खेल के मैदान पर कई बार कुछ ऐसे वाकये सामने आते हैं जो जीत या हार से कहीं ज्यादा बड़े साबित होते हैं और हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाते हैं। क्रिकेट के लंबे सफर में कई ऐसे पल आए हैं जहां खिलाड़ियों ने अपनी जीत से ज्यादा खेल के उसूलों और मर्यादा को प्राथमिकता दी है। ऐसी ही एक बेहद चर्चित और भावनात्मक घटना वेस्टइंडीज के महान तेज गेंदबाज कोर्टनी वॉल्श से जुड़ी है, जिनके एक फैसले ने खेल जगत को हैरान कर दिया था और उनकी अपनी टीम को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।
1987 के वर्ल्ड कप का रोमांचक मुकाबला
तारीख 16 अक्टूबर 1987 थी और मुकाबला लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेला जा रहा था। यह रिलायंस वर्ल्ड कप का नौवां मैच था, जिसमें पाकिस्तान की भिड़ंत डिफेंडिंग रनर-अप वेस्टइंडीज के साथ हो रही थी। मैच अपने अंतिम और बेहद तनावपूर्ण दौर में पहुंच चुका था। पाकिस्तान को जीत हासिल करने के लिए आखिरी ओवर में चौदह रनों की आवश्यकता थी और उसके पास केवल एक विकेट बचा हुआ था। मैदान पर क्रीज पर अब्दुल कादिर मौजूद थे जबकि नॉन-स्ट्राइकर छोर पर सलीम जाफर खड़े थे। वेस्टइंडीज की तरफ से पारी का आखिरी ओवर फेंकने की जिम्मेदारी दिग्गज तेज गेंदबाज कोर्टनी वॉल्श के कंधों पर थी।
आखिरी ओवर का नाटकीय घटनाक्रम
लेग स्पिनर अब्दुल कादिर ने समझदारी से बल्लेबाजी करते हुए ओवर की शुरुआती पांच गेंदों पर बारह रन बटोर लिए थे। अब आखिरी गेंद पर पाकिस्तान को जीत के लिए दो रनों की दरकार थी और वेस्टइंडीज को सिर्फ एक विकेट की जरूरत थी। सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए यह गेंद दोनों पक्षों के लिए निर्णायक बन चुकी थी। कोर्टनी वॉल्श गेंदबाजी के लिए दौड़े, लेकिन जैसे ही वे अंपायर के पास पहुंचे, उन्होंने अचानक अपने कदम रोक लिए। उन्होंने गौर किया कि नॉन-स्ट्राइकर छोर पर खड़े सलीम जाफर गेंद डिलीवर होने से पहले ही क्रीज छोड़कर काफी आगे निकल आए थे।
मंकडिंग के नियम और कोर्टनी वॉल्श का फैसला
क्रिकेट के नियमों के मुताबिक कोर्टनी वॉल्श के पास यह पूरा अधिकार था कि वे गिल्लियां बिखेरकर सलीम जाफर को रन आउट कर देते। यदि वे ऐसा कदम उठाते तो वेस्टइंडीज मुकाबला जीत जाती और सेमीफाइनल की दौड़ में बनी रहती, लेकिन उन्होंने नियम का सहारा लेने के बजाय एक अलग ही मिसाल पेश की। उन्होंने सलीम जाफर को आउट करने के बजाय केवल चेतावनी दी और मुस्कुराते हुए अपने रन-अप की तरफ वापस लौट गए। यह क्रिकेट के इतिहास में खेल भावना का एक ऐसा उदाहरण था जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है।
मैच का अंत और वेस्टइंडीज की विदाई
चेतावनी देने के बाद कोर्टनी वॉल्श ने जब अपनी आखिरी गेंद फेंकी, तो अब्दुल कादिर ने उस पर तेजी से दो रन दौड़ लिए और पाकिस्तान को एक विकेट से रोमांचक जीत दिला दी। इस पराजय के साथ ही दो बार की पूर्व वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज टीम टूर्नामेंट के ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई। क्रिकेट इतिहास में यह पहला मौका था जब वेस्टइंडीज की टीम वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाई थी। टीम के कप्तान विव रिचर्ड्स इस हार से इतने निराश हुए कि वे मैदान पर काफी देर तक अकेले लेटे रहे और आसमान की ओर ताकते रहे।
सम्मान और खेल भावना की अमर दास्तान
भले ही उस मुकाबले में वेस्टइंडीज को हार का सामना करना पड़ा और उनका वर्ल्ड कप का सफर थम गया, लेकिन कोर्टनी वॉल्श के उस बर्ताव ने उन्हें खेल का सच्चा जेंटलमैन बना दिया। मैच के बाद पाकिस्तान के खेलप्रेमियों और वहां की सरकार ने उनकी इस दरियादिली की जमकर तारीफ की। पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जिया-उल-हक ने कोर्टनी वॉल्श को इस खेल भावना के लिए एक विशेष पदक और कालीन भेंट कर सम्मानित किया था। यह वाकया आज भी इस बात की गवाही देता है कि खेल केवल रनों और आंकड़ों का मोहताज नहीं है, बल्कि यह उसूलों और आपसी सम्मान पर भी टिका होता है। कोर्टनी वॉल्श के उस एक फैसले ने वेस्टइंडीज को ट्रॉफी से भले दूर कर दिया हो, लेकिन खेल के इतिहास में उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया।



















