अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में जब दो बल्लेबाज पारी का आगाज करने उतरते हैं, तो उनकी प्राथमिक भूमिका शुरुआती कठिन ओवरों को निकाल कर टीम को सुरक्षित और मजबूत स्थिति में पहुंचाने की होती है। नई गेंद की स्विंग और उछाल का सामना करना आसान नहीं होता, लेकिन जब दोनों ही सलामी बल्लेबाज क्रीज पर पूरी तरह जम जाएं और अलग-अलग शतक जमाकर वापस लौटें, तो यह मुकाबला क्रिकेट इतिहास के पन्नों में अमर हो जाता है। पचास ओवर के खेल में दोनों ओपनरों का एक साथ सैकड़ा बनाना बेहद दुर्लभ माना गया है। इस खास सिलसिले की शुरुआत 1986 में हुई थी, जिसके बाद उपमहाद्वीप और एसोसिएट देशों के बल्लेबाजों ने भी इस अनोखे रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। यहां उन शुरुआती पांच मैचों का ब्योरा दिया जा रहा है जहां दोनों सलामी बल्लेबाजों ने एक ही मुकाबले में शतकीय पारियां खेलकर विरोधी गेंदबाजी को बेबस कर दिया था।
जयपुर 1986: ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी का कारनामा मगर मुकाबला भारत के नाम
इस अद्भुत रिकॉर्ड की नींव 7 सितंबर 1986 को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में रखी गई थी। यह मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जा रहा था। कंगारू टीम की तरफ से पारी की शुरुआत करने आए ट्रैवर चैपल और ज्योफ मार्श ने पिच पर टिककर भारतीय गेंदबाजों की रणनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। दोनों ही बल्लेबाजों ने तकनीक, संयम और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल दिखाया।
ट्रैवर चैपल और ज्योफ मार्श ने मैदान के चारों तरफ सटीक शॉट खेले और अपने-अपने व्यक्तिगत शतक पूरे किए। इस दोहरी शतकीय शुरुआत की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित ओवरों में 3 विकेट के नुकसान पर 250 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। उस दौर के सीमित ओवरों के क्रिकेट में 250 का स्कोर काफी बड़ा और मजबूत माना जाता था। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए निराशा की बात यह रही कि दोनों ओपनर्स के शानदार शतकों के बावजूद वे मैच नहीं बचा सके। भारतीय टीम ने बेहतरीन जवाबी खेल दिखाया और इस मुकाबले को अपनी झोली में डालकर कंगारू ओपनर्स की यादगार मेहनत पर पानी फेर दिया।
एडिलेड 1990: पाकिस्तानी जोड़ी का दबदबा और श्रीलंका को शिकस्त
जयपुर के मुकाबले के करीब चार साल बाद यह दुर्लभ नजारा ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर देखने को मिला। तारीख थी 17 फरवरी 1990 और मैदान था एडिलेड। इस मुकाबले में पाकिस्तान का सामना श्रीलंका से हो रहा था। पाकिस्तान की ओर से पारी का आगाज करने अनुभवी रमीज राजा और आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज सईद अनवर क्रीज पर उतरे।
दोनों पाकिस्तानी सलामी बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। तेज गेंदों के साथ-साथ स्पिनरों के खिलाफ भी दोनों ने खुलकर रन बटोरे और देखते ही देखते अपने-अपने शतक पूरे कर लिए। इस ठोस और आक्रामक साझेदारी के दम पर पाकिस्तान ने 3 विकेट खोकर 315 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। एडिलेड में यह शतकीय शुरुआत बेकार नहीं गई। 315 के पहाड़ जैसे स्कोर के दबाव में श्रीलंकाई टीम बिखर गई और पाकिस्तान ने एक शानदार जीत अपने नाम दर्ज की।
