पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने टेस्ट टीम की कप्तानी में बड़ा बदलाव करते हुए शान मसूद को हटाकर बाबर आजम को दोबारा कमान सौंप दी है। करीब तीन साल पहले सभी फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ चुके बाबर आजम अब सिर्फ टेस्ट टीम का नेतृत्व करेंगे, और यह फैसला वेस्टइंडीज-इंग्लैंड दौरे के लिए टीम के ऐलान के साथ ही सामने आया। बोर्ड के इस कदम ने कई फैंस को चौंका दिया, लेकिन हाई-परफॉर्मेंस निदेशक आकिब जावेद ने अब पूरी वजह खुलकर बता दी है।
शान मसूद की कुर्सी क्यों गई
आकिब जावेद के मुताबिक शान मसूद की कप्तानी में टीम कई ऐसे टेस्ट मैच हार गई जिन पर उसकी पकड़ मजबूत थी। उनका कहना है कि जीत के करीब पहुंचकर भी टीम बार-बार मौके गंवा बैठी, और यही आदत आखिरकार कप्तान बदलने की सबसे बड़ी वजह बनी।
उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन टेस्ट का उदाहरण दिया, जहां मैच पूरी तरह पाकिस्तान के कंट्रोल में था, लेकिन विपक्षी टीम के आखिरी बल्लेबाजों ने मिलकर 60 से 70 रन की साझेदारी जोड़ दी और मुकाबला निकाल ले गए। इसी तरह मुल्तान में वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टेस्ट में भी टीम बेहद आसानी से ढेर हो गई, जबकि हालात उसके पक्ष में थे। आकिब जावेद ने कहा कि ऐसी चूकें बार-बार दोहराई गईं और बोर्ड के लिए इन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया।
कप्तान की जिम्मेदारी सिर्फ नेतृत्व तक सीमित नहीं
आकिब जावेद ने साफ किया कि कप्तान का काम सिर्फ टॉस पर जाकर टीम की अगुवाई करना नहीं है, बल्कि मैच को आखिर तक जीत में बदलना भी उसकी जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक ओवर रेट को सही बनाए रखना, DRS का समझदारी से इस्तेमाल करना और टॉस के वक्त सही रणनीतिक फैसला लेना भी कप्तान की भूमिका का अहम हिस्सा है। उन्होंने माना कि टीम चयन और कुछ बाकी फैसलों की जिम्मेदारी सिलेक्टर्स और मैनेजमेंट की भी होती है, लेकिन मैदान पर लिए गए कई अहम फैसलों का हिसाब आखिरकार कप्तान को ही देना पड़ता है।
आंकड़ों में भी बाबर आगे
बोर्ड के फैसले के पीछे आंकड़े भी बड़ी भूमिका निभाते नजर आए। शान मसूद की कप्तानी में पाकिस्तान ने कुल 12 टेस्ट मैच खेले, जिनमें से टीम को सिर्फ चार में जीत मिली। इसके उलट बाबर आजम जब पहले टेस्ट कप्तान थे, तब उन्होंने 20 मैचों में टीम की अगुवाई की थी, जिसमें से 10 मुकाबले जीते गए थे और चार ड्रॉ रहे थे। जीत के इस बेहतर औसत को भी बोर्ड ने कप्तानी वापस सौंपने की एक बड़ी वजह माना है।
वेस्टइंडीज और इंग्लैंड दौरा बनेगी असली परीक्षा
बाबर आजम की नई पारी की शुरुआत वेस्टइंडीज दौरे से होगी, जहां दोनों टीमों के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जानी है। पहला टेस्ट 25 से 30 जुलाई तक त्रिनिदाद के ब्रायन लारा स्टेडियम में होगा, जबकि दूसरा मुकाबला 2 से 7 अगस्त तक क्वींस पार्क ओवल में खेला जाएगा। इसके बाद पाकिस्तान टीम सीधे इंग्लैंड रवाना होगी, जहां उसे तीन टेस्ट मैचों की कहीं ज्यादा कठिन सीरीज का सामना करना है। इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट 19 से 23 अगस्त तक हेडिंग्ले में, दूसरा 27 से 31 अगस्त तक लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर और तीसरा व आखिरी टेस्ट एजबेस्टन में खेला जाएगा। यही इंग्लैंड सीरीज बाबर आजम की कप्तानी की असली परीक्षा मानी जा रही है, क्योंकि यहीं तय होगा कि बोर्ड का यह फैसला कितना सही साबित होता है।













