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सारांश जैन का टेस्ट डेब्यू: पिता का कैंसर से लड़ते हुए लिखा खत और सालों का संघर्ष, ऐसे मिली टीम इंडिया की कैपक्रिकेट
23 अग॰ 2026, 10:59 am (51 मिनट पहले)· 2

सारांश जैन का टेस्ट डेब्यू: पिता का कैंसर से लड़ते हुए लिखा खत और सालों का संघर्ष, ऐसे मिली टीम इंडिया की कैप

मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन ने 33 साल की उम्र में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में भारत के लिए डेब्यू किया है। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन और पिता के संघर्ष भरे संदेश ने इस मुकाम तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।

क्रिकेट की दुनिया में कई बार ऐसे पल आते हैं जो सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं होते, बल्कि उसके पूरे परिवार के दशकों के संघर्ष, त्याग और उम्मीदों की कहानी बयां करते हैं। मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन ने जब कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में भारत की टेस्ट कैप पहनी, तो वह सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि उन तमाम सपनों के लिए एक ऐतिहासिक पल था जो उनके पिता ने कभी देखे थे। 33 वर्ष की उम्र में टेस्ट टीम में जगह बनाना यह साबित करता है कि अगर मेहनत और लगन सच्ची हो, तो देर से ही सही, मंजिल मिल ही जाती है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सारांश को लंबा और कठिन सफर तय करना पड़ा, जिसमें घरेलू क्रिकेट का संघर्ष और एक पिता का वह भावुक खत भी शामिल है जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

इतिहास के पन्नों में झांकें तो 31 मार्च 1993 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मे सारांश जैन का क्रिकेट से पुराना नाता रहा है। उनके पिता सुबोध जैन खुद मध्य प्रदेश की ओर से रणजी ट्रॉफी खेल चुके थे और भारत के लिए खेलने का उनका खुद का सपना था, जो किसी वजह से पूरा नहीं हो सका। घर में शुरुआती दौर में उनके बड़े भाई को क्रिकेट की दुनिया में आगे ले जाने की उम्मीदें थीं। बड़े भाई ने इंदौर के विजय क्लब में ट्रेनिंग ली और खेल में अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन जब उनका करियर उस ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच पाया जैसी उम्मीद की जा रही थी, तो परिवार का सारा फोकस और उम्मीदें छोटे बेटे सारांश की तरफ मुड़ गईं। इसके बाद उनके पिता ही उनके पहले कोच बने और उन्होंने सारांश के खेल को निखारने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

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सारांश के जीवन का सबसे संवेदनशील और भावुक मोड़ उनके पिता की गंभीर बीमारी से जुड़ा हुआ है। जब उन्होंने प्रोफेशनल क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा ही था, तब वह मध्य प्रदेश की एक क्लब टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गए हुए थे। उसी दौरान उनके पिता को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का पता चला और उनकी सर्जरी की गई। परिवार ने उस वक्त घबराहट और दौरे की अहमियत को देखते हुए यह खबर तुरंत सारांश को नहीं दी। जब वह अपना दौरा पूरा करके अपने घर वापस लौटे, तब उन्हें इस पूरी स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। सर्जरी के बाद उनके पिता सुबोध इतने कमजोर हो चुके थे कि वह ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। ऐसे हालात में उन्होंने अपने बेटे से बात करने के लिए एक कागज के टुकड़े पर अपने हाथ से संदेश लिखा। उस खत में उन्होंने सारांश से साफ कहा कि वह किसी भी हाल में क्रिकेट से अपना ध्यान न हटाएं और अपने खेल को पूरी शिद्दत के साथ जारी रखें। वह चिट्ठी सारांश के लिए सिर्फ कुछ साधारण शब्द नहीं थे, बल्कि उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई, जिसे उन्होंने आज भी संभाल कर रखा है। जब भी उनके करियर में कोई मुश्किल वक्त आया, पिता की वह सीख हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़ी रही।

घरेलू क्रिकेट में अपने पैर जमाने के लिए सारांश को लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने साल 2014 में मध्य प्रदेश के लिए अपना रणजी ट्रॉफी डेब्यू किया था, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक उन्हें टीम में नियमित मौके और वह पहचान नहीं मिल पाई जिसके वह हकदार थे। साल 2022 तक उन्होंने सिर्फ आठ फर्स्ट क्लास मैच ही खेले थे। हालांकि, इसके बाद किस्मत ने करवट ली जब मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबलों में उन्हें खेलने का मौका मिला। उन्होंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और अपने दमदार प्रदर्शन से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उस नॉकआउट चरण में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 13 विकेट चटकाए और साथ ही एक अहम अर्धशतक भी अपने नाम किया। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने मध्य प्रदेश की टीम को इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जिताने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। यहीं से सारांश के ठहरे हुए करियर को एक नई रफ्तार मिली और वह राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की रडार पर आ गए।