शारजाह 1993: रमीज राजा और सईद अनवर का फिर चला बल्ला
तटस्थ मैदानों पर सीमित ओवरों के क्रिकेट की चर्चा शारजाह के बिना अधूरी मानी जाती है। 4 फरवरी 1993 को शारजाह के रेगिस्तानी मैदान पर पाकिस्तान और श्रीलंका एक बार फिर आमने-सामने आए। एडिलेड के कारनामे को दोहराने के इरादे से रमीज राजा और सईद अनवर की जोड़ी दोबारा मैदान पर उतरी।
श्रीलंकाई गेंदबाजी आक्रमण के सामने ये दोनों बल्लेबाज चट्टान की तरह डट गए। उन्होंने न सिर्फ रन गति को बनाए रखा बल्कि फील्डरों को छकाते हुए खूबसूरत बाउंड्रीज जड़ीं। दोनों ओपनरों ने एक बार फिर एक ही पारी में शतक ठोकने की अद्भुत उपलब्धि हासिल की। पाकिस्तान की टीम ने पहली पारी में 3 विकेट के नुकसान पर 281 रन बनाए। मजबूत आधार मिलने के बाद पाकिस्तानी गेंदबाजों ने भी अपना काम बखूबी किया और टीम को श्रीलंका पर आसान व निर्णायक जीत दिलाई।
शारजाह 1993: कुछ ही महीनों में नई जोड़ी के साथ दोहराया गया इतिहास
शारजाह का मैदान उसी साल 30 अक्टूबर 1993 को एक बार फिर इस करिश्मे का गवाह बना। प्रतिद्वंद्वी टीम फिर से श्रीलंका थी, लेकिन इस बार पाकिस्तान की सलामी जोड़ी में एक बदलाव था। सईद अनवर के साथ पारी की शुरुआत करने उतरे आसिफ मुज्तबा।
सईद अनवर ने अपने स्वाभाविक आक्रामक अंदाज को जारी रखा, वहीं आसिफ मुज्तबा ने दूसरे छोर पर धैर्य और सूझबूझ का परिचय दिया। श्रीलंकाई गेंदबाजों के पास इस नई जोड़ी को तोड़ने की कोई काट नजर नहीं आ रही थी। दोनों बल्लेबाजों ने शानदार खेल दिखाते हुए व्यक्तिगत सैकड़े पूरे किए। इस दोहरी शतकीय साझेदारी के सहारे पाकिस्तान ने 3 विकेट के नुकसान पर 313 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया। पाकिस्तानी बल्लेबाजों के इस दबदबे के आगे श्रीलंका टिक नहीं पाई और पाकिस्तान ने एक बार फिर मुकाबले में एकतरफा जीत दर्ज की।
नैरोबी 1997: एसोसिएट राष्ट्र केन्या के ओपनरों ने रचा स्वर्णिम इतिहास
वनडे क्रिकेट के इस दुर्लभ रिकॉर्ड में एसोसिएट देशों का नाम भी बेहद गर्व के साथ शामिल है। 10 अक्टूबर 1997 को नैरोबी जिमखाना क्लब के मैदान पर केन्या और बांग्लादेश के बीच एकदिवसीय मैच खेला जा रहा था। घरेलू मैदान पर खेलते हुए केन्याई टीम के दो सलामी बल्लेबाजों दीपक और केनडी ओटिनो ने क्रिकेट जगत को चौंका दिया।
दीपक और केनडी ओटिनो ने बांग्लादेशी गेंदबाजी आक्रमण पर शुरू से ही कड़ा प्रहार किया। दोनों ने अपनी पारी को सूझबूझ और ताकतवर स्ट्रोक्स के साथ आगे बढ़ाते हुए शतक जमाए। दोनों सलामी बल्लेबाजों के शतकों की बदौलत केन्या ने 3 विकेट खोकर 347 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। 1997 के दौर में किसी एसोसिएट टीम द्वारा 347 रन बनाना एक असाधारण उपलब्धि थी। इस ऐतिहासिक पारी के दम पर केन्या ने बांग्लादेश के खिलाफ एक यादगार और बड़ी जीत हासिल कर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया।



















