छत्तीसगढ़ का छुईखदान इलाका किसी जमाने में अपनी खास महक और उम्दा पान के लिए पूरे प्रदेश में मशहूर था। स्थानीय बाजारों से लेकर आसपास के जिलों तक इसकी जबरदस्त मांग रहती थी। वक्त के साथ जैसे-जैसे बाजार ने मुंह मोड़ा, सरकारी प्रोत्साहन कम हुआ और लोगों की खानपान की आदतें बदलीं, छुईखदान के इस पारंपरिक पान का दायरा सिमटता चला गया। इस लुप्त होती पहचान को अब इलाके की ग्रामीण महिलाओं ने अपने अनूठे प्रयासों और कड़ी मेहनत से दोबारा जिंदा कर दिखाया है।
महिला स्व-सहायता समूह का संगठित प्रयास
साल 2000 से सक्रिय मां बम्लेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह ने छुईखदान के इस ऐतिहासिक पान को नई जिंदगी देने की ठानी है। इस समूह में इस समय 12 महिलाएं एकजुट होकर काम कर रही हैं। समूह की सचिव आशा मोहबिया के अनुसार, छुईखदान के पान का स्वर्णिम दौर धीरे-धीरे खत्म होने लगा था क्योंकि किसानों और कारीगरों को न तो सही बाजार मिल रहा था और न ही जरूरी प्रोत्साहन। उत्पादन और बिक्री में भारी गिरावट आने से पान की पारंपरिक खेती और इससे जुड़े कारोबार पूरी तरह सिमटते चले गए थे।
कृषि महाविद्यालय के सहयोग से वैल्यू एडिशन
इस मंदी से बाहर निकलने के लिए महिलाओं ने एक नई राह चुनी। छत्तीसगढ़ सरकार और कृषि महाविद्यालय के तकनीकी मार्गदर्शन में इस समूह ने पान के वैल्यू एडेड यानी मूल्य संवर्धित उत्पादों पर काम करना शुरू किया। पारंपरिक बीड़ा पान की जगह नए और आधुनिक उत्पाद तैयार करने की योजना बनाई गई। महिलाएं अब सीधे अपने घरों से पान फ्रेश, पारंपरिक बीड़ा पान, पान का लड्डू, पान की चाय और पान का सूखा पाउडर जैसे अनोखे उत्पाद बना रही हैं। इन सभी वस्तुओं को आकर्षक और आधुनिक पैकेजिंग में पेश किया जा रहा है, जिससे बाजार में इनकी अलग पहचान बन रही है।
स्वास्थ्य लाभ और महानगरों से मिलते ऑर्डर
पान से बने ये नए उत्पाद न केवल खाने में स्वादिष्ट हैं बल्कि सेहत के लिहाज से भी गुणकारी माने जाते हैं। पारंपरिक रूप से पान पाचन शक्ति सुधारने, सांसों की ताजगी बनाए रखने, मुंह की दुर्गंध दूर करने और शरीर को ताजगी भरी ऊर्जा देने में मददगार माना जाता है। इसी खूबी के चलते ग्राहकों के बीच इन उत्पादों का आकर्षण बढ़ रहा है। महिला समूह की पहुंच अब सिर्फ राजधानी रायपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बॉम्बे और हैदराबाद जैसे बड़े महानगरों से भी विशेष मांग आ रही है। महिलाएं इन बड़े शहरों से आने वाले ऑर्डरों को समय पर पूरा कर रही हैं।
छह महीने में 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा
बीते छह महीनों से यह महिला समूह लगातार इन उत्पादों का निर्माण और विपणन कर रहा है, जिससे उन्हें ठोस आर्थिक संबल मिला है। नवंबर महीने में आयोजित राज्योत्सव के दौरान समूह ने अपना स्टॉल लगाया था, जहां उन्होंने 32 हजार रुपये की सीधी बिक्री की। अब तक के पूरे काम से समूह को करीब 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो चुका है। उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों में विस्तार के साथ आने वाले दिनों में इस कमाई में और भी इजाफा होने की पूरी उम्मीद है।



















