बेंगलुरु के मैदान पर खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के एक अहम सेमीफाइनल मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी से सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। ईस्ट जोन की तरफ से खेलते हुए इस पंद्रह वर्षीय खिलाड़ी ने सेंट्रल जोन के खिलाफ मैदान पर शानदार प्रदर्शन किया और शतक के बेहद करीब पहुंच गए। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने मैदान के हर कोने में बेहतरीन शॉट लगाए और विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, वह अपने इस शानदार प्रदर्शन को शतक में तब्दील करने से केवल आठ रन दूर रह गए और नब्बे के स्कोर पर अपना विकेट गंवा बैठे।
सचिन तेंदुलकर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी से चुके
अगर वैभव सूर्यवंशी इस मैच में आठ रन और बनाने में सफल हो जाते, तो वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शतक जड़ने वाले देश के दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल कर लेते। वर्तमान में यह खास उपलब्धि महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज है, जिन्होंने वर्ष 1988 में रणजी ट्रॉफी के दौरान मात्र पंद्रह वर्ष और दो सौ तीस दिन की उम्र में अपने करियर का पहला प्रथम श्रेणी शतक पूरा किया था। इसके अलावा, देश की घरेलू क्रिकेट में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का कुल रिकॉर्ड ध्रुव पांडोव के नाम दर्ज है, जिन्होंने 1988 में ही केवल चौदह वर्ष और दो सौ तिरानबे दिन की उम्र में यह कमाल करके दिखाया था।
दलीप ट्रॉफी में रचा एक नया इतिहास
भले ही वह अपने पहले प्रथम श्रेणी शतक से चूक गए हों, लेकिन इस युवा खिलाड़ी ने मैच के दौरान एक नया इतिहास जरूर रच दिया। वह दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अर्धशतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उनकी इस शानदार पारी का अंत गेंदबाज हर्ष दुबे की गेंद पर हुआ, जब वह डीप मिड-विकेट बाउंड्री के ऊपर से बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में सीमा रेखा के पास कैच आउट हो गए। इस विकेट ने सेंट्रल जोन को मैच में एक बड़ी राहत दिलाई जिसकी उन्हें तलाश थी, जैसा कि बीसीसीआई घरेलू क्रिकेट के आधिकारिक मंच पर साझा किए गए स्कोरकार्ड से भी स्पष्ट होता है।
पहले भी तोड़ चुके हैं बड़े रिकॉर्ड
यह पहला मौका नहीं है जब इस युवा खिलाड़ी का नाम दिग्गज बल्लेबाजों के साथ जोड़ा गया हो। इससे पहले वह सचिन तेंदुलकर का एक बड़ा रिकॉर्ड पहले ही अपने नाम कर चुके हैं। इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए एक टी-20 मुकाबले में पंद्रह वर्ष और निन्यानवे दिन की उम्र में मैदान पर उतरकर उन्होंने भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। इसके विपरीत, सचिन ने वर्ष 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ सोलह वर्ष और दो सौ पांच दिन की उम्र में अपना टेस्ट पदार्पण किया था, जिसे यह युवा खिलाड़ी पहले ही पीछे छोड़ चुका है।



















