गुजरात की राजधानी गांधीनगर में नगर निगम के कैटल न्यूसेंस कंट्रोल डिपार्टमेंट से जुड़े एक आउटसोर्स कर्मचारी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। आरोपी ने एक स्थानीय पशुपालक व्यवसायी के मवेशी न जब्त करने और उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई न करने के एवज में अवैध वसूली की मांग रखी थी। शिकायतकर्ता की सतर्कता से पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ और योजनाबद्ध तरीके से की गई कार्रवाई में घूस की पूरी रकम बरामद कर ली गई।
मवेशी उपद्रव नियंत्रण विभाग में तैनात था आरोपी
पकड़े गए आरोपी की पहचान बाईस वर्षीय जयदीपसिंह राजपूत के तौर पर हुई है। वह गांधीनगर नगर निगम के पशु उपद्रव नियंत्रण विभाग यानी सीएनसीडी में श्रेणी तीन के पशुधन निरीक्षक पद पर कार्यरत था। यह तैनाती एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से की गई थी। इस विभाग और संबंधित टीम का प्राथमिक कार्य शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमने वाले लावारिस मवेशियों को पकड़ना और पशुपालकों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित करना था।
त्योहार की किस्त बताकर मांगी थी बड़ी रकम
मामले के विवरण के अनुसार जयदीपसिंह राजपूत ने शुरुआत में पशुपालक व्यवसायी से चालीस हजार रुपये की मांग की थी। आरोपी का कहना था कि यदि यह रकम दे दी जाएगी तो व्यवसायी के पशुओं को नगर निगम की टीम नहीं पकड़ेगी और न ही उसके खिलाफ कोई आधिकारिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा। आरोपी ने इस अवैध मांग को आगामी दिवाली त्योहार की विशेष किस्त के रूप में पेश किया था। बाद में दोनों पक्षों के बीच बातचीत के दौरान यह रकम घटाकर बाईस हजार रुपये तय हुई थी। व्यवसायी घूस देने को बिल्कुल तैयार नहीं था, इसलिए उसने सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क साधकर पूरी घटना की लिखित शिकायत दर्ज करा दी।
सेक्टर अट्ठाईस में बिछाया गया था जाल
शिकायत का सत्यापन करने के पश्चात भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने की पुख्ता रूपरेखा तैयार की। तीस अक्टूबर को गांधीनगर के सेक्टर अट्ठाईस स्थित एक बगीचे के पीछे वाली सड़क पर जाल बिछाया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार जब आरोपी जयदीपसिंह राजपूत शिकायतकर्ता से मिलने पहुंचा और उसने बाईस हजार रुपये की नकदी अपने हाथ में ली, तभी पहले से घात लगाए बैठी टीम ने उसे दबोच लिया। मौके पर ही तलाशी लेकर आरोपी के पास से रिश्वत के पूरे बाईस हजार रुपये बरामद कर लिए गए। इस समूचे ट्रैप ऑपरेशन का नेतृत्व गांधीनगर एसीबी पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर एम. एम. सोलंकी ने किया था।
अगस्त 2022 में भी सामने आ चुकी है ऐसी ही घटना
गांधीनगर नगर निगम की मवेशी पकड़ने वाली टीम में भ्रष्टाचार और उगाही का यह पहला वाकया नहीं है। इससे पहले अगस्त 2022 में भी ठीक इसी तरह का एक मामला उजागर हुआ था। उस समय भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आउटसोर्सिंग पर तैनात दो कर्मचारियों को एक पशुपालक से पंद्रह हजार रुपये की घूस लेते हुए पकड़ा था। उन कर्मचारियों में एक मवेशी पकड़ने वाला कर्मी और दूसरा गाड़ी का चालक शामिल था।
पांच लोगों के नाम पर की गई थी अवैध वसूली की मांग
वर्ष 2022 के मामले में पकड़े गए आरोपियों के नाम मनोज उर्फ बबलू शनाजी ठाकोर और बंटी जयंतीभाई वाघेला थे। उस प्रकरण में आरोप था कि दोनों ने पशुपालक के आवारा पशु न पकड़ने के बदले पंद्रह हजार रुपये मांगे थे। जांच में यह तथ्य सामने आया था कि यह रकम कुल पांच कर्मचारियों के बीच बांटी जानी थी, जिसमें प्रत्येक के हिस्से में पांच हजार रुपये की गणना की जा रही थी। उस समय दोनों आउटसोर्स कर्मियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज हुआ था। अब एक बार फिर उसी विंग के कर्मचारी द्वारा अवैध वसूली किए जाने से आउटसोर्सिंग व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।



















