भारत के लिए तीनों प्रारूपों में मैदान पर उतर चुके अनुभवी लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने पेशेवर और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के सभी प्रारूपों से अपने संन्यास की घोषणा कर दी है। 38 वर्षीय इस खिलाड़ी ने उत्तर प्रदेश टी20 लीग में कानपुर सुपरस्टार्स और मेरठ मेवरिक्स के बीच खेले गए मुकाबले के समाप्त होने के तुरंत बाद यह बड़ा निर्णय लिया। उत्तर प्रदेश टी20 लीग के लखनऊ चरण के दौरान 25 अगस्त को खेला जाने वाला मुकाबला उनके करियर का आखिरी प्रतिस्पर्धी मैच साबित होगा। हालांकि राष्ट्रीय टीम के लिए उनका अंतर्राष्ट्रीय करियर महज चार मुकाबलों तक ही सीमित रहा, लेकिन भारतीय घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में उनकी उपयोगिता तथा योगदान बेहद प्रभावशाली रहे हैं। भारत के लिए खेलते हुए उन्होंने एक टेस्ट, दो एकदिवसीय और एक टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले में कुल 5 विकेट झटके। इसके विपरीत घरेलू सर्किट में उनका प्रदर्शन अत्यंत शानदार रहा, जहां उन्होंने फर्स्ट क्लास, लिस्ट ए और टी20 फॉर्मेट को मिलाकर कुल 551 विकेट अपने नाम किए। खेल को अलविदा कहने के बाद उन्होंने अब कोचिंग और क्रिकेट प्रशासन से जुड़ी नई भूमिकाओं में अपना करियर आगे बढ़ाने की मंशा व्यक्त की है।
अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुआत और यादगार पल
कर्ण शर्मा का अंतर्राष्ट्रीय करियर भले ही लंबा न चल सका हो, लेकिन जिन मुकाबलों में उन्हें खेलने का मौका मिला, वे भारतीय क्रिकेट के इतिहास में विशेष महत्व रखते हैं। उन्होंने अपना एकदिवसीय डेब्यू उस ऐतिहासिक मैच में किया था, जिसमें रोहित शर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ 264 रनों की रिकॉर्ड पारी खेली थी। पुरुष एकदिवसीय क्रिकेट इतिहास में यह किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। उस श्रृंखला में कर्ण ने दो एकदिवसीय मैच खेले थे, हालांकि उन्हें कोई सफलता हासिल नहीं हुई थी। उसी वर्ष 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई भारतीय टीम में भी उन्हें जगह दी गई और उन्होंने एडिलेड में अपना पहला और इकलौता टेस्ट मैच खेला। उस टेस्ट की दोनों पारियों में कर्ण ने दो-दो विकेट हासिल करते हुए कुल 4 विकेट चटकाए थे। दुखद रूप से यह टेस्ट मैच ही उनके अंतर्राष्ट्रीय करियर का अंतिम मैच बन गया। इससे पहले उन्होंने इंग्लैंड दौरे पर सीमित ओवरों की टीम में जगह बनाते हुए अपना एकमात्र टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला खेला था, जिसमें उन्होंने जो रूट का महत्वपूर्ण विकेट चटकाया था। साल 2015 में जिम्बाब्वे दौरे के लिए भी उन्हें चुना गया था, मगर दौरे से ठीक पहले लगी चोट के कारण वह बाहर हो गए और उसके बाद कभी राष्ट्रीय टीम में वापसी नहीं कर सके।
घरेलू सर्किट में शानदार उभार और नीलामी की बड़ी बोली
कर्ण शर्मा के घरेलू करियर का आगाज 2007-08 के सीजन में हुआ था, जहां उन्होंने शुरुआत में एक उपयोगी ऑलराउंडर के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपने डेब्यू रणजी ट्रॉफी मैच में ही शानदार शतकीय पारी खेलकर सबका ध्यान आकर्षित किया था। हालांकि उनके गेंदबाजी कौशल को असली पहचान 2012-13 के रणजी सीजन में मिली। उस सत्र में उन्होंने सिर्फ तीन मुकाबलों में 19.04 की बेहतरीन औसत से 21 विकेट अपने नाम किए। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उन्हें अंडर-25 वर्ग के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर के पुरस्कार से सम्मानित किया था। घरेलू स्तर पर लगातार आ रहे इस उछाल का असर आईपीएल की नीलामियों में भी देखा गया। 2014 की आईपीएल नीलामी में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन पर भरोसा जताते हुए 3.75 करोड़ रुपये की बड़ी बोली लगाई। इस बोली के साथ ही वह उस नीलामी के सबसे महंगे अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी बन गए थे, जिसने उनके लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाजे भी खोल दिए।
तीन अलग टीमों के साथ लगातार आईपीएल खिताब जीतने का अनोखा रिकॉर्ड
इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में कर्ण शर्मा के नाम एक ऐसा अनूठा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे दोहरा पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन है। वह लगातार तीन वर्षों तक तीन अलग-अलग टीमों का हिस्सा रहते हुए आईपीएल की ट्रॉफी उठाने वाले विशेष खिलाड़ी बने। उन्होंने सबसे पहले 2016 में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ अपनी पहली आईपीएल ट्रॉफी जीती। इसके ठीक अगले वर्ष 2017 में वह मुंबई इंडियंस की विजेता टीम का हिस्सा रहे और फिर 2018 में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के साथ लगातार तीसरी बार आईपीएल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस अनोखी उपलब्धि ने उन्हें आईपीएल के सबसे सफल और भाग्यशाली खिलाड़ियों की सूची में शामिल कर दिया। लीग में उन्होंने अपना आखिरी मुकाबला 2025 में मुंबई इंडियंस के लिए खेला था।
शानदार आंकड़ों के साथ क्रिकेट को कहा अलविदा
कर्ण शर्मा का घरेलू रिकॉर्ड उनकी बेहतरीन प्रतिभा और निरंतरता की गवाही देता है। उन्होंने अपने करियर में 97 फर्स्ट क्लास मैच खेले, जिनमें 270 विकेट चटकाए। इस दौरान उन्होंने 14 बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया। बल्लेबाजी में भी उन्होंने अपना जलवा दिखाते हुए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 2,866 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 14 अर्धशतक शामिल हैं। वह महज 3 मैच खेलने से अपने 100 फर्स्ट क्लास मैचों का आंकड़ा पूरा करने से चूक गए। लिस्ट ए क्रिकेट में उन्होंने 123 मुकाबले खेलकर 153 विकेट हासिल किए और साथ ही 1 शतक व 6 अर्धशतक भी जमाए। टी20 प्रारूप में उन्होंने कुल 191 मैच खेलकर 168 विकेट झटके और बल्ले से 2 अर्धशतक लगाए। इसमें से केवल आईपीएल की बात करें तो उन्होंने 90 मैचों में 87 विकेट चटकाए। अपने संन्यास की आधिकारिक घोषणा करते हुए कर्ण ने अपने परिवार, बीसीसीआई, रेलवे, उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन, आंध्र क्रिकेट एसोसिएशन और विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके करियर के हर मोड़ पर उनका सहयोग किया।


















