करवा चौथ के आसपास सक्रिय लक्ष्मी नारायण राजयोग का महत्व और किन राशियों को मिलेगा इसका शुभ फलदीवाली पर कम बजट में घर लाएं ये किफायती सीएनजी गाड़ियां, 34 किलोमीटर से ज्यादा का माइलेजमणिपुर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध वसूली और नाकेबंदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायरनितीश भारद्वाज ने 'रामायण' में साई पल्लवी को सीता के रूप में स्वीकार करने पर फिर उठाई बातजीकैश में पांच दिनों की लगातार तेजी के बाद 1,373 डॉलर की अहम रुकावट पर नजर, ईटीएफ प्रवाह और डेरिवेटिव्स बाजार से मिला सहाराबिहार के मधुबनी से दबोचा गया हमीरपुर हत्याकांड का दूसरा आरोपी, सिर्फ तीन हजार के विवाद में ली थी मिस्त्री की जाननूंह के मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज में सुलह की कोशिश बेअसर, आगामी परीक्षाओं के बीच लगातार जारी रहा विद्यार्थियों का आंदोलनव्हीलचेयर पर सिमटी जिंदगी को खेलों में दी उड़ान, फरीदाबाद के प्रणव सूरमा की प्रेरणादायक कहानीव्हीलचेयर पर सिमटी जिंदगी को खेलों में दी उड़ान, फरीदाबाद के प्रणव सूरमा ने रचा इतिहासअमिताभ बच्चन के क्विज शो में गूंजा पलामू टाइगर रिजर्व का नाम, जानिए 1932 की पहली बाघ गणना से जुड़ा इसका गौरवशाली इतिहास
गुवाहाटी में 811 रनों की बरसात ने खड़े किए सवाल, क्या बेजान पिचों पर सिमट रहा है वनडे का असली रोमांचक्रिकेट
2 अक्तू॰ 2026, 12:25 pm (26 दिन पहले)· 1

गुवाहाटी में 811 रनों की बरसात ने खड़े किए सवाल, क्या बेजान पिचों पर सिमट रहा है वनडे का असली रोमांच

भारत और वेस्टइंडीज के दूसरे वनडे में बने 811 रनों के विशाल स्कोर ने पिचों की प्रकृति और खेल में गेंदबाजों की घटती भूमिका पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

गुवाहाटी के मैदान पर भारत और वेस्टइंडीज के बीच संपन्न हुए दूसरे एकदिवसीय मुकाबले ने क्रिकेट प्रेमियों के सामने एक गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। पूरे मुकाबले के दौरान ऐसा लगा मानो मैच न होकर बल्लेबाजों के लिए कोई खुला अभ्यास सत्र चल रहा हो, जहां गेंदबाजों की भूमिका महज गेंद फेंकने और चौके-छक्के देखने तक सीमित रह गई थी। दोनों पारियों को मिलाकर मैच में कुल 811 रन दर्ज हुए। एक दौर था जब पचास ओवरों के खेल में इतने विशाल योग का बनना किसी करिश्मे या ऐतिहासिक घटना से कम नहीं माना जाता था, मगर मौजूदा दौर में ऐसी घटनाएं आम बात बनती जा रही हैं। दर्शकों में कांटे के मुकाबले का रोमांच पैदा करने के बजाय इस तरह की बेतहाशा रनों की आतिशबाजी अब उन्हें थका देने वाले सिलसिले की तरह लगने लगी है। खेल के दौरान पिच के मिजाज को देखते हुए रवि शास्त्री ने इसे कमेंट्री बॉक्स से बिल्कुल सही रूप में नेशनल हाईवे पिच करार दिया था।

रनों के अंबार के बीच व्यक्तिगत चमक

इस मुकाबले में रनों के तूफान के बीच भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 223 रनों की एक यादगार पारी खेली। उनके बल्ले से निकले स्ट्रोक्स में लाजवाब टाइमिंग, फील्डरों के बीच सटीक प्लेसमेंट और क्रीज पर टिककर लंबी पारी खेलने की जबर्दस्त भूख साफ झलक रही थी। इसी लय को आगे बढ़ाते हुए रोहित शर्मा ने भी बड़ी सहजता के साथ 101 रनों का शतक पूरा किया। दूसरी तरफ वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी इकाई ने भी पीछे न रहते हुए तीन अलग-अलग बल्लेबाजों के शतकों के सहारे अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि, क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि ऐसे शीर्ष स्तर के बल्लेबाजों के हुनर की असली परख तब होती है जब उन्हें पिच और गेंदबाजों की तरफ से तीखी चुनौतियों का सामना करना पड़े। इस मुकाबले में न तो सतह पर किसी किस्म का उछाल या घुमाव था और न ही दोनों पक्षों के गेंदबाजों की ओर से कोई खास कड़ा प्रतिरोध देखने को मिला।

ये भी पढ़ें

बल्ले और गेंद का बिगड़ता संतुलन

इस एकतरफा मुकाबले पर अपनी बेबाक राय साझा करते हुए 1983 विश्व कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य और पूर्व मध्यम तेज गेंदबाज मदन लाल ने साफ शब्दों में कहा कि यह बेहद बोरिंग मैच था। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिल्कुल सपाट विकेट पर 800 से अधिक रन बने, जबकि गेंदबाजों के पास बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए पिच में कोई साधन मौजूद नहीं था। मदन लाल के अनुसार, खेल को संतुलित बनाए रखने के लिए गेंदबाजों को भी ऐसी अनुकूल परिस्थितियां मिलनी चाहिए जिनके दम पर वे मुकाबला बराबरी से लड़ सकें। जब तक दोनों पक्षों में जोरदार टक्कर नहीं होगी, तब तक खेल का असली लुत्फ गायब रहेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि एक आदर्श एकदिवसीय मुकाबला वह माना जाना चाहिए जहां प्रत्येक पारी का स्कोर 280 रन के इर्द-गिर्द सिमटे, क्योंकि दर्शक वही मैच चाव से देखते हैं जहां हर रन के लिए मैदान पर कड़ा संघर्ष देखने को मिले।

