पारंपरिक क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में किसी भी टीम के बल्लेबाजों की असली परीक्षा धैर्य और तकनीकी मजबूती से होती है। जब कोई बल्लेबाजी क्रम लगातार मुकाबलों में चार सौ का आंकड़ा पार करता है, तो वह न केवल विपक्षी गेंदबाजों के हौसले पस्त करता है बल्कि खेल के नतीजे को भी अपने पक्ष में मोड़ देता है। लाल गेंद के इतिहास में ऐसे चुनिंदा दौर आए हैं जब टीमों ने क्रीज पर रनों की बारिश करते हुए लगातार पारियों में यह विशाल स्कोर खड़ा किया। इस ऐतिहासिक सूची में भारतीय क्रिकेट टीम का दबदबा करीब चार दशकों से बना हुआ है, जहां उसने लगातार छह बार यह कारनामा करके ऐसा विश्व कीर्तिमान स्थापित किया जिसे आज तक कोई दूसरी टीम पीछे नहीं छोड़ पाई है।
1986 और 1987 के दौरान भारतीय बल्लेबाजों का ऐतिहासिक तूफान
विश्व क्रिकेट में लगातार छह टेस्ट पारियों में 400 या उससे ज्यादा रन बनाने का अद्वितीय रिकॉर्ड भारत के खाते में दर्ज है। इस स्वर्णिम सफर की शुरुआत 15 अक्टूबर 1986 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में देखने को मिली थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले की दूसरी पारी में भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए 5 विकेट पर 517 रन बनाकर पारी समाप्ति की घोषणा की थी। इसके बाद श्रीलंकाई टीम के भारतीय दौरे पर मेजबान टीम के बल्लेबाजों का दबदबा और अधिक बढ़ गया। 17 दिसंबर 1986 को कानपुर में खेले गए मुकाबले में भारत ने 7 विकेट के नुकसान पर 676 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया।
रनों की यह रफ्तार आगे भी बदस्तूर जारी रही। 27 दिसंबर 1986 को नागपुर टेस्ट की पहली पारी में भारतीय टीम ने 6 विकेट गंवाकर 451 रन बनाए और पारी घोषित कर दी। इसके बाद नए कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में 4 जनवरी 1987 को कटक के मैदान पर भारत ने पहली पारी में सटीक 400 रन बनाकर इस सिलसिले को मजबूत किया। अगली चुनौती चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ थी। 3 फरवरी 1987 को चेन्नई टेस्ट में भारतीय टीम ने 9 विकेट पर 527 रन जोड़ डाले। इस ऐतिहासिक सिलसिले का समापन 11 फरवरी 1987 को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में हुआ, जहां पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने 403 रन बनाए। इस तरह लगातार छह टेस्ट पारियों में चार सौ से ज्यादा रन जोड़ने का अनोखा विश्व रिकॉर्ड पूरा हुआ।
डॉन ब्रैडमैन के सुनहरे दौर में ऑस्ट्रेलियाई टीम का कारनामा
ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपने टेस्ट इतिहास में दो अलग-अलग दशकों में लगातार पांच पारियों में 400 से अधिक रन बनाने की उपलब्धि हासिल की है। पहली बार यह पराक्रम डॉन ब्रैडमैन के दौर में वर्ष 1937 और 1938 के बीच देखने को मिला था। 29 जनवरी 1937 को एडिलेड में इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले की तीसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 433 रन बनाए। इसके बाद अगले ही मैच में 26 फरवरी 1937 को मेलबर्न के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया ने 604 रनों का विशाल पहाड़ खड़ा किया।
