भारतीय घरेलू क्रिकेट के प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी के दौरान एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है. प्लेट ग्रुप में नगालैंड के खिलाफ चौथे दौर के मुकाबले में मेघालय की पूरी एकादश अचानक बदली हुई नजर आई. किसी तकनीकी या रणनीतिक कारण अथवा खराब प्रदर्शन की वजह से नहीं, बल्कि राज्य क्रिकेट संघ के भीतर प्रशासनिक खींचतान और न्यायिक निर्देश के चलते यह बड़ा कदम उठाया गया.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला प्रशासनिक ढांचा
इस पूरे मामले की जड़ें राज्य निकाय के आंतरिक विवाद से जुड़ी हैं. 30 अक्टूबर को मेघालय हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद राज्य क्रिकेट के संचालन और चयन प्रक्रियाओं से जुड़े अधिकार एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स संगमा के गुट के पास आ गए. प्रशासनिक नियंत्रण बदलते ही मैदान पर उतरने वाली टीम की रूपरेखा भी बदल गई, जिसके तहत पहले खेल रहे दल को बाहर कर नई टीम को जिम्मेदारी सौंप दी गई.
शुरुआती राउंड में टीम का मजबूत प्रदर्शन
हैरानी की बात यह है कि बदली गई पुरानी टीम ने टूर्नामेंट के पहले तीन मुकाबलों में शानदार खेल दिखाया था. उस दल ने तीन राउंड की समाप्ति पर 12 अंक जुटाए थे, जिसमें एक जीत और दो ड्रॉ मुकाबले शामिल थे. इस शुरुआती टीम को एसोसिएशन के सचिव रेनॉल्ड खारकमनी के नेतृत्व वाले समूह द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया था. हालांकि, एसोसिएशन के दो शीर्ष पदाधिकारियों के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अंततः मैदान के खेल पर भारी पड़ गई.
बीसीसीआई का रुख और अदालती आदेश का पालन
मामला अदालत पहुंचने पर हाईकोर्ट ने अध्यक्ष जेम्स संगमा के अधिकारों और उनके कदमों को सही ठहराया. इस निर्णय के बाद चयन की बागडोर उनके पाले में चली गई और चौथे राउंड से ठीक पहले रातों-रात नई टीम का गठन कर दिया गया. इस संबंध में बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि बोर्ड के पास अदालत के आदेश का पालन करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है, इसलिए अध्यक्ष की पहल पर तैयार की गई टीम को मैदान में उतरने की अनुमति दी गई. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने इस न्यायिक आदेश में किसी भी प्रकार का दखल देने से मना कर दिया है.



















