क्रिकेट के मैदान पर बल्लेबाज का शॉट और गेंद का सीमा रेखा पार जाना रोमांचक होता है, लेकिन जब कोई खिलाड़ी मैदान या ड्रेसिंग रूम में अपना आपा खो बैठता है, तो उसका असर उसके पूरे भविष्य पर पड़ सकता है। बात जब टीम के कप्तान या भावी कप्तान से विवाद की हो, तो मामला और भी अधिक गंभीर हो जाता है। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा ही वाकया दर्ज है, जो यह स्पष्ट करता है कि खेल के इस प्रारूप में कप्तान की स्थिति और उसकी पसंद-नापसंद कितनी अधिक मायने रखती है।
सिडनी टेस्ट की जीत और ड्रेसिंग रूम का विवाद
जनवरी 2009 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड यानी एससीजी में ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका को पराजित किया था। मैच के बाद की स्थापित परंपरा के तहत ड्रेसिंग रूम में टीम का पारंपरिक गान "अंडर द सदर्न क्रॉस आई स्टैंड" गाया जाना तय था। उस समय इस गाने को गाने की जिम्मेदारी माइकल हसी को सौंपी गई थी। हालांकि, उसी शाम माइकल क्लार्क का अपनी तत्कालीन मंगेतर लारा बिंगल के साथ डिनर का कार्यक्रम पहले से तय था। क्लार्क चाहते थे कि माइकल हसी जल्द से जल्द गाना पूरा करें ताकि वह वहां से रवाना हो सकें। इसके विपरीत, माइकल हसी और साइमन कैटिच समेत अन्य सीनियर खिलाड़ी किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में बिल्कुल नहीं थे। वे ऐतिहासिक जीत का आनंद लेना चाहते थे और अपनी टीम की परंपरा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं थे।
जब कॉलर पकड़ने तक पहुंच गई बात
माइकल क्लार्क द्वारा बार-बार जल्दी करने का दबाव बनाने और कथित तौर पर कुछ अनुचित शब्दों का इस्तेमाल करने पर साइमन कैटिच का धैर्य जवाब दे गया। गुस्से में आकर कैटिच ने क्लार्क को दीवार की तरफ धकेल दिया और उनका कॉलर पकड़ लिया। मौके पर मौजूद अन्य खिलाड़ियों ने तुरंत बीच-बचाव किया और दोनों को अलग किया, जिससे मामला शांत हुआ। हालांकि माइकल क्लार्क उस रात वहां से चले गए, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के इन दो बड़े खिलाड़ियों के बीच पड़ी वह दरार कभी पूरी तरह भर नहीं सकी और समय के साथ और गहरी होती चली गई।
शानदार फॉर्म के बावजूद करियर का अंत
इस विवाद के सामने आने के समय साइमन कैटिच अपने खेल के सर्वश्रेष्ठ दौर से गुजर रहे थे। मैथ्यू हेडन के अंतरराष्ट्रीय संन्यास के बाद उन्होंने पारी की शुरुआत करते हुए अपनी खास जगह बना ली थी। साल 2008 से 2010 के बीच के अंतराल में कैटिच ने लगभग 58 के शानदार औसत से रन बनाए थे। वर्ष 2011 में रिकी पोंटिंग के कप्तानी पद छोड़ने के बाद माइकल क्लार्क को ऑस्ट्रेलिया का नया कप्तान नियुक्त किया गया। इसके तुरंत बाद क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए कैटिच को केंद्रीय अनुबंध से बाहर का रास्ता दिखा दिया। कुल 56 टेस्ट मैचों में 4,188 रन बनाने वाले इस खिलाड़ी को इसके बाद कभी भी ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने का अवसर नहीं मिला।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आरोप और आत्मकथा का सच
अनुबंध से बाहर किए जाने के बाद साइमन कैटिच ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपना तीखा गुस्सा सार्वजनिक किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया था कि सिडनी के ड्रेसिंग रूम में माइकल क्लार्क के साथ हुई उनकी झड़प के कारण ही उन्हें टीम से बाहर किया गया है। कैटिच का दृढ़ विश्वास था कि जब तक माइकल क्लार्क टीम के कप्तान हैं, तब तक उनका राष्ट्रीय टीम में वापसी करना पूरी तरह असंभव है और आखिरकार ऐसा ही साबित हुआ। हालांकि, कई साल बीत जाने के बाद माइकल क्लार्क ने अपनी आत्मकथा ‘माई स्टोरी’ में इस घटना का जिक्र करते हुए इसे स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि साइमन कैटिच का क्रिकेट करियर खत्म होने के पीछे उन्हीं का हाथ था।



