अपने हालिया रणजी ट्रॉफी सीजन में भी सारांश ने अपने खेल का लोहा मनवाया और इसे अपने करियर के सबसे बेहतरीन सत्रों में शुमार किया। इस सत्र के दौरान उन्होंने बल्ले से कमाल दिखाते हुए 518 रन बनाए और उनका शानदार बल्लेबाजी औसत 57.55 का रहा। इसके साथ ही गेंदबाजी में भी उन्होंने अपनी फिरकी का जादू बिखेरते हुए 30 विकेट अपने नाम किए। रणजी से पहले उन्होंने दलीप ट्रॉफी में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया था। सेंट्रल जोन की तरफ से खेलते हुए सारांश ने दो शानदार अर्धशतक जड़े और मात्र दो मैचों में ही 16 विकेट झटक लिए। उनके इस धमाकेदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज के खिताब से नवाजा गया। लगातार घरेलू मुकाबलों में ऐसा लाजवाब खेल दिखाना ही था जिसने उन्हें भारतीय टीम के दरवाजे तक ला खड़ा किया।

श्रीलंका दौरे पर टीम इंडिया की अंतिम ग्यारह में जगह बनाने के लिए कुछ समीकरण भी उनके पक्ष में बैठे। टीम के अहम खिलाड़ी वॉशिंगटन सुंदर चोट की वजह से पहले टेस्ट मैच के लिए उपलब्ध नहीं हो सके थे। इसके अलावा श्रीलंकाई टीम में कई सारे बाएं हाथ के बल्लेबाज मौजूद थे, जिसके चलते चयनकर्ताओं को एक क्वालिटी ऑफ स्पिनर की सख्त जरूरत महसूस हुई। ऐसे वक्त में सारांश बिल्कुल सही समय पर सही जगह पर मौजूद थे। वह इससे पहले भारत ए के साथ भी श्रीलंका के दौरे पर जा चुके थे। हालांकि शुरुआती मुकाबलों में उनका प्रदर्शन बहुत ज्यादा खास नहीं रहा था, लेकिन दूसरे मैच में उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित करते हुए नाबाद 70 रनों की बेहतरीन पारी खेली और गेंदबाजी में छह विकेट हासिल करके अपनी दावेदारी को पूरी तरह मजबूत कर दिया। इन सब परिस्थितियों के मेल ने उन्हें भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचा दिया और आखिरकार उन्हें टेस्ट कैप मिल ही गई।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सारांश जैन का अब तक का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली और शानदार रहा है। उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी यूएसपी और ताकत उनकी धारदार ऑफ स्पिन है। मैदान पर वह बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हैं और अपनी इस शैली व खेल के प्रति समर्पण के मामले में वह खुद दिग्गज रविचंद्रन अश्विन को अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने साल 2024 में एक इंटरव्यू के दौरान जिक्र किया था कि वह अक्सर अश्विन को गेंदबाजी करते हुए बहुत बारीकी से देखते हैं और उनसे निरंतर प्रेरणा लेते हैं। वह अपने पूरे क्रिकेट सफर को भी रविचंद्रन अश्विन जैसी ही कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। सारांश ने अब तक अपने करियर में कुल 54 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने 2223 रन बनाए हैं और 188 विकेट अपने नाम किए हैं। रेड-बॉल क्रिकेट में उनका बल्लेबाजी औसत 31.75 और गेंदबाजी औसत 27.30 का रहा है। इसके अलावा उन्होंने 67 लिस्ट ए और टी20 मुकाबले भी खेले हैं, लेकिन उनका असली प्रभाव हमेशा लाल गेंद के क्रिकेट यानी रेड-बॉल फॉर्मेट में ही सबसे ज्यादा देखने को मिला है।

सवाल-जवाब

सारांश जैन ने अपना टेस्ट डेब्यू किस टीम के खिलाफ किया?
सारांश जैन ने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में अपना टेस्ट डेब्यू किया।
सारांश जैन को टेस्ट कैप किसने पहनाई?
सारांश जैन को भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने टीम इंडिया की कैप पहनाई।
सारांश जैन किस घरेलू टीम के लिए खेलते हैं?
सारांश जैन घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश की टीम के लिए खेलते हैं।
सारांश जैन का क्रिकेट में आदर्श कौन है?
सारांश जैन दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को अपना आदर्श मानते हैं।
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