यह सिलसिला अगले वर्ष इंग्लैंड दौरे पर भी कायम रहा। 10 जून 1938 को नॉटिंघम टेस्ट मैच के दौरान ऑस्ट्रेलियाई टीम ने एक ही मुकाबले की दोनों पारियों में विपक्षी गेंदबाजों पर पूरा दबाव बनाया। उन्होंने पहली पारी में 411 रन बनाए और दूसरी पारी में 6 विकेट पर 427 रन जोड़े। इसके तुरंत बाद 24 जून 1938 को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 422 रन बनाए और इस तरह लगातार पांच पारियों में चार सौ से अधिक रन जुटाने का कीर्तिमान स्थापित किया।
स्टीव वॉ के नेतृत्व में 2003 में दोहराया गया कमाल
दशकों के अंतराल के बाद वर्ष 2003 में स्टीव वॉ की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने एक बार फिर लगातार पांच पारियों में चार सौ का आंकड़ा पार करके इतिहास दोहराया। इस सफर का आगाज 9 मई 2003 को सेंट जॉन्स के मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 417 रनों की मजबूत पारी से हुआ था। इसके बाद बांग्लादेश की टीम ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर आई, जहां 18 जुलाई 2003 को डार्विन में ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट पर 407 रन बनाए। इसी श्रृंखला के अगले मैच में 25 जुलाई को केर्न्स के मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने 4 विकेट के नुकसान पर 556 रन ठोक दिए।
इस सिलसिले की सबसे यादगार पारी पर्थ के वाका मैदान पर देखने को मिली। 9 अक्टूबर 2003 को जिम्बाब्वे के खिलाफ मैथ्यू हेडन ने 380 रनों की व्यक्तिगत पारी खेली, जिसके दम पर ऑस्ट्रेलिया ने 6 विकेट पर 735 रन बना डाले। इसके बाद 17 अक्टूबर 2003 को सिडनी टेस्ट में जिम्बाब्वे के खिलाफ ही 403 रन बनाकर ऑस्ट्रेलियाई टीम ने लगातार पांचवीं बार 400 से ज्यादा रन बनाने का मील का पत्थर छू लिया।
साल 2009 में भारतीय टीम की दोबारा रन वर्षा
भारतीय क्रिकेट टीम ने वर्ष 2009 में एक बार फिर अपने शानदार बल्लेबाजी क्रम के दम पर लगातार पांच पारियों में चार सौ से अधिक रन बनाने का कारनामा दोहराया। इस सिलसिले की शुरुआत 3 अप्रैल 2009 को वेलिंगटन के मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ हुई, जहां भारत ने 7 विकेट पर 434 रन बनाए। इसके बाद श्रीलंकाई टीम के खिलाफ घरेलू मैदानों पर भारतीय बल्लेबाजों ने बड़े स्कोर खड़े किए। 16 नवंबर 2009 को अहमदाबाद टेस्ट की दोनों पारियों में भारतीय टीम ने क्रमशः 426 रन और 4 विकेट पर 412 रन बनाए।
इसके बाद 24 नवंबर 2009 को कानपुर के मैदान पर खेलते हुए भारत ने 642 रनों का मजबूत स्कोर बनाया। इस शानदार दौर का अंतिम पड़ाव 2 दिसंबर 2009 को मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में आया, जहां भारतीय बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ाते हुए 9 विकेट पर 726 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया।
1983 में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों का चार पारियों का प्रभुत्व
इन लंबी लकीरों के अलावा ऑस्ट्रेलियाई टीम ने साल 1983 में भी लगातार चार पारियों में 400 से ज्यादा रन बनाने का कारनामा दर्ज कराया था। इसकी शुरुआत 22 अप्रैल 1983 को कैंडी के मैदान पर श्रीलंका के खिलाफ 4 विकेट पर 514 रन बनाकर हुई थी। इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने दबदबा बनाए रखा। पर्थ में 11 नवंबर 1983 को ऑस्ट्रेलिया ने 9 विकेट पर 436 रन बनाए। इसके बाद 25 नवंबर 1983 को ब्रिस्बेन में 7 विकेट पर 509 रन और 9 दिसंबर 1983 को एडिलेड में 465 रन बनाकर टीम ने लगातार चार पारियों में यह मील का पत्थर हासिल किया था।



















