भारत रत्न भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के मौके पर असम सरकार ने कोलकाता के एक पुराने मकान के जर्जर हो चुके कमरे को बचाने की कोशिश शुरू कर दी है। यह वही कमरा है जहां दिग्गज गायक और संगीतकार कई साल तक रहे थे, और अब सरकार इसे स्मारक के तौर पर संवारना चाहती है। यह कदम उन तमाम जगहों को चिन्हित और सुरक्षित करने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है जो दिग्गज संगीतकार के जीवन से गहरे जुड़ी रही हैं, हालांकि यह मकान खुद इस वक्त कई मालिकों के बीच बंटी और नाजुक हालत में है, जिससे यह कोशिश आसान नहीं रहने वाली।
टॉलीगंज में रविवार का दौरा
असम सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज इलाके में 77 बी गोल्फ क्लब रोड स्थित तीन मंजिला इमारत पहुंचा। दल की नजर खासतौर पर पहली मंजिल के उस एक कमरे पर थी, जहां भूपेन हजारिका ने कई साल गुजारे थे, इससे पहले कि उन्होंने यह मकान पूरी तरह खरीद लिया। दौरे का नेतृत्व असम के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी कल्याण चक्रवर्ती ने किया। उन्होंने कहा कि अब इस मामले को सबसे ऊंचे स्तर पर उठाया जाएगा। उन्होंने कहा, 'यह भूपेन हजारिका से जुड़ी बेहद अहम जगह है।' उन्होंने बताया कि असम सरकार इस कमरे की मरम्मत और संरक्षण के तरीके तलाशेगी।
किराए के कमरे से खुद के घर तक
हजारिका की विरासत को बंगाल में जीवंत रखने का काम कर रही असम एसोसिएशन से जुड़े त्रिदिब शर्मा के मुताबिक, गायक पहले गोल्फ क्लब रोड की इस इमारत की पहली मंजिल पर किराए पर रहते थे। बाद में उन्होंने 1981 में यह मकान खरीद लिया और करीब दो दशक तक इसके मालिक रहे। मुंबई शिफ्ट होने के बाद उन्होंने 1990 के दशक के अंत में इसे बेच दिया।
जब इसी छत के नीचे जुटते थे संगीत के दिग्गज
त्रिदिब शर्मा बताते हैं कि यह घर सिर्फ एक रिहायशी जगह भर नहीं था, बल्कि उस दौर में यह कोलकाता के सांस्कृतिक पते जैसा बन गया था, जहां भारतीय संगीत की कई बड़ी हस्तियां आया-जाया करती थीं। उनके मुताबिक, लता मंगेशकर और मन्ना डे जैसे गायक भी हजारिका से मिलने यहां आते थे। शर्मा ने कहा, 'यह सिर्फ एक घर नहीं बल्कि एक ऐसा मंच था जो दिखाता था कि हजारिका संगीत की दुनिया को जोड़ने वाले कलाकार थे।' उन्होंने बताया कि हजारिका असमिया, बंगाली और हिंदी गीतों के बीच बड़ी सहजता से आते-जाते थे, और यही खूबी उन्हें अलग-अलग भाषाई तबकों में पसंद कराती थी।
कई मालिक, एक उलझी हुई पहेली
इस जगह को स्मारक में बदलना इतना आसान नहीं है। अब इस इमारत पर किसी एक परिवार का मालिकाना हक नहीं है, बल्कि यह कई परिवारों के बीच बंटी हुई है, और इनमें से किसी का भी हजारिका या उनके परिवार से कोई सीधा नाता नहीं है। रविवार के दौरे में असम का प्रतिनिधिमंडल इमारत की ऊपरी मंजिलों तक भी नहीं पहुंच सका, क्योंकि वहां कई मालिक और किराएदार रहते हैं। दल को ज्यादातर निरीक्षण नीचे से और बाहर से ही करना पड़ा। यानी किसी भी संरक्षण योजना को अमल में लाने से पहले कई पक्षों से बातचीत करनी होगी, यह चुनौती अधिकारियों ने दौरे के दौरान भी महसूस की।
पहले भी हुई थी कोशिश, बात आगे नहीं बढ़ी
