भारतीय क्रिकेट के सीमित ओवर प्रारूप में नई पीढ़ी के बल्लेबाजों को मौका देने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह का कहना है कि राष्ट्रीय टीम प्रबंधन को अभिषेक शर्मा और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी जैसे उभरते सितारों को जल्द से जल्द पचास ओवर के प्रारूप में अवसर देना चाहिए। उनका तर्क है कि अगर ऐसे होनहार खिलाड़ियों को वनडे दल में शामिल नहीं किया जाता, तो यह घरेलू स्तर पर चमक रही प्रतिभाओं की अनदेखी करने जैसा होगा। इस बातचीत में उन्होंने विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन की दावेदारी का भी उल्लेख किया, जो पहले भी सीमित ओवरों की राष्ट्रीय टीम के साथ जुड़ चुके हैं।
राष्ट्रीय टीम में जगह पाने की राह और कड़ा मुकाबला
मौजूदा समय में अभिषेक शर्मा टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की रैंकिंग सूची में पहले पायदान पर काबिज हैं। वे बीते कुछ सत्रों से इस सबसे छोटे प्रारूप में लगातार आक्रामक खेल का प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक वे एकदिवसीय और टेस्ट टीम की मुख्य योजना से बाहर ही नजर आते हैं। वहीं दूसरी तरफ, बेहद कम उम्र में अपनी आतिशी पारी से ध्यान खींचने वाले वैभव सूर्यवंशी के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम के भीतर भी निरंतर अवसर जुटाना आसान साबित नहीं हुआ है। जापान में संपन्न हुए एशियाई खेलों के पश्चात उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर केवल दो मुकाबले खेलने को मिले। जब ईशान किशन न्यूजीलैंड दौरे के दौरान चोटिल हुए थे, तब सूर्यवंशी को उनके विकल्प के तौर पर दल में शामिल किया गया था, पर शुक्रवार को खेले गए एक औपचारिक मैच की अंतिम एकादश से उन्हें बाहर बैठना पड़ा था।
शीर्ष क्रम की जमावट और चयनकर्ताओं का सिरदर्द
इन दोनों युवा खिलाड़ियों के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा भारतीय बल्लेबाजी क्रम का मौजूदा ढांचा है। वर्तमान समय में पचास ओवर के मैचों में पारी का आगाज करने का जिम्मा रोहित शर्मा और शुभमन गिल संभाल रहे हैं। इस सलामी जोड़ी के दम पर भारत ने 2023 के वनडे विश्व कप के खिताबी मुकाबले तक का सफर तय किया था। ऐसी प्रबल संभावना जताई जा रही है कि अफ्रीका की धरती पर आयोजित होने वाले 2027 के वनडे विश्व कप में भी यही जोड़ी शुरुआती विकेट के लिए मोर्चा संभाल सकती है। टीम के भीतर प्रतिस्पर्धा का आलम यह है कि यशस्वी जायसवाल जैसे स्थापित बल्लेबाज भी अंतिम एकादश में पक्की जगह बनाने के लिए संघर्षरत हैं, जबकि उन्होंने अपने पहले छह एकदिवसीय मुकाबलों के भीतर ही दो शतकीय पारियां खेल डाली थीं। ऐसे में किसी नए ओपनर को तुरंत मुख्य टीम में जगह देना बेहद कठिन फैसला माना जा रहा है।
लिस्ट-ए क्रिकेट के आंकड़े और तकनीकी पेच
अगर चयन के तर्कों को आंकड़ों की कसौटी पर परखा जाए, तो दोनों युवा बल्लेबाजों की प्रोफाइल में काफी भिन्नता नजर आती है। अभिषेक शर्मा के घरेलू पचास ओवर यानी लिस्ट-ए मुकाबलों के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो उन्होंने 68 पारियों में 2196 रन जोड़े हैं। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 33.78 का रहा है, जिसमें 4 शतक और 8 अर्धशतक दर्ज हैं। सबसे छोटे प्रारूप की आवश्यकताओं के लिए यह आंकड़े भले ही उपयोगी दिखें, लेकिन वनडे क्रिकेट में शुरुआती क्रम के नियमित बल्लेबाज के रूप में जगह पक्की करने के लिए यह औसत पूरी तरह पर्याप्त नहीं माना जाता। साथ ही मध्यक्रम में उतरकर उन्होंने अब तक ऐसा कोई असाधारण प्रदर्शन नहीं किया है, जिससे उनकी जगह तत्काल तय मानी जा सके।
इसके विपरीत वैभव सूर्यवंशी ने अब तक वरिष्ठ स्तर पर बहुत ज्यादा पचास ओवर के मैच नहीं खेले हैं, लेकिन उनका संक्षिप्त रिकॉर्ड काफी दिलचस्प है। उन्होंने अपने अब तक के लिस्ट-ए सफर में कुल 564 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत 43.38 का रहा है, जबकि उनका स्ट्राइक रेट 176.80 का दर्ज किया गया है। यह असाधारण स्ट्राइक रेट उनकी निडर और आक्रामक शैली को बखूबी बयां करता है। भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अंतिम पंद्रह सदस्यीय दल और प्लेइंग इलेवन में सीमित स्थानों के चलते चयनकर्ताओं के सामने निर्णय लेना पेचीदा होता जा रहा है। अब यह वक्त ही बताएगा कि क्या चयन समिति इस सुझाव पर अमल करते हुए आने वाली एकदिवसीय श्रृंखलाओं में इन युवाओं को आजमाने की दिशा में कदम बढ़ाती है या नहीं।
























