क्रिकेट के मैदान पर कई बार ऐसे दिलचस्प और अनोखे संयोग देखने को मिलते हैं जो लंबे समय तक चर्चा का विषय बने रहते हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया ऑस्ट्रेलिया के स्टार बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन के साथ जुड़ा है। डरबन में खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में उनके साथ एक गजब की समानता देखने को मिली, जहां उन्होंने मैच की दोनों पारियों में बिल्कुल एक समान गेंदे खेलीं और उतने ही रन बनाए। हालांकि इस गजब के संयोग के बावजूद उनके बल्ले से बड़ी पारी देखने को नहीं मिली और वह एक बार फिर लंबी पारी खेलने में नाकामयाब रहे। उनके बल्ले से शतक का इंतजार काफी लंबा होता जा रहा है जो टीम प्रबंधन के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।
एक ही स्कोर और गेंदों का हैरान करने वाला इत्तेफाक
साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच डरबन के मैदान पर खेले जा रहे इस मुकाबले की पहली पारी में मार्नस लाबुशेन ने क्रीज पर टिककर खेलने की कोशिश की। उन्होंने कुल 58 गेंदों का सामना किया और इस दौरान बल्ले से 37 रन बनाकर आउट हो गए। अपनी इस पहली पारी में उन्होंने छह शानदार चौके भी जड़े, लेकिन अंत में साउथ अफ्रीका के गेंदबाज वियान मुल्डर ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। इसके बाद जब मैच की दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज दोबारा मैदान पर उतरे, तो आंकड़े बिल्कुल वैसे ही दोहराए गए। दूसरी पारी में भी मार्नस लाबुशेन ने ठीक 58 गेंदों का सामना किया और ठीक 37 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। हालांकि इस बार उनके बल्ले से चार चौके निकले और उन्हें आउट करने वाले गेंदबाज केशव महाराज थे, लेकिन गेंदों और रनों का यह आंकड़ा बिल्कुल एक जैसा रहा।
शतक के लिए लंबा होता जा रहा है इंतजार
मैच की दोनों पारियों में रनों और गेंदों का यह मेल अपने आप में काफी दुर्लभ है, लेकिन मार्नस लाबुशेन के लिए यह मुकाबला निजी तौर पर बड़ी राहत लेकर नहीं आया। वह दोनों ही मौकों पर अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील करने से चूक गए। उनके टेस्ट करियर के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। मार्नस लाबुशेन की पिछली 44 पारियों से बल्ले से कोई भी टेस्ट शतक नहीं निकला है। साल 2018 में अपने टेस्ट करियर का शानदार आगाज करने वाले इस बल्लेबाज ने अपनी आखिरी टेस्ट सेंचुरी साल 2023 में इंग्लैंड के खिलाफ लगाई थी, जिसके बाद से वह लगातार शतक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि इस बीच उन्होंने कुछ पचास से अधिक रन की पारियां जरूर खेलीं, लेकिन वे उसे तिहरे आंकड़े तक पहुंचाने में कामयाब नहीं हो पाए। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन की तरफ से उन पर लगातार भरोसा जताया जा रहा है और उन्हें प्लेइंग इलेवन में लगातार मौके मिल रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मार्नस लाबुशेन अपनी इस फॉर्म से उबरकर कब तक शतक का सूखा खत्म करते हैं या फिर टीम से बाहर होने से पहले वे अपनी पुरानी लय हासिल कर पाते हैं।
























