प्रदर्शित किया जाएगा।
समारोह के दौरान चीन राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन के शान झोंगदे ने रेखांकित किया कि अनंत अंतरिक्ष को खंगालना किसी एक देश का नहीं, बल्कि समूची मानवता का मिला-जुला सपना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चांग’ई अभियान की सफलता मात्र उनके देश तक सीमित नहीं है, अपितु यह विश्व भर के वैज्ञानिकों की साझा ज्ञान यात्रा का एक अहम पड़ाव है।
साझा विरासत और शांतिपूर्ण अंतरिक्ष सहयोग का संदेश
इस कदम को अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक साझेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी घादा वाली ने इस भेंट का स्वागत करते हुए कहा कि यह इंसान की उन्नत तकनीकी महारत और सृष्टि के अनसुलझे रहस्यों को भेदने की अदम्य ललक का प्रमाण है।
इसी क्रम में संयुक्त राष्ट्र बाहरी अंतरिक्ष मामलों के कार्यालय की निदेशक आरती होला-मैनी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ऐसी पहल अंतरिक्ष को समस्त मानव जाति की साझा थाती और सामूहिक जिम्मेदारी के तौर पर स्थापित करने की भावना को बल देती है। इससे विभिन्न देशों के बीच वैज्ञानिक कूटनीति का माहौल और अधिक मजबूत होगा।
चांग’ई-6 मिशन का 3.8 लाख किलोमीटर का सफर
साल 2024 में संचालित चांग’ई-6 अभियान ने चंद्रमा के साउथ पोल-एटकेन बेसिन में उतरकर लगभग 1,935.3 ग्राम वजन के मिट्टी और पत्थरों के नमूने सफलतापूर्वक एकत्र किए थे। यह ऐतिहासिक खेप अंतरिक्ष में 3 लाख 80 हजार किलोमीटर से अधिक का दुर्गम फासला तय करके धरती पर सुरक्षित लौटी थी।
चंद्रमा के अपनी धुरी पर घूमने और पृथ्वी की परिक्रमा के विशेष तालमेल के चलते उसका यह दूरस्थ भाग हमेशा हमारे नजरिए से छिपा रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन नमूनों की गहन रासायनिक और भौतिक जांच से चंद्रमा की उत्पत्ति, उसके प्राचीन भूगर्भीय इतिहास और वहां घटित हुई ज्वालामुखीय गतिविधियों के अनसुलझे रहस्यों को समझने में अभूतपूर्व सुराग मिलेंगे। संयुक्त राष्ट्र को यह सामग्री सौंपना विज्ञान के साथ-साथ कूटनीतिक संवाद का भी एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है।



















