मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के एथलेटिक्स मुकाबलों में भारत के लिए एक यादगार अध्याय जुड़ गया है। हिमाचल प्रदेश से आने वाली लंबी दूरी की प्रतिभाशाली धाविका सीमा कुमारी ने महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में असाधारण जज्बा दिखाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस शानदार जीत के साथ ही मौजूदा खेलों में भारतीय एथलेटिक्स दल का पदक खाता भी खुल गया। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस स्पर्धा में भारत को पूरे 16 साल के लंबे अंतराल के बाद कोई अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल हुआ है। 5000 मीटर और 10,000 मीटर स्पर्धाओं में महारत रखने वाली सीमा कुमारी का यह अंतरराष्ट्रीय सफर पहाड़ों की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों से शुरू होकर वैश्विक सिंथेटिक ट्रैक तक पहुंचा है, जहां वर्षों के कड़े अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत पहचान दिलाई है।
शुरुआती रफ्तार और साहसिक रणनीति
गुरुवार को जब मिजुहो पार्क के ट्रैक पर 10,000 मीटर की दौड़ शुरू हुई, तो सीमा कुमारी ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई। अमूमन लंबी दूरी की रेस में धावक शुरुआत में अपनी ऊर्जा बचाते हैं, लेकिन भारतीय एथलीट ने पहले क्षण से ही मुख्य धावकों के अग्रणी समूह में अपनी मजबूत जगह बनाई। सीमा ने पहले 2000 मीटर तक पूरी फील्ड का नेतृत्व किया और रेस की गति स्वयं निर्धारित की। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो उनका पहला किलोमीटर केवल 3 मिनट और 18.12 सेकंड में पूरा हुआ था। इसके बाद जब धावकों ने 2000 मीटर का पड़ाव पार किया, तब तक घड़ी में 6 मिनट और 36.13 सेकंड का समय दर्ज हो चुका था। इस शुरुआती तेज रफ्तार ने उनके इरादों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया था।
दबाव के बीच वापसी और पोडियम फिनिश
लंबी दूरी की किसी भी रेस में शारीरिक स्टेमिना के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। दौड़ के मध्य चरण में जब अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों ने अपनी गति अचानक बढ़ाई, तो सीमा कुमारी कुछ पलों के लिए पिछड़कर चौथे स्थान पर खिसक गईं। किसी भी एथलीट के लिए यह मानसिक रूप से विचलित करने वाला क्षण हो सकता था, लेकिन उन्होंने अपनी शांति बनाए रखी और आगे चल रहे धावकों से दूरी नहीं बढ़ने दी। जब अंतिम 1000 मीटर की रेस बाकी बची थी, तब सीमा ने अपना पूरा दम झोंकते हुए जोरदार काउंटर अटैक किया। उन्होंने तेजी से अपनी स्थिति सुधारी और तीसरे स्थान पर पुनः कब्जा जमा लिया। फिनिश लाइन के पास उन्होंने 32 मिनट 50.05 सेकंड का समय निकालते हुए भारत की झोली में बहुमूल्य कांस्य पदक डाल दिया।
पोडियम पर कड़ा मुकाबला और 13 सेकंड का अंतर
इस मुकाबले में स्वर्ण और रजत पदक के लिए भी जबरदस्त होड़ देखने को मिली। बहरीन की विनफ्रेड यावी ने 32 मिनट 39.18 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक जीता। वहीं मेजबान जापान की नोजोमी तनाका ने 32 मिनट 41.54 सेकंड के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया। कजाकिस्तान की मजबूत दावेदार डेजी जेपकेमेई 33 मिनट 03.21 सेकंड के साथ चौथे स्थान पर रहीं। सीमा कुमारी ने चौथे स्थान पर रहने वाली डेजी को 13 सेकंड से भी अधिक के स्पष्ट अंतर से पीछे छोड़ा, जिससे साबित होता है कि अंतिम चरण में भारतीय धाविका की फिनिशिंग कितनी मजबूत और निर्णायक थी।
16 साल बाद भारत का विशेष एलीट क्लब
महिलाओं की 10,000 मीटर स्पर्धा में सीमा कुमारी की यह सफलता उन्हें भारतीय एथलेटिक्स के बेहद चुनिंदा इतिहास का हिस्सा बनाती है। इस स्पर्धा में भारत को पिछली बार पोडियम फिनिश साल 2010 के एशियन गेम्स में मिली थी। उस समय भारत की प्रीजा श्रीधरन ने स्वर्ण पदक जीता था और कविता राउत ने रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था। उस दोहरे पोडियम के बाद से भारतीय महिला धावकों को 16 वर्षों तक पदक का इंतजार करना पड़ा। अब सीमा कुमारी एशियन गेम्स के इतिहास में इस स्पर्धा का पदक जीतने वाली भारत की केवल तीसरी महिला एथलीट बन गई हैं।
वर्ष 2026 में रिकॉर्ड्स और निरंतर फॉर्म
एशियन गेम्स में सीमा कुमारी का यह प्रदर्शन किसी अचानक मिली सफलता का परिणाम नहीं है, बल्कि यह साल 2026 के उनके शानदार फॉर्म का निरंतर विस्तार है। इस वर्ष मार्च में कैलिफोर्निया में आयोजित ‘द टेन’ प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने 10,000 मीटर दौड़ में 32 मिनट 02.43 सेकंड का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया था। इसके अगले ही महीने, यानी अप्रैल 2026 में, उन्होंने 5000 मीटर स्पर्धा में भी असाधारण गति दिखाते हुए 15 मिनट 16.20 सेकंड का नया पर्सनल बेस्ट रिकॉर्ड बनाया था। इसी मजबूत आधार और निरंतर अभ्यास के दम पर वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाने में सफल रही हैं।



