यह पहली बार नहीं है जब यह मुद्दा उठा हो। त्रिदिब शर्मा के मुताबिक, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भी पहले इसी पते पर स्मारक बनाने की प्रक्रिया शुरू करने में दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन उस वक्त यह कोशिश आगे नहीं बढ़ पाई थी। इमारत में रहने वाले कई परिवार और बंटा हुआ मालिकाना हक ही तब से इसमें सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है।
पश्चिम बंगाल के सहयोग पर टिकी उम्मीद
शताब्दी वर्ष के बीच अब फिर सवाल यही है कि क्या दोनों राज्य सरकारें मिलकर इस कमरे को हासिल करने की दिशा में काम कर सकती हैं। त्रिदिब शर्मा ने कहा कि असम एसोसिएशन को उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी की सरकार जरूरी कदम उठाएगी, ताकि यह कमरा हासिल किया जा सके और असम के साथ मिलकर यहां स्मारक बनाने का रास्ता साफ हो सके। बी कल्याण चक्रवर्ती ने भी यही उम्मीद दोहराई और कहा कि असम और पश्चिम बंगाल मिलकर हजारिका के पहली मंजिल वाले उस पुराने कमरे को बचाने और आगे चलकर उसे स्मारक बनाने की साझा रणनीति बना सकते हैं।
वह आवाज जो हर सरहद से आगे निकल गई
बी कल्याण चक्रवर्ती ने भूपेन हजारिका को ऐसा कलाकार बताया जिनका काम सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक दायरों से कहीं आगे निकल गया, और कहा कि उनकी विरासत को पूरे सम्मान के साथ संजोया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हजारिका का संगीत भाषा और समाज की सीमाओं से आगे निकल गया।' उन्होंने बताया कि हजारिका ने कई भाषाओं में गीत गाए, जिन्होंने अलग-अलग समुदायों को हमेशा करीब लाने का काम किया और जाति, मजहब व वर्ग से ऊपर उठने की भावना को दिखाया। अधिकारी ने यह भी कहा कि कोलकाता लंबे समय से भारत के प्रमुख कला और संस्कृति केंद्रों में गिना जाता रहा है, इसलिए हजारिका से जुड़ी जगहों को बचाने की खास जिम्मेदारी इसी शहर पर बनती है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि बंगाली संगीत के इतने बड़े गायक जिस कमरे में कभी रहा करते थे, वह आज जर्जर हालत में पड़ा है। उन्होंने कहा कि हजारिका को बंगाल, वहां के लोगों और वहां की संस्कृति से गहरा लगाव था, इसलिए शहर को उस कलाकार का सम्मान करना चाहिए जिसके आज भी लाखों प्रशंसक हैं। चक्रवर्ती ने बताया कि असम सरकार अब औपचारिक रूप से यह मामला पश्चिम बंगाल प्रशासन के सामने रखेगी।
पूरे साल चल रहे शताब्दी समारोह का हिस्सा
टॉलीगंज का यह दौरा उन तमाम कार्यक्रमों के बीच हुआ है जो भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के मौके पर देशभर में साल भर आयोजित किए जा रहे हैं। लोक परंपराओं में गहरी जड़ें रखने वाला उनका विशाल संगीत भंडार, जिसमें असमिया, बंगाली और हिंदी गीत शामिल हैं, आज भी असम और बंगाल की सांस्कृतिक जिंदगी में अहम जगह रखता है, वहीं उनका असर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैला हुआ है। इस मामले से जुड़े अधिकारियों के लिए शताब्दी वर्ष एक दुर्लभ मौका माना जा रहा है, ताकि दशकों से उपेक्षित पड़े उस कमरे की तकदीर आखिरकार तय की जा सके, जिसका नाता भारत के सबसे चहेते संगीतकारों में से एक से इतनी गहराई से जुड़ा है।





















