जम्मू क्षेत्र में कार्यरत विनिर्माण इकाइयों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सुगम माल परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक अहम प्रशासनिक पहल शुरू की गई है। उद्योग एवं वाणिज्य निदेशालय जम्मू तथा उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच शनिवार को एक विस्तृत समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में एक एकीकृत लॉजिस्टिक्स और निर्बाध सप्लाई चेन तंत्र विकसित करना है। बैठक के दौरान स्थानीय निर्माताओं और व्यापारियों द्वारा माल ढुलाई के संदर्भ में सामना की जा रही बुनियादी चुनौतियों पर सीधे बातचीत की गई।
औद्योगिक विकास के लिए रेलवे संपर्कों का विस्तार
इस संयुक्त बैठक में सरकारी प्रशासनिक अधिकारियों, रेलवे के नीति निर्माताओं तथा औद्योगिक प्रतिनिधियों ने एक मंच पर आकर माल परिवहन को आधुनिक बनाने के व्यावहारिक उपायों का खाका खींचा। अधिकारियों ने इस बात का गहन विश्लेषण किया कि वर्तमान में मौजूद लॉजिस्टिक्स से जुड़ी खामियां किस प्रकार जम्मू भर में फैले कारखानों, औद्योगिक परिसरों और वाणिज्यिक व्यापार गतिविधियों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही हैं। इन व्यवधानों को समाप्त करने के लिए मालगाड़ियों की नियमित आवाजाही, माल लदान की तेज प्रक्रिया और विनिर्माण केंद्रों तक रेलवे नेटवर्क के सीधे जुड़ाव को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के लक्ष्यों से तालमेल
बैठक में तय की गई कार्ययोजना को केंद्र सरकार की राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) के प्रमुख उद्देश्यों के अनुरूप तैयार किया गया है। इस नीति का मुख्य जोर माल परिवहन में लगने वाली लागत को घटाने, कार्यप्रणाली की परिचालन दक्षता बढ़ाने और मल्टीमॉडल परिवहन विकल्पों को व्यापक रूप से प्रोत्साहित करने पर है। अधिकारियों ने रेखांकित किया कि देश भर में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाले इन राष्ट्रीय लक्ष्यों को जम्मू की विशिष्ट भौगोलिक और व्यापारिक आवश्यकताओं से जोड़कर ही स्थानीय उद्योगों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाया जा सकता है।
पीएम गतिशक्ति और डिजिटल ट्रैकिंग का ढांचा
बुनियादी ढांचे को भविष्य की जरूरतों के अनुकूल बनाने के क्रम में दोनों विभागों ने नए कार्गो टर्मिनल्स और समर्पित औद्योगिक साइडिंग्स स्थापित करने की रूपरेखा पेश की। यह संपूर्ण ढांचागत विकास पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त माल ढुलाई की वास्तविक स्थिति पर नजर रखने के लिए पूरी तरह पेपरलेस डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया। इसका सीधा लक्ष्य उत्पादन इकाइयों और औद्योगिक संकुलों तक अंतिम छोर तक की सीधी और सुगम कनेक्टिविटी यानी लास्ट माइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।
उद्योग और रेलवे के बीच निरंतर संवाद तंत्र
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू उद्योग एवं वाणिज्य निदेशालय और भारतीय रेलवे के मध्य एक स्थायी समन्वय प्रणाली का निर्माण करना रहा। इस व्यवस्था के दायरे में स्थानीय विनिर्माण इकाइयों को सक्रिय भागीदार के रूप में शामिल किया गया है। इस रणनीतिक तालमेल का स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्र की तेजी से बढ़ती औद्योगिक आवश्यकताओं को एक आधुनिक, दक्ष और भरोसेमंद रेल परिवहन बुनियादी ढांचे का निरंतर सहयोग प्राप्त होता रहे, जिससे स्थानीय उत्पादन को बड़े बाजारों तक तेजी से भेजा जा सके।



