सपाट पिचों पर क्यूरेटर और टी20 की आक्रामकता

पिचों के मौजूदा स्वरूप को लेकर मदन लाल का कहना है कि क्यूरेटरों को इन पूरी तरह बेजान सतहों में जान फूंकने की जरूरत है, हालांकि वर्तमान हालात को देखते हुए उन्हें तुरंत ऐसा बदलाव होने की बहुत उम्मीद नजर नहीं आती। वहीं, दिल्ली के पूर्व तेज गेंदबाज संजीव शर्मा इस पूरे रुझान के पीछे फटाफट क्रिकेट यानी टी20 के गहरे प्रभाव को प्रमुख वजह करार देते हैं। उनका विश्लेषण है कि टी20 प्रारूप में टीमें नियमित रूप से 200 से अधिक रन बनाने की आदी हो चुकी हैं। बल्लेबाज उसी निडरता, आक्रामकता और आत्मविश्वास को 50 ओवर के मैच में भी लागू कर रहे हैं। इसी मानसिकता का परिणाम है कि आने वाले दिनों में टीमें एकदिवसीय मैचों में भी 400 से अधिक के लक्ष्य को आसानी से हासिल करती हुई दिखाई देंगी।

गेंदबाजी के गिरते स्तर पर गहरी चिंता

इस तरह के अत्यधिक स्कोर वाले मुकाबलों का एक चिंताजनक पहलू यह भी है कि यह चलन लंबे समय में गेंदबाजी की मूल गुणवत्ता को खत्म कर रहा है। संजीव शर्मा ने इस संकट पर मुहर लगाते हुए कहा कि कुलदीप यादव को छोड़कर दोनों ही टीमों में ऐसा कोई गेंदबाज नजर नहीं आया जो अपनी दम पर मैच का पासा पलट सके। मैच के दौरान भारतीय गेंदबाजी आक्रमण कुछ कमजोर जरूर दिखाई दिया, लेकिन वेस्टइंडीज के गेंदबाजी विभाग का स्तर तो बेहद साधारण और निराशाजनक रहा। जब गेंदबाज सिर्फ रन बचाने की लाचार कोशिश में लगे रहेंगे, तो नई प्रतिभाओं के सामने धारदार गेंदबाजी सीखने का मौका भी छिन जाएगा।

पचास ओवरों के प्रारूप के सामने पहचान का संकट

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में टी20 मुकाबलों की भरमार के बीच पचास ओवरों का प्रारूप अपने वजूद को बचाने के लिए जूझ रहा है। वनडे क्रिकेट का मूल आकर्षण यही रहा है कि यह खेल को उतार-चढ़ाव देखने, अलग-अलग सत्रों में रणनीतियां बदलने और मैच की कहानी को धीरे-धीरे गढ़ने का पूरा वक्त देता है। शुभमन गिल का यह दूसरा दोहरा शतक रिकॉर्ड की किताबों में हमेशा के लिए दर्ज तो हो जाएगा, परंतु बिना किसी कड़े प्रतिरोध और तीखी प्रतिस्पर्धा के बने कीर्तिमान लंबे समय में सिर्फ सांख्यिकी और आंकड़ों की गिनती बनकर रह जाते हैं। खेल की खूबसूरती तभी तक जिंदा है जब गेंद और बल्ले की जंग में दोनों तरफ बराबरी का दमखम दिखे।

सवाल-जवाब

गुवाहाटी में भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरे वनडे में कुल कितने रन बने?
इस मुकाबले में दोनों टीमों ने मिलकर कुल 811 रन बनाए।
इस मैच में शुभमन गिल ने कितने रनों की नाबाद पारी खेली?
भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 223 रनों की शानदार पारी खेली।
रवि शास्त्री ने गुवाहाटी की पिच को क्या नाम दिया?
रवि शास्त्री ने कमेंट्री के दौरान इस सपाट पिच को नेशनल हाईवे करार दिया।
मदन लाल के अनुसार एक आदर्श वनडे मैच में प्रत्येक पारी का स्कोर कितना होना चाहिए?
मदन लाल के मुताबिक एक आदर्श एकदिवसीय मुकाबले में प्रत्येक पारी का स्कोर 280 रन के आसपास होना चाहिए।
संजीव शर्मा ने 400 से अधिक के वनडे स्कोरों के पीछे किस मुख्य कारण को जिम्मेदार ठहराया?
संजीव शर्मा ने टी20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव और बल्लेबाजों के आक्रामक आत्मविश्वास को इसका मुख्य कारण बताया।
संजीव शर्मा के अनुसार मुकाबले में दोनों टीमों की तरफ से कौन सा एकमात्र गेंदबाज प्रभावी था?
संजीव शर्मा के अनुसार कुलदीप यादव को छोड़कर दोनों में से किसी भी टीम के पास कोई मैच-विजेता गेंदबाज नहीं था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp