पुडुचेरी के मैदान पर भारतीय सीनियर चयनकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए भारत ए के तेज गेंदबाजों ने दूसरे वनडे मुकाबले में भी शानदार गेंदबाजी का मुजाहिरा पेश किया। मेहमान ऑस्ट्रेलिया ए की पूरी टीम लगातार दूसरे मैच में अपने निर्धारित 50 ओवर पूरे खेलने में नाकाम रही और 275 रनों के स्कोर पर सिमट गई। एक मजबूत शुरुआत मिलने के बावजूद कंगारू बल्लेबाजी क्रम भारतीय गेंदबाजी इकाई के संयुक्त दबाव के आगे पूरी तरह बिखर गया।
शुरुआती झटके के बाद सैम कोंस्टास और जोश फिलिप की शतकीय साझेदारी
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ए की टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने मिचेल ओवेन का विकेट बेहद सस्ते में गंवा दिया। इसके बाद सैम कोंस्टास और जोश फिलिप ने पारी को संभालते हुए दूसरे विकेट के लिए 101 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी निभाई। जोश फिलिप ने 58 रनों की आक्रामक पारी खेली, जबकि सैम कोंस्टास ने 67 रन बनाए। इन दोनों बल्लेबाजों के अर्धशतकों की बदौलत मेहमान टीम 30 ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर 168 रन बनाकर बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रही थी। उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि टीम आसानी से 300 से अधिक रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर लेगी।
68 रनों के भीतर गिरे आखिरी 7 विकेट
सैम कोंस्टास के पवेलियन लौटते ही ऑस्ट्रेलिया ए की पारी अचानक लड़खड़ा गई। भारतीय गेंदबाजों ने शिकंजा कसते हुए लगातार अंतराल पर विकेट चटकाए, जिससे कंगारू टीम ने अपने अंतिम 7 विकेट केवल 68 रनों के अंदर खो दिए। मध्यक्रम और निचले क्रम का कोई भी बल्लेबाज क्रीज पर टिकने का साहस नहीं दिखा सका और टीम के आखिरी छह बल्लेबाजों में से कोई भी 20 रन का आंकड़ा तक पार नहीं कर पाया। इस जबरदस्त पतन के चलते अच्छी शुरुआत के बाद भी मेहमान टीम पूरे 50 ओवर नहीं खेल सकी।
अरशद खान और यश ठाकुर की तेज जोड़ी का असरदार प्रदर्शन
तेज गेंदबाजों के दम पर मैच में वापसी कराने में बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अरशद खान ने प्रमुख भूमिका निभाई। अरशद खान ने सटीक लाइन और लेंथ से गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके, वहीं यश ठाकुर ने उनका भरपूर साथ देते हुए 2 विकेट अपने नाम किए। इससे पहले 6 अक्टूबर को खेले गए सीरीज के पहले मुकाबले में भी भारतीय गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया ए को 48.2 ओवर में 274 रनों पर ढेर कर दिया था। उस मैच में अरशद खान ने 3 विकेट, यश ठाकुर ने 2 विकेट और सूर्यांश शेडगे ने 4 विकेट झटककर 9 बल्लेबाजों को चलता किया था, हालांकि टीम इंडिया को उस मैच में 149 रन पर ढेर होकर 125 रनों की भारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। दूसरे मुकाबले में भी भारतीय पेसरों ने अपनी लय बरकरार रखी और विरोधी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया।



















