कोलंबो में खेले जा रहे मुकाबले के दौरान क्रिकेट प्रेमियों को मैदान पर एक तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली, जब भारतीय पारी के शुरुआती समय में ही माहौल काफी गर्म हो गया। भारतीय बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल के आउट होने के बाद तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के साथ उनकी तीखी बहस हो गई और दोनों खिलाड़ी मैदान पर आमने-सामने आ गए। इस तीखी नोकझोंक के दौरान दोनों के बीच हल्का शारीरिक संपर्क भी हुआ, जिसे देखकर वहां मौजूद साथी खिलाड़ियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और स्थिति को शांत कराया।
यह पूरा वाकया पारी के 17वें ओवर की आखिरी गेंद पर सामने आया। उस समय बल्लेबाज शानदार फॉर्म में नजर आ रहे थे और उन्होंने अपनी पारी के दौरान तेज गेंदबाज की गेंदों पर लगातार तीन चौके भी जड़े थे। कुल 53 गेंदों का सामना करते हुए उन्होंने 9 शानदार चौकों की मदद से 45 रन बना लिए थे। हालांकि, ओवर की अंतिम गेंद पर गेंदबाज ने वापसी करते हुए उन्हें बोल्ड कर दिया और विकेट मिलने के बाद आक्रामक तरीके से अपनी खुशी जाहिर की।
जब बल्लेबाज पवेलियन की तरफ लौटने लगे, तब गेंदबाज की तरफ से कुछ ऐसे शब्द कहे गए जिन्हें वे नजरअंदाज नहीं कर सके। इसके बाद भारतीय ओपनर तुरंत वापस लौटे और दोनों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों खिलाड़ियों के बीच हेलमेट की हल्की टक्कर भी देखने को मिली, लेकिन श्रीलंकाई टीम के अन्य सदस्यों ने समय रहते बीच-बचाव कर मामले को और आगे बढ़ने से रोक लिया।
किसकी गलती और क्या कहते हैं नियम
इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इसमें मुख्य रूप से किसकी गलती मानी जाएगी। केवल शुरुआती वीडियो फुटेज के आधार पर यह तय करना अभी जल्दबाजी होगी कि कौन सा खिलाड़ी इसके लिए जिम्मेदार है। मैच अधिकारियों की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात का फैसला हो पाएगा कि इस घटना में अनुशासनहीनता का स्तर क्या था।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के आचार संहिता नियमों के मुताबिक मैदान पर खिलाड़ियों के बीच होने वाली ऐसी हरकतों को बहुत बारीकी से परखा जाता है। आईसीसी के नियमों में शारीरिक संपर्क और आक्रामकता के लिए अलग-अलग लेवल तय किए गए हैं। आर्टिकल 2.18 के तहत किसी भी अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान अंपायर, मैच रेफरी या विरोधी खिलाड़ी के साथ शारीरिक संपर्क या हमला करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
इसके अलावा आर्टिकल 2.19 भी मैदान पर किसी भी प्रकार की हिंसा को लेकर बेहद कड़े प्रावधान तय करता है। यदि किसी खिलाड़ी का आचरण केवल मौखिक नोकझोंक या आक्रामक इशारों से आगे बढ़कर शारीरिक दायरे में प्रवेश कर जाता है, तो अनुशासन समिति बहुत सख्त कदम उठा सकती है।
लेवल-4 के उल्लंघन पर क्या मिल सकती है सजा
खेल के नियमों के अनुसार सबसे गंभीर मामलों को लेवल-4 के अंतर्गत रखा जाता है। यदि कोई खिलाड़ी इस श्रेणी के दोष का दोषी पाया जाता है, तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है। आईसीसी के प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में न्यूनतम पांच टेस्ट मैचों या दस एकदिवसीय मैचों का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यदि उल्लंघन बहुत ज्यादा गंभीर माना जाता है, तो नियमों के दायरे में दोषी खिलाड़ी या अधिकारी पर आजीवन प्रतिबंध यानी लाइफटाइम बैन लगाए जाने का भी प्रावधान मौजूद है। फिलहाल सभी की निगाहें मैच रेफरी की आने वाली आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।



















