भारतीय क्रिकेट जगत में खिलाड़ियों की फिटनेस और चोट प्रबंधन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से बाहर हो जाने के बाद से चयनकर्ताओं और बोर्ड के अधिकारियों के बीच समन्वय की भारी कमी खुलकर सामने आ गई है। शुरुआती दौर में चयन समिति को यह भरोसा दिलाया गया था कि बुमराह 15 अगस्त से शुरू हो रही इस महत्वपूर्ण टेस्ट सीरीज के लिए पूरी तरह से उपलब्ध रहेंगे, लेकिन बाद में अचानक यह बात सामने आई कि उनकी शारीरिक समस्या उम्मीद से कहीं ज्यादा गंभीर है और वह मैदान पर उतरने की स्थिति में नहीं हैं।
चयन समिति और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच वर्चुअल बैठक
इस पूरे घटनाक्रम और खिलाड़ियों के चोट प्रबंधन से जुड़े मामलों पर गहन चर्चा करने के लिए सोमवार को एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ वीवीएस लक्ष्मण और चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर ने भी हिस्सा लिया। हालांकि खेल के मैदान पर खिलाड़ियों को चोट लगना एक सामान्य बात है, लेकिन आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक संसाधनों से लैस होने के बावजूद सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की खेल विज्ञान टीम का हालिया प्रदर्शन लगातार निराशाजनक रहा है और वह उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है।
नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर उठ रहे बड़े सवाल
बीसीसीआई में नितिन पटेल के लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद से खेल विज्ञान विभाग के प्रमुख का पद खाली पड़ा हुआ है। ऐसे में बेंगलुरु स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर की कमान संभाल रहे अंतरिम खेल विज्ञान प्रमुख धनंजय कौशिक की कार्यप्रणाली पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। हालांकि किसी की व्यक्तिगत योग्यता पर सीधा सवाल नहीं उठाया जा रहा है, लेकिन खिलाड़ियों की चोट से उबरने की समयसीमा तय करने और रिटर्न टू प्ले प्रोटोकॉल के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक टेस्ट मैच खेलने का दिया गया था भरोसा
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के कामकाज से जुड़े एक बीसीसीआई अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि किसी भी खिलाड़ी को सीरीज से बाहर कर देना सबसे आसान विकल्प होता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वहां की खेल विज्ञान टीम देश के शीर्ष खिलाड़ियों को तय समय पर दोबारा मैदान पर उतारने के लिए पर्याप्त प्रयास कर रही है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि चयनकर्ताओं को पहले पूरी तरह आश्वस्त किया गया था कि जसप्रीत बुमराह श्रीलंका के खिलाफ कम से कम एक टेस्ट मैच खेलने के लिए हर हाल में उपलब्ध रहेंगे।
समीक्षा के दायरे में टीम फिजियो की भूमिका
भारतीय क्रिकेट टीम के फिजियो कमलेश जैन की कार्यशैली और भूमिका भी अब कड़ी समीक्षा के दायरे में आ गई है। वह पिछले लगभग पांच वर्षों से लगातार भारतीय टीम के साथ जुड़े हुए हैं और खिलाड़ियों के बीच काफी लोकप्रिय भी माने जाते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और चयनकर्ता अजीत अगरकर इसी महत्वपूर्ण बैठक का इंतजार कर रहे थे। इस अहम बैठक में वीवीएस लक्ष्मण के अलावा बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी समन्वयक की भूमिका में भाग लिया। चूंकि गौतम गंभीर को अगले तीन सप्ताह तक श्रीलंका में ही रहना है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि यह समीक्षा बैठक आमने-सामने हुई या पूरी तरह वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुई। इसके अलावा यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि जब जुलाई के महीने में गंभीर और अगरकर दोनों ही भारत में पूरी तरह उपलब्ध थे, तब इस प्रकार की समीक्षा बैठक आयोजित क्यों नहीं की गई।



















