मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी आंकड़ों को लेकर देश में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं, विशेष रूप से विशेष पुनरीक्षण और डेटा मैपिंग को लेकर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है। इसी सिलसिले में अब सीधे 2024 के आम चुनावों की वैधता पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों पर तीखे आरोप लगाए गए हैं।
राहुल गांधी का बयान और गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हर सात में से एक मतदाता का नाम हटाकर चुनाव आयोग ने एक तरह से यह स्वीकार कर लिया है कि वर्ष 2024 का चुनाव अवैध था। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों ने साजिश रचकर देशद्रोह किया है, जिसके लिए उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल मतदाता सूचियों में कथित विसंगतियों को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
एसआईआर प्रक्रिया और 1.93 करोड़ वोटों की मैपिंग का विवाद
विपक्षी दलों की आपत्तियों का केंद्र चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया और डेटा प्रबंधन रहा है। उत्तर प्रदेश में एसआईआर के तहत 1.93 करोड़ अनमैप्ड वोटों का मुद्दा प्रमुखता से उठा था, जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी आंकड़ों में भारी अंतर और आयोग द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति पर सवाल दागे थे। चुनाव आयोग की ओर से इन सवालों पर तकनीकी स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद यह विवाद शांत नहीं हुआ है और लगातार पांच बड़े प्रशासनिक सवालों को लेकर बहस जारी है।
देशभर में प्रदर्शन और पूर्व जजों की प्रतिक्रिया
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। दूसरी ओर, संस्थान के बचाव में भी मजबूत आवाजें उठी हैं। देश के 42 पूर्व जजों ने एक संयुक्त बयान जारी कर चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे हमलों की निंदा की थी। इन पूर्व न्यायाधीशों का कहना था कि संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर इस तरह के निराधार आक्षेप लगाना चुनाव आयोग को बदनाम करने की सोची-समझी कोशिश है। आयोग पर इस तरह के सीधे हमलों ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
जनता की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के इस कड़े बयान पर आम जनता की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। जहां कई लोगों ने मतदान अधिकारों की सुरक्षा और आयोग से पारदर्शिता की मांग का समर्थन किया, वहीं कई अन्य नागरिकों ने सवाल किया कि अगर चुनाव वास्तव में अवैध थे तो विपक्ष को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।


























