पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में जहां पानी की कमी को खेती की सबसे बड़ी अड़चन माना जाता है, वहीं बारिश के मौसम में यहां के बंजर खेत अचानक कमाई का जरिया बन जाते हैं। पाकिस्तान सीमा से सटे इस रेगिस्तानी इलाके में खेतों में अपने आप उगने वाली खुम्भी इन दिनों बाजार में करीब 600 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रही है। गांवों में रहने वाले लोग सुबह-सुबह खेतों का रुख करते हैं और यहां से खुम्भी बटोरकर सीधे बाजार पहुंचा देते हैं, जिससे उन्हें बिना ज्यादा मेहनत किए अच्छी कमाई हो जाती है।
प्रतिदिन एक टन तक खपत, इस बार महंगी क्यों
बाड़मेर शहर में खुम्भी की मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रोजाना करीब 1 टन खुम्भी बिक जाती है। हालांकि इस साल मानसून समय पर मेहरबान नहीं हुआ, जिसकी वजह से खेतों में खुम्भी की पैदावार पहले जैसी नहीं हो पाई। उत्पादन घटने का सीधा असर इसके दाम पर पड़ा है और यही वजह है कि इस बार खुम्भी के भाव में उछाल देखा जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जैसे ही खेतों में नमी बढ़ती है, वैसे ही खुम्भी की आवक भी बढ़ जाती है, लेकिन इस साल बारिश के कम दौर मिलने से आवक सीमित रह गई।
सेहत के लिए फायदेमंद, पोषक तत्वों का खजाना
आयुर्वेद कॉलेज के उप निदेशक डॉ. रमेश धनदे बताते हैं कि खुम्भी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन के साथ-साथ कई जरूरी खनिज तत्व मौजूद रहते हैं। डॉ. धनदे के अनुसार इसमें कैलोरी और फैट की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए यह सेहत के नजरिए से काफी फायदेमंद मानी जाती है और इसे रोजमर्रा के भोजन में शामिल करना नुकसानदेह नहीं बताया जाता।
सूखा पाउडर 2500 रुपये किलो, हड्डी जुड़ाव में असरदार
खुम्भी को सुखाकर बनाया गया पाउडर भी कम काम का नहीं है। मान्यता है कि शरीर के किसी हिस्से में मौच आने या हड्डी टूटने पर इस पाउडर को मक्खन में मिलाकर खाने से जुड़ाव जल्दी होता है। यही वजह है कि इसका सूखा पाउडर बाजार में करीब 2500 रुपये प्रति किलो के भाव बिकता है। आम बोलचाल में इसे मशरूम कहा जाता है, जबकि वैज्ञानिक भाषा में इसे फ्लोरियन नाम से जाना जाता है। गांव-देहात के लोग बारिश के दिनों में इसे बटोरकर बाजार में बेचते हैं और इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है, जो अन्यथा बंजर पड़ी जमीन से मुमकिन नहीं होती।
बारिश होते ही खेतों में निकलने लगती है खुम्भी
जैसिंधर गांव के रहने वाले भगवाराम जयपाल पिछले काफी समय से खुम्भी का कारोबार कर रहे हैं। उनका कहना है, बारिश होने के बाद खेतों में खुम्भी अपने आप निकलना शुरू हो जाती है। भगवाराम रोज सुबह खेतों में जाकर खुम्भी इकट्ठा करते हैं और उसी दिन बाजार में बेच देते हैं। इस समय बाजार में उन्हें करीब 500 से 600 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल रहा है। उनके मुताबिक बारिश के मौसम में यह कारोबार उनके परिवार के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन जाता है, और बाड़मेर शहर में रोजाना करीब 1 टन खुम्भी की मांग बनी रहती है, जिससे इलाके के तमाम छोटे कारोबारियों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है।





















