घरेलू क्रिकेट में एक बड़ा प्रशासनिक फैसला देखने को मिला है, जहां कानूनी विवादों से घिरे तेज गेंदबाज यश दयाल की राज्य स्तरीय टीम में वापसी की राह खुल गई है। दुष्कर्म और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण कानून यानी पॉक्सो के तहत दो अलग-अलग मामलों का सामना करने के बावजूद इस खिलाड़ी को उत्तर प्रदेश के रणजी ट्रॉफी तैयारी शिविर में शामिल कर लिया गया है। इस कदम के बाद घरेलू क्रिकेट जगत में विभिन्न चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राज्य संघ की ओर से चयन की पात्रता स्पष्ट
उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकित चटर्जी ने स्पष्ट किया है कि आगामी सत्र के दौरान राज्य की टीम के लिए यश दयाल चयन के हकदार रहेंगे। यह निर्णय इसलिए भी ध्यान आकर्षित कर रहा है क्योंकि साल 2025 के अगस्त महीने में इसी राज्य निकाय ने सख्त कदम उठाया था। उस वक्त दोनों राज्यों में मामले दर्ज होने के बाद उन्हें यूपी टी20 लीग की प्रतियोगिता से निष्कासित कर दिया गया था।
दूसरे राज्य जाने की तैयारी और बोर्ड का दखल
लीग से हटाए जाने और घरेलू प्रतियोगिताओं से दूरी बनने के बाद तेज गेंदबाज के खेल जीवन पर अनिश्चितता के बादल छा गए थे। इस स्थिति से निकलने के लिए उन्होंने अन्यत्र खेलने की योजना बनाई और उत्तर प्रदेश क्रिकेट बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध किया, ताकि वह छत्तीसगढ़ की ओर से घरेलू क्रिकेट प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा ले सकें। इसके पश्चात एसोसिएशन के शीर्ष पदाधिकारियों ने खिलाड़ी से संवाद स्थापित किया और आश्वासन दिया कि उन्हें राज्य की ओर से खेलने का अवसर प्रदान किया जाएगा। इसी प्रशासनिक आश्वासन के चलते उन्होंने टीम परिवर्तन की अपनी अर्जी आगे नहीं बढ़ाई।
गाजियाबाद में दर्ज हुआ था पहला आपराधिक प्रकरण
इस तेज गेंदबाज की न्यायिक परेशानियां वर्ष 2025 के जुलाई माह में प्रारंभ हुईं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद में उनके विरुद्ध पहली प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसमें एक महिला ने विवाह का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप मढ़ा था। शिकायतकर्ता का तर्क था कि दोनों के बीच लगभग पांच वर्षों से व्यक्तिगत संबंध थे। दूसरी ओर, गेंदबाज ने इन सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि यह सब कुछ दोनों की रजामंदी से था। खिलाड़ी के अनुसार, आईपीएल से पहचान मिलने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से ब्लैकमेल करने और धन ऐंठने की नीयत से यह शिकायत गढ़ी गई थी।
जयपुर में नाबालिग से जुड़े गंभीर आरोप
पहले प्रकरण की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ ही रही थी कि राजस्थान के जयपुर में एक अन्य प्राथमिकी दर्ज हो गई। यह मामला पॉक्सो कानून के तहत दर्ज होने के कारण अधिक गंभीर श्रेणी में आ गया। इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि साल 2023 और अप्रैल 2025 के दौरान एक नाबालिग पीड़िता का निरंतर यौन उत्पीड़न किया गया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान अगस्त 2025 में राजस्थान उच्च न्यायालय ने किसी भी प्रकार की न्यायिक राहत देने अथवा गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करने की याचिका को खारिज कर दिया था।
न्यायिक प्रक्रिया में आंशिक रोक और मौजूदा स्थिति
इस वर्ष जुलाई के दौरान खिलाड़ी को गाजियाबाद से जुड़े मामले में तात्कालिक विधिक राहत प्राप्त हुई थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी की पीठ ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर स्थगन आदेश पारित किया था। हालांकि यह राहत केवल प्रक्रियागत रोक तक सीमित है। किसी भी न्यायिक मंच ने खिलाड़ी को इन गंभीर आरोपों से बरी नहीं किया है और दोनों मुकदमे अभी भी अदालती विचार के अधीन हैं।



















