छोटे प्रारूप में शानदार रणनीति के साथ आगे बढ़ रही भारतीय टीम अब 50 ओवर के प्रारूप में अपनी सबसे बड़ी परीक्षा का सामना करने जा रही है। हाल ही में समाप्त हुई टी20 सीरीज को 3-2 के अंतर से अपने नाम कर भारत ने दौरे की सकारात्मक शुरुआत तो की है, लेकिन मेजबान टीम ने चौथे और पांचवें मुकाबले में जोरदार वापसी करते हुए अपनी लय हासिल कर ली है। ऑकलैंड और हैमिल्टन में मिली लगातार दो जीतों से उत्साहित कीवी खिलाड़ी अब उसी आत्मविश्वास के साथ आगामी वनडे सीरीज में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इस प्रारूप में टीम इंडिया के पास कई बेहतरीन बल्लेबाज और गेंदबाज मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद पिछले कई दौरों से कीवी परिस्थितियों में तालमेल बिठाना हमेशा एक कठिन चुनौती साबित हुआ है।
ऑकलैंड से होगा पांच मैचों की सीरीज का आगाज
भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे श्रृंखला का पहला मुकाबला बुधवार को ऑकलैंड के मैदान पर खेला जाना तय है। टी20 सीरीज के आखिरी दो मुकाबलों में मेजबान टीम ने जिस तरह पलटवार किया, उसने भारतीय खेमे के सामने रणनीति पर पुनर्विचार करने की स्थिति खड़ी कर दी है। इसके अलावा ऐतिहासिक आंकड़े भी मेहमान टीम के पक्ष में नजर नहीं आते हैं। पिछले सात वर्षों के दौरान टीम इंडिया न्यूजीलैंड की सरजमीं पर एक भी वनडे मैच जीतने में सफल नहीं हो सकी है। भारत ने कीवी मैदानों पर अपना आखिरी 50 ओवर का अंतरराष्ट्रीय मैच फरवरी 2019 में जीता था, जिसके बाद से लगातार हार और प्रतिकूल परिणामों का सिलसिला बना हुआ है।
न्यूजीलैंड की धरती पर कप्तानों और टीम का निराशाजनक ट्रैक रिकॉर्ड
अजहरुद्दीन, सौरव गांगुली और विराट कोहली जैसे दिग्गज कप्तानों के दौर में भी न्यूजीलैंड में वनडे मुकाबले जीतना हमेशा एक पेचीदा काम रहा है। अगर अब तक के मुकाबलों के ब्योरे पर गौर करें, तो भारत ने न्यूजीलैंड की धरती पर कुल 45 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। इनमें से मेहमान टीम को केवल 14 मैचों में जीत नसीब हुई है, जबकि मेजबान न्यूजीलैंड ने अपने घरेलू मैदानों पर भारत के खिलाफ 26 मुकाबले जीते हैं। इसके अतिरिक्त 1 मुकाबला टाई रहा है और 4 मैच बिना किसी नतीजे के समाप्त हुए हैं।
हालांकि जब दोनों टीमों के बीच खेले गए सभी 123 वनडे मैचों के संपूर्ण इतिहास को देखा जाता है, तो पलड़ा भारत की तरफ झुका नजर आता है। कुल 123 भिड़ंतों में से भारतीय टीम ने 63 मुकाबलों में जीत दर्ज की है, जबकि न्यूजीलैंड के हिस्से 52 जीत आई हैं। इनके अलावा 7 मैच बिना नतीजे के रहे हैं और 1 मुकाबला बराबरी यानी टाई पर खत्म हुआ है। इस तरह तटस्थ स्थानों और भारतीय मैदानों पर मजबूत दिखने वाली टीम इंडिया कीवी सरजमीं पर संघर्ष करती रही है।
2019 के बाद के दौरों में जीत का सूखा
वर्ष 2019 के बाद भारतीय दल ने दो बार न्यूजीलैंड का दौरा किया, लेकिन दोनों ही बार 50 ओवर की श्रृंखला में उसे कोई सफलता हाथ नहीं लगी। 2020 में तीन मैचों की वनडे सीरीज के दौरान कीवी टीम ने क्लीन स्वीप करते हुए भारत को सभी मैचों में पराजित किया था। इसके बाद 2022 में टीम दोबारा वहां गई, जहां पहला मुकाबला मेजबान टीम ने जीत लिया और बाकी के दो मैच खराब मौसम तथा बारिश के चलते रद्द हो गए।
भारत ने न्यूजीलैंड की धरती पर अपनी आखिरी वनडे जीत 3 फरवरी 2019 को दर्ज की थी। उस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने पहले खेलते हुए 252 रनों का स्कोर खड़ा किया था। लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की पूरी टीम 217 रनों पर सिमट गई थी, जिसके चलते भारत ने वह मुकाबला 35 रनों से अपने नाम किया था। उस यादगार जीत के बाद से भारतीय टीम वहां एक भी 50 ओवर का मुकाबला अपने नाम नहीं कर पाई है।
कोच गौतम गंभीर का लंबा करियर और योगदान
वर्तमान समय में भारतीय टीम के मुख्य कोच की भूमिका निभा रहे गौतम गंभीर का अपना अंतरराष्ट्रीय करियर भी काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने साल 2003 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था और देश के लिए कुल 242 मुकाबले खेले, जिसमें 58 टेस्ट मैच, 147 वनडे और 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच शामिल हैं। भारतीय क्रिकेट के दो सबसे बड़े पलों यानी 2007 के टी20 विश्व कप और 2011 के वनडे विश्व कप की खिताबी जीत में उनकी केंद्रीय भूमिका रही थी। इन दोनों टूर्नामेंटों के फाइनल में उन्होंने क्रमशः 75 और 97 रनों की ऐतिहासिक पारियां खेली थीं। इसके बावजूद अपने करियर के अंतिम पड़ाव में चयनकर्ताओं की बेरुखी का सामना करने के बाद उन्हें बिना किसी औपचारिक विदाई मुकाबले के साल 2018 में संन्यास लेना पड़ा था। अब मुख्य कोच के तौर पर वे अपनी रणनीतियों के जरिए न्यूजीलैंड में टीम के सात साल के सूखे को खत्म कराने के लक्ष्य के साथ मैदान पर उतरेंगे।



















