दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी/हॉस्टल की इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसमें दबकर 6 लोगों की जान चली गई और कई छात्र मलबे में फंस गए। यह खबर पढ़ते ही उन हजारों मां-बाप के दिल में डर बैठ गया है, जिनके बच्चे पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में घर से दूर बड़े शहरों में किराए के कमरों में रहते हैं।
जब कोई बच्चा कॉलेज में दाखिला लेता है, तो परिवार की सबसे पहली चिंता उसके लिए एक सुरक्षित छत ढूंढना होती है। लेकिन चमक-दमक, ब्रोकरों की मीठी बातों और सीमित बजट के दबाव में कई पेरेंट्स इमारत की मजबूती और बुनियादी सुरक्षा इंतजामों की तरफ ध्यान ही नहीं देते। सत्य निकेतन की यह घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि उन लापरवाह पीजी और हॉस्टल संचालकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है, जो सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर अपना कारोबार चला रहे हैं। किराए का कमरा तय करते वक्त सिर्फ दीवारों का रंग और सजावट देख लेना काफी नहीं है, बच्चे की जान से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता।
इमारत मजबूत है या नहीं, पहले यही परखें
पीजी या हॉस्टल फाइनल करने से पहले सबसे पहला और सबसे जरूरी काम है इमारत की संरचनात्मक मजबूती जांचना। इसके लिए कुछ बातों पर खास ध्यान देना चाहिए
- उम्र और निर्माण की गुणवत्ता: इमारत बहुत पुरानी या जर्जर हालत में नहीं होनी चाहिए। अगर दीवारों में सीलन दिख रही हो, बड़ी दरारें नजर आएं या पिलर कमजोर लगें, तो उस पीजी को तुरंत नकार देना चाहिए, चाहे किराया कितना भी कम क्यों न हो।
- अवैध निर्माण की पड़ताल: कई मकान मालिक ज्यादा किराया वसूलने के लालच में बालकनी को ढककर कमरा बना देते हैं या छत पर बिना अनुमति अतिरिक्त कमरे खड़े कर देते हैं। इससे इमारत पर उसकी क्षमता से ज्यादा बोझ पड़ता है, जो आगे चलकर खतरनाक साबित हो सकता है।
- फायर सेफ्टी और एग्जिट रास्ते: किसी भी इमरजेंसी में बाहर निकलने के लिए कम से कम दो चौड़े रास्ते जरूर होने चाहिए। यह भी देखें कि सीढ़ियों पर सामान रखकर रास्ता तो नहीं रोका गया है और फायर एक्स्टिंग्विशर चालू हालत में लगा है या नहीं।
- सीसीटीवी और सिक्योरिटी गार्ड: मेन गेट पर 24 घंटे तैनात सिक्योरिटी गार्ड और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर चालू हालत में सीसीटीवी कैमरे होना अनिवार्य शर्त माना जाना चाहिए।
- बायोमेट्रिक या डिजिटल लॉक सिस्टम: अजनबियों की सीधी एंट्री रोकने के लिए डिजिटल लॉक या विजिटर रजिस्टर जैसा कोई सिस्टम जरूर होना चाहिए, ताकि हर आने-जाने वाले का रिकॉर्ड रहे।
- वॉर्डन की मौजूदगी: खासतौर पर गर्ल्स पीजी में एक जिम्मेदार महिला वॉर्डन का मौजूद रहना बेहद जरूरी है, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद के लिए आगे आ सके।
पानी, बिजली और वेंटिलेशन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी न भूलें
इमारत की मजबूती के अलावा रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी सुविधाएं भी बच्चे की सेहत और सुरक्षा पर सीधा असर डालती हैं।
- साफ पानी और आरओ की व्यवस्था: पीने के पानी के लिए कमर्शियल आरओ सिस्टम लगा होना चाहिए और इस्तेमाल के लिए 24 घंटे पानी की सप्लाई सुनिश्चित होनी चाहिए।
- पावर बैकअप और रोशनी: पढ़ाई के दौरान बार-बार बिजली न कटे, इसके लिए इन्वर्टर या जनरेटर बैकअप का इंतजाम होना चाहिए। साथ ही कमरे में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा का आना-जाना भी जरूरी है।
- साफ-सफाई और वॉशरूम: टॉयलेट-बाथरूम में उचित वेंटिलेशन हो और रोजाना सफाई के लिए हाउसकीपिंग स्टाफ नियमित रूप से आता हो।
लोकेशन और आसपास का माहौल भी जांच लें
सिर्फ कमरे के अंदर की सुविधाएं ही नहीं, पीजी की लोकेशन और आसपास का इलाका भी बच्चे की रोजमर्रा की सुरक्षा तय करता है।
- मुख्य सड़क से कनेक्टिविटी: पीजी गली के बहुत भीतर या सुनसान इलाके में नहीं होना चाहिए। मुख्य सड़क से सीधी एप्रोच रोड होनी चाहिए, ताकि रात में आने-जाने में डर न लगे।
- जरूरी दुकानें और हॉस्पिटल: पीजी के 500 मीटर के दायरे में केमिस्ट, किराना दुकान, स्टेशनरी, बैंक या एटीएम और कम से कम एक क्लीनिक या हॉस्पिटल जरूर होना चाहिए, ताकि किसी भी इमरजेंसी में देर न हो।
- स्ट्रीट लाइट्स: हॉस्टल से लेकर मुख्य बस स्टैंड या मेट्रो स्टेशन तक जाने वाले रास्ते पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट्स लगी होनी चाहिए, ताकि रात में आने-जाने वाले छात्रों को असुरक्षित महसूस न हो।
सत्य निकेतन हादसे ने साफ कर दिया है कि पीजी या हॉस्टल चुनते समय जल्दबाजी या सिर्फ कम किराए के लालच में लिया गया फैसला बहुत भारी पड़ सकता है। एक बार बच्चे को कमरा दिलाकर निश्चिंत हो जाने के बजाय, समय-समय पर इमारत और सुरक्षा इंतजामों की खुद जाकर जांच करते रहना ही पेरेंट्स के लिए सबसे बड़ी सतर्कता है।



















