तोचिगी प्रांत में चक्रवाती तूफान के चलते मैदान भीग जाने से देरी से शुरू हुए मुकाबले ने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मारुति सुजुकी कप नाम से एक फ्रेंडली टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित किया गया था। इस मुकाबले में जब टेलीविजन स्क्रीन पर दोनों ओर से केवल पांच-पांच ओवर का खेल तय हुआ, तो कई दर्शक हैरान रह गए। मैच की अंतिम गेंद तक चले इस कड़े संघर्ष में भारतीय टीम ने हांफते-हांफते 2 रनों से रोमांचक जीत दर्ज की। इस अप्रत्याशित और छोटे मैच के बाद खेल जगत में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि क्या महज पांच ओवर के मैच को वास्तव में अंतरराष्ट्रीय मैच का आधिकारिक दर्जा हासिल होता है और इस पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियम क्या कहते हैं।
क्या 5 ओवर की भिड़ंत को मिलता है आधिकारिक दर्जा
क्रिकेट नियमों की कसौटी पर परखें तो पांच ओवर के मैच को आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय मैच माना जाता है। टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप के तहत इस दर्जे के लिए कुछ बुनियादी शर्तें पूरी होना अनिवार्य होता है। सबसे पहली शर्त यह है कि मुकाबला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी के पूर्ण या एसोसिएट सदस्य देशों के बीच खेला जाना चाहिए। भारत के साथ-साथ जापान भी आईसीसी का अधिकृत सदस्य देश है। दूसरी और सबसे अहम शर्त यह है कि एक वैध परिणाम वाले मैच के लिए दोनों पारियों में कम से कम 5-5 ओवर फेंके जाने की न्यूनतम सीमा पूरी होनी चाहिए। यदि दोनों टीमों को कम से कम पांच ओवर की बल्लेबाजी का अवसर मिलता है, तो वह मुकाबला पूरी तरह से आधिकारिक टी20 अंतरराष्ट्रीय माना जाता है।
आईसीसी प्लेइंग कंडीशंस और न्यूनतम ओवरों की अनिवार्यता
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के टी20 प्लेइंग कंडीशंस के अनुसार, सामान्य द्विपक्षीय सीरीज या ग्रुप मैचों में किसी मुकाबले को आधिकारिक और पूर्ण परिणाम वाला घोषित करने के लिए दूसरी पारी में लक्ष्य का पीछा कर रही टीम के सामने कम से कम 5 ओवर फेंके जाने जरूरी होते हैं। इसी के साथ खेल शुरू होने से पहले दोनों टीमों के लिए कम से कम पांच-पांच ओवर निर्धारित किया जाना अनिवार्य होता है।
हालांकि, इन नियमों में कुछ स्पष्ट अपवाद भी शामिल हैं। यदि बारिश या अन्य बाधाओं के चलते खेल इतना ज्यादा प्रभावित हो जाए कि लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम के लिए 5 ओवर का खेल कराना भी संभव न रह जाए, तो उस स्थिति में मैच को आधिकारिक रूप से रद्द यानी नो रिजल्ट घोषित कर दिया जाता है। ऐसे मुकाबलों को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मैच का परिणाम नहीं माना जाता। इसके अलावा, आईसीसी के प्रमुख टूर्नामेंटों के नॉकआउट मुकाबलों, जैसे सेमीफाइनल या फाइनल मैचों के लिए नियम और अधिक सख्त होते हैं। बड़े टूर्नामेंटों के नॉकआउट दौर में वैध नतीजे के लिए दोनों पारियों में 5 ओवर के बजाय न्यूनतम 10-10 ओवर फेंके जाना जरूरी होता है।
5 ओवर के अंतरराष्ट्रीय मैच में गेंदबाजी और फील्डिंग के नियम
जब टी20 मैच घटकर केवल पांच ओवर का रह जाता है, तब खेल के कई सामान्य नियमों में आनुपातिक बदलाव किए जाते हैं। गेंदबाजों के लिए निर्धारित कोटे का नियम बेहद सख्त हो जाता है। एक सामान्य 5 ओवर की पारी में कोई भी गेंदबाज कुल ओवरों के पांचवें हिस्से से अधिक गेंदबाजी नहीं कर सकता। इसका सीधा अर्थ यह है कि प्रत्येक गेंदबाज अधिकतम केवल 1 ओवर ही फेंक सकता है। मैच की विशेष परिस्थितियों या संशोधनों में आनुपातिक नियम लागू होते हैं, लेकिन सामान्य रूप से 5 ओवर के मैच में 5 अलग-अलग गेंदबाजों को एक-एक ओवर की जिम्मेदारी दी जाती है।
इसी तरह पावरप्ले और फील्डिंग पाबंदियों में भी कटौती की जाती है। 30 गज के घेरे के बाहर खड़े रहने वाले फील्डरों की संख्या पारी के घटे हुए ओवरों के अनुपात में कम कर दी जाती है। इसके अलावा, यदि दूसरी पारी के दौरान बारिश या किसी अन्य रुकावट के कारण खेल दोबारा बाधित होता है और ओवरों में और कटौती करनी पड़ती है, तो संशोधित लक्ष्य निर्धारित करने के लिए डकवर्थ लुईस स्टर्न यानी डीएलएस पद्धति का उपयोग किया जाता है।
नियम का ऐतिहासिक सफर और 2005 की शुरुआत
टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में प्रतिकूल मौसम या अन्य कारणों से ओवर घटाए जाने पर न्यूनतम 5 ओवर का नियम इस प्रारूप की शुरुआत से ही लागू है। साल 2005 में जब पहला आधिकारिक पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला गया था, तभी से यह मानक अस्तित्व में आया। टी20 प्रारूप के शुरुआती दौर में विभिन्न देशों की घरेलू प्रतियोगिताओं में न्यूनतम ओवरों को लेकर अलग-अलग नियम अपनाए जाते थे। बाद में आईसीसी ने सभी अंतरराष्ट्रीय टी20 मुकाबलों के लिए इसे एक समान मानक बना दिया ताकि किसी भी मैच का आधिकारिक परिणाम निकालने के लिए दूसरी पारी में कम से कम 5 ओवर फेंकना अनिवार्य रहे।
मैदान पर ड्रामा: भारत की लड़खड़ाहट और जापान का पलटवार
तोचिगी में खेले गए इस मारुति सुजुकी कप मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने टॉस जीतकर बैटिंग चुनी थी। लेकिन केवल पांच ओवर के दबाव में भारत के शीर्ष बल्लेबाजों का प्रदर्शन बेहद चौंकाने वाला रहा। भारतीय पारी में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन और श्रेयस अय्यर जैसे बड़े और स्थापित नाम केवल 5 ओवर के भीतर अपने विकेट गंवा बैठे। जापान की कसी हुई गेंदबाजी के सामने भारतीय टीम निर्धारित 5 ओवरों में सिर्फ 32 रन ही बना सकी।
33 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जापान की टीम ने शानदार जज्बा दिखाया और मैच को आखिरी गेंद तक खींच ले गई। अंतिम ओवर में जीत के लिए जापान को 8 रनों की दरकार थी और मैच की अंतिम गेंद पर जीत के लिए 4 रन चाहिए थे। लेकिन जापानी बल्लेबाज जरूरी रन बनाने से चूक गए और भारत ने केवल 2 रनों के मामूली अंतर से यह मैच जीत लिया। एक नौसिखिया समझी जाने वाली टीम के खिलाफ भारत का इस तरह संघर्ष करना और अंतिम गेंद पर जीतना खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया।


















