भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही पांच टी20 मैचों की द्विपक्षीय सीरीज का दूसरा मुकाबला रांची के मैदान पर आयोजित हो रहा है। शुरुआती मैच अपने नाम करने के बाद भारतीय टीम श्रृंखला में 1-0 से आगे चल रही है और टीम प्रबंधन का पूरा ध्यान इस बढ़त को दोगुना करने पर लगा हुआ है। इस मुकाबले की रणनीतियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि क्या युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को आखिरकार भारतीय मैदानों पर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मुकाबला खेलने का अवसर मिलेगा। कप्तान श्रेयस अय्यर अंतिम एकादश चुनते समय क्या युवा प्रतिभा पर भरोसा जताएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि अगर वैभव को मौका मिलता है तो यह उनके करियर का एक बेहद यादगार और अहम पड़ाव साबित होगा।
भारतीय सरजमीं पर पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले का इंतजार
वैभव सूर्यवंशी अब तक राष्ट्रीय टीम के लिए कुल 8 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं, मगर उनके अंतरराष्ट्रीय सफर का एक अनूठा पहलू यह रहा है कि उन्होंने इनमें से एक भी मुकाबला भारत की धरती पर नहीं खेला है। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत इंग्लैंड के दौरे पर की थी, जिसके बाद वे जिम्बाब्वे के खिलाफ भी मैदान पर उतरे। इसके अतिरिक्त जब जापान में एशियन गेम्स का आयोजन हुआ, तब भी वे भारतीय दल का हिस्सा बनकर खेलने उतरे थे। विडंबना यह रही है कि जैसे ही भारतीय टीम अपने घरेलू मैदानों पर खेलती है, वैभव को मुख्य स्क्वॉड में तो रखा जाता है लेकिन अंतिम एकादश की सूची में वे जगह बनाने से चूक जाते हैं। इसके साथ ही एक तथ्य यह भी है कि जिस प्रचंड उम्मीद के साथ उन्हें टीम में शामिल किया गया था, अब तक उनके बल्ले से उस स्तर का दमदार प्रदर्शन देखने को नहीं मिला है।
एशियन गेम्स के प्रदर्शन और अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने की चुनौती
जापान में आयोजित एशियन गेम्स के दौरान वैभव सूर्यवंशी को दो अहम मुकाबलों की प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया था। वहां श्रीलंका के विरुद्ध खेले गए सेमीफाइनल मैच में उन्होंने 38 रनों का योगदान दिया था, जबकि पाकिस्तान के खिलाफ हुए खिताबी फाइनल मुकाबले में उनके बल्ले से केवल 15 रन निकले थे। चयनकर्ताओं और प्रशंसकों को उनसे लंबी और मैच जिताऊ पारियों की दरकार थी। वे क्रीज पर उतरकर ठोस शुरुआत करने में तो सफल हो रहे हैं, परंतु उस लय को एक बड़े व्यक्तिगत स्कोर में तब्दील करने की चुनौती उनके सामने लगातार बनी हुई है।
संजू सैमसन की लगातार गिरती फॉर्म ने बढ़ाई टीम की चिंताएं
बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की संभावनाओं को सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन के मौजूदा फॉर्म से भी हवा मिल रही है। संजू का बल्ला पिछली कुछ पारियों से खामोश नजर आ रहा है और वे पिछली चार अंतरराष्ट्रीय पारियों में सिर्फ एक मर्तबा ही दहाई का अंक छूने में कामयाब रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ चल रही मौजूदा सीरीज के पहले मुकाबले में भी संजू मात्र 11 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे। इससे पहले एशियन गेम्स के मुकाबलों में भी उनका रिकॉर्ड बेहद निराशाजनक रहा था, जहां वे पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में केवल 2 रन और श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में महज 7 रन बनाकर आउट हो गए थे। यहां तक कि जापान के खिलाफ खेले गए मैच में भी उनके बल्ले से केवल 9 रन ही निकल पाए थे। लगातार रन बनाने में आ रही इस विफलता के कारण टीम प्रबंधन पर दबाव बढ़ रहा है और इसी वजह से ऐसी संभावना जताई जा रही है कि संजू सैमसन की जगह रांची में वैभव सूर्यवंशी को मौका देकर शीर्ष क्रम को नई ऊर्जा दी जा सकती है।



















