क्रिकेट के मैदान पर हाल ही में कप्तानी की जिम्मेदारी से मुक्त होने वाली अनुभवी खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर ने एक धमाकेदार पारी खेलकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए तीसरे टी20 इंटरनेशनल मैच में उनके बल्ले से एक ऐसी पारी निकली, जिसने उनके चेहरे पर जीत की खुशी लाने के साथ-साथ आंखों में भावुक आंसू भी ला दिए। लंबे समय तक रनों के लिए जूझने के बाद इस बल्लेबाज ने मैदान पर अपनी पुरानी लय हासिल की और एक यादगार रिकॉर्ड अपने नाम किया। मैच के बाद जब वह अपनी इस उपलब्धि पर बात करने आईं, तो भावनाओं के सैलाब के आगे उनका संयम टूट गया और वह इंटरव्यू को बीच में ही अधूरा छोड़कर वहां से चली गईं।
मंगलवार को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में हरमनप्रीत ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने महज 41 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 91 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 10 शानदार चौके और 5 गगनचुंबी छक्के निकले। उन्होंने अपनी पारी की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और सिर्फ 25 गेंदों के भीतर ही अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। उनकी इस आतिशी बल्लेबाजी की बदौलत भारतीय टीम ने निर्धारित ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 216 रनों का एक विशाल स्कोर खड़ा किया। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के पुरस्कार से नवाजा गया।
बैट स्विंग और निरंतर अभ्यास पर दिया जोर
मैच के बाद हुई औपचारिक बातचीत के दौरान हरमनप्रीत ने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय अपनी बल्लेबाजी की मूल ताकत और रणनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें क्रीज पर समय बिताने और शॉट खेलने में बेहद आनंद आया। उनका मुख्य उद्देश्य मैदान पर जाकर अपनी खेल शैली का लुत्फ उठाना था और सबसे अच्छी बात यह रही कि इस दौरान टीम के लिए रन भी बनते चले गए। अपनी पारी की शुरुआत की योजना के बारे में साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली ही गेंद पर चौका लगाया, तो उन्हें यह स्पष्ट हो गया कि इस पिच पर बल्लेबाजी करना काफी आसान और अनुकूल है।
उस एक शुरुआती शॉट ने उनके भीतर गजब का आत्मविश्वास भर दिया और उन्होंने तय किया कि वह बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपने स्वाभाविक खेल को आगे भी जारी रखेंगी। उन्होंने अपने मजबूत बैट स्विंग को अपनी सबसे बड़ी ताकत करार दिया और कहा कि वह नेट अभ्यास के दौरान लगातार इसी तकनीक पर काम करना चाहती हैं ताकि मैदान पर उनकी फॉर्म बरकरार रहे।
कोच का नाम लेते ही भर आया गला
अपनी इस ऐतिहासिक पारी का पूरा श्रेय अपने बल्लेबाजी कोच हिमांशु को देते हुए हरमनप्रीत बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा हुए वीडियो में नजर आए पलों का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने कोच हिमांशु भैया को धन्यवाद देना चाहती हैं, जिन्होंने उनकी तकनीक को सुधारने के लिए कड़ी मेहनत की है। वह अभ्यास सत्रों के दौरान भी उन्हें मैच जैसे कड़े दबाव का सामना करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने महसूस किया कि अब उनके ऊपर किसी भी तरह का कोई मानसिक दबाव नहीं बचा है, बल्कि अब यह सिर्फ मैदान पर जाकर खेल का पूरी तरह आनंद लेने का समय है।
जैसे ही उन्होंने अपने कोच का जिक्र किया, उनका गला भर आया और उनकी आंखें नम हो गईं। अपनी भावनाओं को और अधिक नियंत्रित न रख पाने के कारण उन्होंने इंटरव्यू का माइक जमीन पर रख दिया और तेजी से वहां से चली गईं। उनका यह बेहद भावुक और संवेदनशील पल इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर खेल प्रेमियों की विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।


















