खेल के मैदान पर खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उसका बल्ला या गेंद नहीं होती, बल्कि उसके पीछे छुपी प्रेरणा होती है। इंदौर के रहने वाले सारांश जैन की क्रिकेट की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। भारतीय टेस्ट टीम में उनका पहुंचना केवल एक खिलाड़ी की कामयाबी भर नहीं है, बल्कि यह उनके पिता के अटूट विश्वास, मां की लंबी तपस्या और पूरे परिवार के कड़े त्याग का परिणाम है।
पिता की वह पुरानी चिट्ठी
यह वाकया साल 2014 का है जब सारांश ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट खेल रहे थे। उसी दौरान उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और उनके पिता सुबोध जैन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार ने जानबूझकर इस बात की भनक सारांश को नहीं लगने दी ताकि उनका ध्यान खेल से न भटके और उनका सपना अधूरा न रह जाए।
जब सारांश विदेश दौरे से वापस लौटे, तब उन्हें पिता की बीमारी के बारे में पता चला। उस वक्त अस्पताल में भर्ती उनके पिता बोलने की हालत में नहीं थे। लेकिन एक पिता का हौसला देखिए कि उन्होंने कांपते हुए हाथों से कागज के टुकड़े पर लिखा कि बेटा तू अच्छा खेल, मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगा।
आज इतने साल बीत जाने के बाद भी वह कागज का टुकड़ा सारांश के लिए किसी रक्षा कवच से कम नहीं है। वह आज भी मैदान पर उतरने से पहले अपने किट बैग से उस पुरानी चिट्ठी को निकालते हैं, उसे पढ़ते हैं और फिर खेलने जाते हैं। उनके लिए वह चंद लाइनें ही सबसे बड़ी हिम्मत और जीत का मंत्र हैं।
26 साल का कड़ा संघर्ष
भारतीय टीम की टेस्ट कैप हासिल करना हर युवा क्रिकेटर का सपना होता है। सारांश के लिए यह मुकाम रातों-रात नहीं मिला। इस सफलता के पीछे उनकी छब्बीस साल की कड़ी मेहनत और साधना छिपी है। तैंतीस साल के इस ऑलराउंडर ने जिंदगी के हर मोड़ पर हार मानने से इनकार कर दिया। श्रीलंका दौरे के लिए जब उनका नाम भारतीय टेस्ट टीम में आया, तो वह उनके लंबे धैर्य का ही सिला था।
इस पूरे सफर में उनका पूरा परिवार चट्टान की तरह साथ खड़ा रहा। जब पिता अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, तब उनकी मां संगीता जैन ने अकेले ही पूरे घर को संभाला। उनके बड़े भाई ने हर कदम पर उनका संबल बढ़ाया। इसके अलावा उनकी पत्नी हर्षिता जैन ने भी बेहद मुश्किल दौर में उनका साथ दिया और उनका हौसला टूटने नहीं दिया। सभी के दिलों में बस एक ही अरमान था कि सारांश एक दिन देश के लिए जरूर खेलेंगे।
शानदार प्रदर्शन से मिला बुलावा
हाल ही में श्रीलंका के दौरे पर गए इंडिया-ए के लिए सारांश जैन ने शानदार खेल का मुजायरा पेश किया था। उन्होंने अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी का जलवा दिखाते हुए नाबाद सत्तर रन बनाए और गेंदबाजी में छह विकेट अपने नाम किए। उनके इसी ऑलराउंड प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस चयन के साथ ही वह इंदौर के ऐसे चौथे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्हें भारतीय टेस्ट टीम में खेलने का मौका मिला है।



















