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उत्तराखंड के आठ जिलों में मौसम का कड़ा पहरा, भारी बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्टउत्तराखंड
1 सित॰ 2026, 10:08 am (53 मिनट पहले)· 2

उत्तराखंड के आठ जिलों में मौसम का कड़ा पहरा, भारी बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट

उत्तराखंड में मानसून के तेवर तीखे बने हुए हैं और मौसम विभाग ने राज्य के आठ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। खराब मौसम के मद्देनजर कई इलाकों में स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय होने के बाद से लगातार मौसमी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। प्रदेश के पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार और रुद्रप्रयाग जैसे इलाकों में पहले ही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है, जिससे कई मार्ग पानी में डूब गए हैं और कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के कई क्षेत्रों के लिए अत्यधिक बारिश का नया अलर्ट जारी किया है, जिसके साथ ही तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है।

देहरादून और टिहरी में सबसे ज्यादा असर की आशंका

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, देहरादून और टिहरी जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इन दोनों ही क्षेत्रों में बादलों की गरज के साथ तीव्र दौर आने और बिजली कड़कने के आसार हैं। इसके अतिरिक्त पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल और हरिद्वार जिलों में भी झमाझम बारिश का अनुमान जताया गया है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है और तेज बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा।

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राजधानी देहरादून का हाल और शैक्षणिक संस्थानों पर निर्णय

पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार वर्षा के कारण देहरादून के कई हिस्सों में जल स्रोत उफान पर चल रहे हैं। बीते दिनों रिस्पना और सुसुवा नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने से आसपास की बस्तियों में पानी भर गया था। मौसम विभाग के अनुसार आज भी देहरादून में तेज हवाओं और गरज के साथ भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जिससे तापमान में कमी आने की उम्मीद है और अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों में एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है।

यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए चेतावनी

बारिश के इस दौर के चलते पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन होने, रास्तों के बंद होने और निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हाल के दिनों में भी कई मार्ग अवरुद्ध हुए हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे प्रदेश में एक साथ छुट्टी का आदेश देने के बजाय स्थानीय हालात के आधार पर जिला स्तर पर निर्णय लिए जा रहे हैं। ऐसे में जो लोग पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे मौसम की स्थिति की पूरी जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा शुरू करें।

सवाल-जवाब

उत्तराखंड में मौसम विभाग ने किन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है?
मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल और हरिद्वार में भारी बारिश का अनुमान जताया है।
देहरादून में तापमान कितना रहने की संभावना है?
देहरादून में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
क्या उत्तराखंड में स्कूलों की छुट्टी की घोषणा की गई है?
हाँ, देहरादून जिला प्रशासन ने खराब मौसम के चलते कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों में एक दिन की छुट्टी के आदेश जारी किए हैं।
किन नदियों का जलस्तर हाल ही में अचानक बढ़ा था?
देहरादून की रिस्पना और सुसुवा नदी का जल स्तर अचानक बढ़ गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 मिनट पहले

यह आपदा प्रबंधन अधिनियम और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक संवेदनशील स्थिति है। जब मौसम विभाग भारी बारिश और आकाशीय बिजली का रेड या ओरेंज अलर्ट जारी करता है, तो जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों को बंद करना और नदियों के उफनते जलस्तर पर नजर रखना प्राथमिक सुरक्षा कदम है। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में आपातकालीन सेवाओं, रेस्क्यू टीमों और आपदा प्रबंधन तंत्र की जमीनी तैयारियों की वास्तविक समीक्षा करना आवश्यक हो जाता है ताकि जनहानि को टाला जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·25 मिनट पहले

यह प्रशासनिक सतर्कता का मामला है। पर्वतीय राज्यों में मानसून के दौरान नदियों का अचानक उफनाना और भूस्खलन होना बड़ी चुनौती है। जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों में अवकाश और स्थानीय स्तर पर लिए जा रहे निर्णय समय पर उठाए गए कदम हैं, लेकिन यात्रा मार्गों पर त्वरित बहाली और संवेदनशील बस्तियों में जल निकासी के पुख्ता इंतजाम ही असल परीक्षा है।

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