अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया में आए दिन अनोखे रिकॉर्ड बनते हैं और कई ऐसी कहानियां दर्ज होती हैं जो पीढ़ियों तक याद रखी जाती हैं। कुछ कहानियां खिलाड़ियों के संघर्ष को दर्शाती हैं, तो कुछ मैदान पर हासिल की गई ऐतिहासिक सफलताओं की गवाही देती हैं। न्यूजीलैंड क्रिकेट के इतिहास में रदरफोर्ड परिवार की कहानी भी एक ऐसा ही दिलचस्प अध्याय है। एक ही घर से निकले दो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों का सफर बिल्कुल अलग और हैरान कर देने वाला रहा। एक तरफ जहां पिता अपने पहले ही टेस्ट मैच की दोनों पारियों में बिना कोई रन बनाए शून्य पर आउट हो गए थे, वहीं करीब 28 साल बाद उनके बेटे ने अपने डेब्यू मैच में ही रनों का विशाल पहाड़ खड़ा करके उस पुराने दर्द को गर्व में बदल दिया।
1985 का डरावना डेब्यू: वेस्टइंडीज की खतरनाक गेंदबाजी के सामने केन रदरफोर्ड का संघर्ष
यह कहानी साल 1985 से शुरू होती है, जब न्यूजीलैंड की टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर गई हुई थी। उस दौर में वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीम का विश्व क्रिकेट पर एक छत्र राज था और उनके पास मैल्कम मार्शल, जोएल गार्नर तथा माइकल होल्डिंग जैसे दिग्गज और बेहद तेज गेंदबाजों की चौकड़ी मौजूद थी। उनकी आग उगलती गेंदों का सामना करना दुनिया के किसी भी बल्लेबाज के लिए किसी भयानक अनुभव से कम नहीं था। ऐसे कठिन माहौल में न्यूजीलैंड के 19 वर्षीय युवा बल्लेबाज केन रदरफोर्ड को अपने टेस्ट करियर की शुरुआत करने का मौका मिला।
तेज और उछाल भरी पिचों पर बल्लेबाजी करना केन रदरफोर्ड के लिए बेहद मुश्किल साबित हुआ। अपनी पहली पारी में वह बिना खाता खोले शून्य पर पवेलियन लौट गए। दूसरी पारी में टीम को उनसे एक मजबूत वापसी की उम्मीद थी, लेकिन वेस्टइंडीज के खतरनाक तेज गेंदबाजों ने उन्हें दोबारा शून्य पर ही आउट कर दिया। अपने करियर के पहले ही टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शून्य पर आउट होना यानी 'पेयर' बनाना किसी भी नए खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ा झटका हो सकता है। हालांकि, केन रदरफोर्ड ने इस निराशाजनक शुरुआत से हार नहीं मानी और कठिन मेहनत के दम पर आगे चलकर न्यूजीलैंड टीम के एक अहम बल्लेबाज और सफल कप्तान बने।
28 साल बाद बेटे का ऐतिहासिक पलटवार: हामिश रदरफोर्ड की 171 रनों की धमाकेदार पारी
पिता के इस निराशाजनक रिकॉर्ड के 28 साल बाद, मार्च 2013 में उनके बेटे हामिश रदरफोर्ड के लिए भी वही ऐतिहासिक मौका आया। हामिश रदरफोर्ड को डुनेडिन के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेलने का मौका दिया गया। इस मुकाबले से पहले पूरे रदरफोर्ड परिवार के मन में स्वाभाविक रूप से चिंता थी कि कहीं हामिश के साथ भी वही अनहोनी न हो जाए जो उनके पिता के साथ 1985 में हुई थी।
हामिश रदरफोर्ड ने मैदान पर कदम रखते ही अपने पिता के उस डरावने इतिहास को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया और इंग्लैंड के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने अपनी डेब्यू पारी में ही शानदार बल्लेबाजी करते हुए 171 रनों की जबरदस्त पारी खेली। इस यादगार पारी के दौरान हामिश ने 22 चौके और 3 दर्शनीय छक्के जड़े। यह प्रदर्शन इतना ऐतिहासिक था कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी भी कीवी बल्लेबाज द्वारा अपने डेब्यू मैच में बनाया गया यह दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बन गया।
कमेंट्री बॉक्स में पिता के आंसू और क्रिकेट की अनूठी विरासत
जब हामिश रदरफोर्ड मैदान पर इंग्लैंड के गेंदबाजों की धुनाई कर रहे थे और अपने 171 रनों की विशाल पारी खेल रहे थे, उस वक्त एक और बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। उनके पिता केन रदरफोर्ड खुद उसी मैच के दौरान कमेंट्री बॉक्स में मौजूद थे। अपने बेटे को मैदान पर शानदार शतक और 171 रन बनाते देख एक पिता के तौर पर उनकी आंखों में खुशी और गर्व के आंसू छलक आए। जो रिकॉर्ड 1985 में एक डरावने सपने की तरह शुरू हुआ था, वह 2013 में बेटे के बल्ले से निकली एक ऐतिहासिक पारी के साथ हमेशा के लिए गौरवमयी गाथा में बदल गया। यही खेल की वह अनूठी खूबसूरती है जो दो पीढ़ियों के सफर को एक यादगार कहानी में पिरो देती है।



















