इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले वेस्ट बंगाल के युवा क्रिकेटर अभिषेक पोरेल की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक मेडिकल छात्रा द्वारा लगाए गए दुष्कर्म, अवैध रूप से बंधक बनाने और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोपों के सिलसिले में अदालत ने क्रिकेटर को कोई राहत देने से मना कर दिया है। हुगली जिले की चिनसुरा अदालत ने शुक्रवार को अभिषेक पोरेल की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद पुलिस आरोपी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराने की प्रक्रिया में जुट गई है।
अदालती कार्यवाही और जमानत याचिका पर सुनवाई
अदालत में पेशी से पहले पुलिस प्रशासन की ओर से अभिषेक पोरेल का अनिवार्य मेडिकल परीक्षण पूरा कराया गया। इसके उपरांत उन्हें चिनसुरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने क्रिकेटर को जमानत देने के पक्ष में अपनी दलीलें रखीं, जबकि अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और जांच के महत्वपूर्ण चरण में होने का हवाला देते हुए कड़ा विरोध किया। दोनों पक्षों के बीच चली तीखी बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने पुलिस की दलीलों को स्वीकार कर लिया और आरोपी को 14 दिनों की जुडिशल कस्टडी में भेजने का फैसला सुनाया। मामले की जानकारी देते हुए हुगली ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक कुनार भूषण सिंह ने कहा, "कानून के मुताबिक आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया है।"
मेडिकल छात्रा के गंभीर आरोप और दिल्ली की घटना
यह पूरा आपराधिक मामला पीड़िता की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी के आधार पर सामने आया है। पीड़िता, जो एक मेडिकल छात्रा है, उसने अभिषेक पोरेल पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया है। छात्रा के अनुसार, दोनों के परिवारों के बीच विवाह को लेकर शुरुआती बातचीत भी हुई थी, लेकिन बाद में जब उसे क्रिकेटर के अन्य महिलाओं के साथ संबंधों के बारे में पता चला तो उनके रिश्तों में कड़वाहट आ गई। पीड़िता का दावा है कि संबंध टूटने के बाद आरोपी ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
प्राथमिकी में एक बेहद संगीन घटनाक्रम दिल्ली से जुड़ा हुआ दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 2 अप्रैल 2026 को दिल्ली में उसे एक स्थान पर गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाकर रखा गया था। इस दौरान कई दिनों तक उसे भोजन नहीं दिया गया और बाहरी दुनिया से पूरी तरह संपर्क काट दिया गया। प्रताड़ना और भूख के कारण उसकी शारीरिक हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उसके लिए चलना-फिरना भी बेहद कठिन हो गया था।
19 बीएनएस धाराएं और हाईकोर्ट का कड़ा रुख
हुगली ग्रामीण पुलिस ने प्राथमिकी और बयानों की गहन समीक्षा के बाद अभिषेक पोरेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की 19 अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें से अधिकांश धाराएं गैर-जमानती श्रेणी की हैं। पुलिस ने पूछताछ के सिलसिले में क्रिकेटर को बुलाया था, जिसके बाद 11 अगस्त को उन्हें हिरासत में लिया गया और बुधवार देर रात आधिकारिक तौर पर गिरफ्तारी दर्ज की गई।
यह मामला निचली अदालत में पहुंचने से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष भी उठा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने मोगरा थाना पुलिस को सख्त हिदायत दी थी। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि क्रिकेटर के मोबाइल फोन सहित तमाम इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को तत्काल जब्त किया जाए और निष्पक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। 11 अगस्त की सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन ने हाईकोर्ट को सूचित कर दिया था कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
फॉरेंसिक जांच और क्रिकेट करियर पर मंडराता खतरा
अभिषेक पोरेल के 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जाने के बाद अब पुलिस उनकी चैट हिस्ट्री और डिजिटल साक्ष्यों को हासिल करने के लिए जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक लैब में जांच कराने जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट से ब्लैकमेलिंग और धमकियों से जुड़े अहम सबूत जुटाए जाने की उम्मीद है। इतने संगीन आपराधिक मामले में नाम आने और जेल जाने से इस युवा क्रिकेटर के खेल करियर पर अनिश्चितता के काले बादल छा गए हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि बचाव पक्ष उच्च अदालत में जमानत के लिए कब अपील करता है।



















