राजस्थान के छोटे से गांव से निकलकर क्रिकेट की पिच पर अपने हुनर का जलवा बिखेरने का ख्वाब देखने वाली उर्मिला कुमारी चौधरी की संघर्ष गाथा अडिग हौसले और दृढ़ संकल्प की एक बेहतरीन दास्तान है। सिरोही जिले के रेवदर उपखंड के अंतर्गत आने वाले पोसीतरा गांव की रहने वाली उर्मिला ने उस दकियानूसी मानसिकता को कड़ी चुनौती दी है, जिसमें आज भी ग्रामीण इलाकों में बेटियों के लिए खेलकूद के रास्ते आसान नहीं समझे जाते हैं। एक समय ऐसा भी था जब लोगों ने उन्हें मैदान पर खेलने को लेकर तरह-तरह के ताने कसे और उनके परिवार को भी सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उर्मिला ने अपने हाथों से विकेटकीपिंग ग्लव्स नहीं छोड़े और हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया।
भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी की शानदार विकेटकीपिंग शैली से प्रेरणा पाकर इस खेल की शुरुआत करने वाली उर्मिला पिछले चार साल से लगातार इस खेल के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर मेहनत कर रही हैं। अपने इसी सपने को एक नई ऊंचाई और प्रोफेशनल स्तर पर ले जाने के लिए वह वर्तमान में पुणे की एक प्रतिष्ठित क्रिकेट एकेडमी में कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। सबसे खास बात यह है कि घर से दूर दूसरे शहर में ट्रेनिंग लेने के बावजूद उनका अपनी माटी और जड़ों से गहरा जुड़ाव आज भी पूरी तरह कायम है। उर्मिला अपनी खेल प्रतिभा के दम पर जिला स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में सिरोही का शानदार प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं तथा जयपुर व अलवर में जिले की टीम की ओर से कई महत्वपूर्ण मैच खेल चुकी हैं। इसके अलावा जून 2024 में आयोजित हुई चैलेंजर्स ट्रॉफी में भी उन्होंने अपनी खेल कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया था।
टेलीविज़न पर मैच देखते-देखते जागा क्रिकेट का शौक
क्रिकेट के प्रति अपने लगाव के बारे में बात करते हुए उर्मिला बताती हैं कि इस खेल से उनका परिचय कक्षा 11 में पढ़ाई के दौरान हुआ था। उन दिनों वह अपनी मौसी के बेटे के साथ बैठकर टेलीविजन पर क्रिकेट के मुकाबले देखा करती थीं। इसी दौरान महेंद्र सिंह धोनी की फुर्ती और विकेट के पीछे उनके अद्वितीय अंदाज ने उनके दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी। धोनी के काम करने के तरीके और खेल के प्रति समर्पण को देखकर उन्होंने भी तय कर लिया कि उन्हें क्रिकेट के मैदान पर कुछ बड़ा करके दिखाना है। उनके इस सफर की शुरुआत कॉलेज स्तर के टूर्नामेंटों से हुई थी। धीरे-धीरे खेल के प्रति उनका यह शौक एक बड़े जुनून में तब्दील हो गया और उन्होंने मैदान पर नियमित अभ्यास करना शुरू कर दिया। पिछले लगभग चार वर्षों से उर्मिला लगातार मैदान पर घंटों पसीना बहा रही हैं और अपनी तकनीक को सुधारने में जुटी हुई हैं।
ग्रामीण परिवेश की रूढ़िवादी सोच बनी सबसे बड़ी बाधा
उर्मिला के लिए यह पूरा सफर सिर्फ खेल के मैदान तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें समाज की पुरानी और संकीर्ण सोच के खिलाफ भी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। ग्रामीण माहौल में लोगों ने उन्हें क्रिकेट खेलते देखा तो तरह-तरह की फब्तियां कसीं और ताने मारे। उनसे यहाँ तक कहा गया कि लड़कियों का असली काम घर-गृहस्ती संभालना, घास काटना और मवेशियों के लिए गोबर उठाना है, न कि क्रिकेट के मैदान पर समय बर्बाद करना। लोगों ने यह ताना भी दिया कि इस तरह क्रिकेट खेलने वाली लड़की से भविष्य में शादी कौन करेगा। शुरुआती दौर में उनका परिवार भी समाज की इन बातों से थोड़ा प्रभावित हुआ और उर्मिला के क्रिकेट खेलने के फैसले के पक्ष में नहीं था। हालांकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी। पास के ही उड़वारिया गांव में फुटबॉल खेलने वाली कुछ अन्य लड़कियों का जीवंत उदाहरण देकर उन्होंने अपने परिवार को समझाया कि आज के दौर में बेटियां खेल के क्षेत्र में भी लड़कों से पीछे नहीं हैं और मुकद्दर बदल सकती हैं।
परिजनों का समर्थन और भविष्य का बुलंद हौसला
जिस परिवार को कभी समाज की आलोचनाओं और दबी जुबान से होने वाली बातों की सबसे ज्यादा चिंता सताती थी, वही आज उर्मिला की सबसे बड़ी ताकत बनकर उनके साथ खड़ा है। अपने सपनों को सही दिशा देने के लिए वह इस समय पुणे की क्रिकेट एकेडमी में विशेष प्रशिक्षण ले रही हैं। इसके साथ ही वह सिरोही जिले की टीम की नुमाइंदगी करना भी जारी रखे हुए हैं। उर्मिला का स्पष्ट तौर पर यह मानना है कि क्रिकेट उनके लिए महज़ एक खेल नहीं है, बल्कि समाज में अपनी खुद की एक अलग पहचान बनाने का बहुत बड़ा जरिया है। उनका मुख्य लक्ष्य सिरोही के साथ-साथ पूरे राजस्थान राज्य का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है। वह दृढ़ता से कहती हैं कि शादी के बाद भी उनका यह खेल और मैदान कभी छूटेगा नहीं। उर्मिला की यह प्रेरक कहानी उन तमाम बेटियों के लिए एक मजबूत संदेश है, जिन्हें अक्सर सामाजिक पाबंदियों और रूढ़ियों के कारण अपने सपनों का गला घोंटना पड़ता है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि अगर इरादे फौलादी हों तो हर ताने का करारा जवाब मैदान पर अपने प्रदर्शन से दिया जा सकता है और समाज की पुरानी बेड़ियों को भी विकेट की तरह आसानी से स्टंप आउट किया जा सकता है।



















