पाकिस्तान क्रिकेट टीम इस समय बड़े संकट और अजीबोगरीब हालातों से गुजर रही है, जहां हाल ही में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने सात खिलाड़ियों को इंग्लैंड के दौरे से बीच में ही वापस देश बुला लिया है। वैसे तो किसी विदेशी दौरे पर लगातार दो टेस्ट मैच गंवाना पाकिस्तान के लिए कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार खिलाड़ियों के साथ-साथ कोचिंग स्टाफ की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा ही बड़ा कदम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई भी उठा चुका है, जब इंग्लैंड दौरे पर गई टीम इंडिया का पूरा कोचिंग स्टाफ रातों-रात बदल दिया गया था।
साल 2014 के इंग्लैंड दौरे पर क्या हुआ था
यह वाकया साल 2014 के इंग्लैंड दौरे का है, जहां पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। सीरीज का पहला मुकाबला ड्रॉ रहने के बाद भारत ने ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर दूसरा टेस्ट मैच 95 रनों से जीतकर शानदार वापसी की उम्मीद जगाई थी। लेकिन इसके बाद के तीनों टेस्ट मुकाबलों में भारतीय टीम को बेहद शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। द ओवल में खेला गया आखिरी टेस्ट मैच तो भारत पारी और 244 रनों के बड़े अंतर से महज तीन दिन के भीतर ही हार गया था। इस खराब प्रदर्शन के बाद बीसीसीआई ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन हेड कोच डंकन फ्लेचर और उनके पूरे कोचिंग स्टाफ के पर कतरने का फैसला किया।
रवि शास्त्री की एंट्री और सपोर्ट स्टाफ में बड़े बदलाव
इस पूरी उथल-पुथल के बीच सीरीज खत्म होने से ठीक एक रात पहले कप्तान एमएस धोनी और हेड कोच डंकन फ्लेचर को एक कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए यह सूचना दी गई कि रवि शास्त्री को टीम डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। शास्त्री को 19 अगस्त 2014 को आगामी वनडे सीरीज के लिए यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। फ्लेचर के अधिकारों को सीमित करते हुए उनके दोनों सहयोगियों यानी फील्डिंग कोच ट्रेवर पेनी और बॉलिंग कोच जो डॉस को उनके पदों से हटा दिया गया। उनकी जगह पूर्व भारतीय ऑलराउंडर संजय बांगर और पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज भरत अरुण को असिस्टेंट कोच के रूप में इंग्लैंड भेजा गया, जबकि हैदराबाद के पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर आर. श्रीधर को वनडे सीरीज के लिए नया फील्डिंग कोच नियुक्त किया गया।
बदलाव के बाद कैसा रहा था टीम का प्रदर्शन
टेस्ट सीरीज में शर्मनाक हार झेलने वाली भारतीय टीम ने वनडे सीरीज में धमाकेदार वापसी करते हुए आलोचकों को करारा जवाब दिया। भारत ने वह वनडे सीरीज 3-1 से अपने नाम की। सीरीज समाप्त होने के बाद रवि शास्त्री ने डंकन फ्लेचर का खुलकर समर्थन किया और स्पष्ट किया कि फ्लेचर ही हेड कोच बने रहेंगे तथा उनका मुख्य काम टीम के समग्र क्रिकेट ऑपरेशंस की देखरेख करना होगा। साल 2014 का यह घटनाक्रम भारतीय क्रिकेट के लिहाज से बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इसके बाद टीम इंडिया में शास्त्री की भूमिका लगातार बढ़ती चली गई और अंततः उन्हें साल 2017 में भारतीय टीम का पूर्णकालिक हेड कोच बना दिया गया।
पाकिस्तान और भारत के मामलों में क्या था फर्क
हालांकि, बीसीसीआई और पीसीबी के इन फैसलों में एक बड़ा अंतर साफ तौर पर देखा जा सकता है। बीसीसीआई ने टेस्ट सीरीज पूरी होने के बाद सीरीज के नतीजों की समीक्षा करते हुए यह कड़ा कदम उठाया था, जबकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने तो टेस्ट सीरीज के बीच में ही अपने हेड कोच को साइडलाइन करते हुए वाइट बॉल फॉर्मेट के कोच माइक हेसन को तुरंत इंग्लैंड बुला लिया है। इसके अलावा पाकिस्तानी खेमे में खिलाड़ियों द्वारा चोट या अन्य बहानों से मैच खेलने से बचने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जो इस पूरे विवाद को और अधिक पेचीदा बना देती हैं।


















